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Breaking समाचार चैनलों की खिंचाई, टीवी डिबेट से होता है सबसे ज्यादा प्रदूषण

Breaking समाचार चैनलों की खिंचाई, टीवी डिबेट से होता है सबसे ज्यादा प्रदूषण

नईदिल्ली। भारत के  चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने प्रदूषण के मुद्दे पर जारी बहस के लिए टेलीविजन समाचार चैनलों की खिंचाई की। जस्टिस एनवी रमन्ना ने अदालत में एक सुनवाई के दौरान कहा कि समाचार चैनलों से सबसे ज्यादा प्रदूषण हो रहा है। 

उन्होंने यह कटाक्ष बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए किया।

लाइव लॉ’ के अनुसार, जस्टिस रमन्ना ने कहा कि चैनल पर हर किसी का अपना अजेंडा है।

 उन्होंने कहा कि टीवी डिबेट किसी भी चीज से ज्यादा प्रदूषण पैदा कर रहे हैं। ‘

जस्टिस सूर्यकांत ने बुधवार की सुनवाई में कहा कि दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर में चोक जैसी स्थिति हो जाती है। उन्होंने कहा, “आखिर सालभर केंद्र और दिल्ली सरकार इसको लेकर क्या करते हैं? इस स्थिति से बचने के लिए पहले ही ख्याल क्यों नहीं आता कि इससे कैसे निपटना है।”

सुनवाई में अदालत ने दिल्ली सरकार को पर्याप्त कदम नहीं उठाने और दिल्ली नगर निगम के साथ ‘आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेलने’ को लेकर फटकार लगाई।

CJI रमना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और सूर्यकांत की पीठ ने मंगलवार को कार्यपालिका द्वारा इस मुद्दे को हल करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर निराशा व्यक्त की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों से वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ‘NCR क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (The 

केंद्र ने अपने जवाब में कहा कि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 21 नवम्बर तक तक स्थिति में सुधार होगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि 21 नवंबर के बाद कठोर उपायों पर बात की जाएगी।

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 21 नवंबर के बाद हवा की स्थिति में सुधार होगा। उन्होंने अदालत से कहा कि ‘क्या हम कठोर उपाय अपनाने से पहले 21 नवंबर तक इंतजार नहीं कर सकते?’

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि टेलीविजन पर बहस सबसे ज्यादा प्रदूषण पैदा कर रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि समाचार चैनल्स की बहस में हर किसी का अपना अजेंडा होता है और वे कुछ भी नहीं समझते हैं।

वायु प्रदूषण को ले कर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 392 पेज का एफिडेविट पेश किया है। इसमें दिए प्रस्ताव में कहा गया है कि दिल्ली के सभी स्कूल बंद रहेंगे और ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति दी जाएगी।

वहीं, केंद्र ने नौकरी-पेशे वालों को घर से काम करने को लेकर कहा कि वो ‘वर्क फ्रॉम होम’ कराने के पक्ष में नहीं है। केंद्र की दलील है कि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के चलते पहले ही काम प्रभावित हुआ है। ऐसे में ‘वर्क फ्रॉम होम’ मुमकीन नहीं है।