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क्या भाजपा की नसीहतों से निखर पाएगा विधायकों का चेहरा ?

क्या भाजपा की नसीहतों  से निखर पाएगा विधायकों का चेहरा ?

अरुण पटेल

   महाकाल की पवित्र नगरी उज्जैन में भाजपा विधायकों के दो दिनी प्रशिक्षण वर्ग में नसीहतों और उपदेशों की घुट्टी पिलाई गई है। उसका मकसद विधायकों के हाव-भाव, कार्यशैली में बदलाव कर समन्वय और समरसता बैठाकर छवि सुधारना है। इस कवायद का आखिर विधायकों पर कितना असर पड़ा उस दृष्टि से देखने वाली बात यही होगी कि उनके आचार, व्यवहार और कार्यशैली में अपेक्षित बदलाव लाने के लिए उपदेश रूपी क्रीम का प्रयोग करने से आखिरकार चेहरे में कितना निखार आएगा? मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार कार्यकर्ता लालटेन की तरह हैं और कई बार लालटेन के कांच पर धूल जम जाती है, जिससे उसका प्रकाश मद्धम पड़ जाता है। कांच साफ करते ही प्रकाश फैलने लगता है। इसी तरह प्रशिक्षण वर्ग में उनकी दृष्टि (विजन) को साफ किया जाता है।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा है कि हमें सामूहिक समन्वय के साथ देश विरोधी ताकतों को परास्त करना है। विधायकों को समरसता का भी पाठ पढ़ाया गया। यदि देखा जाए तो नेतृत्व की अपेक्षाओं के आइने में अब प्रशिक्षण में भाग लेने वालों के सामने कसौटी पर खरे उतरने की चुनौती  होगी।

     भाजपा में प्रशिक्षण वर्गो का होना कोई नई बात नहीं है बल्कि वहां समय-समय पर ऐसा होता रहता है। विधायक प्रशिक्षण वर्ग में समरसता और सामूहिक समन्वय के आधार पर लक्ष्य प्राप्ति का मंत्र विधयकों और प्रदेश पदाधिकारियों को दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने सामूहिक समन्वय की व्याख्या करते हुए कहाकि इसका अर्थ है अपनी सरकार के कामों को समाज तक ले जाएं तथा कार्यकर्ताओं की मेहनत का सम्मान करें। शिवराज ने विधायकों को नसीहत देते हुए कहा कि आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो कार्यकर्ता विधायक बनाने के लिए संघर्ष करता है उसके प्रति स्नेह और सम्मान में किसी प्रकार की कमी ना आए। प्रशिक्षण वर्ग का कुल मिलाकर यही केंद्र बिंदु था और इसका महत्व इसलिए काफी बढ़ जाता है क्योंकि भाजपा में कांग्रेसी संस्कृति में रचे बसे कुछ विधायक और मंत्री भाजपा में आए और वह सब भी इसमें भाग ले रहे हैं। जिनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कांग्रेस से आए विधायक और मंत्री भी शामिल हैं। समन्वय और समरसता की आवश्यकता इनके और मूल भाजपाइयों के बीच बैठाने की है। भले ही भाजपा स्वीकार करे या ना करे पर असली समस्या नवागंतुकों और पुराने खाटी भाजपाइयों के बीच यही है। कुछ सालों में भाजपा में दूसरी पार्टियों और खासकर कांग्रेस से आने वाले नेताओं की आमद काफी है। मध्यप्रदेश में भी सत्ता और संगठन में ऐसे नेताओं की संख्या काफी बढ़ी है। नगरीय निकायों और विधानसभा तथा लोकसभा के भविष्य में होने वाले चुनावों के नजरिए से पार्टी की रीति-नीति के  आधार पर अनुशासित और  प्रतिबद्धता के साथ आगे ले जाने की चिंता नेतृत्व के सामने  है। समरसता और समन्वय की बात इसलिए हो रही है क्योंकि भाजपा के 126 विधायकों में 20 प्रतिशत से अधिक विधायक मूल रूप से भाजपा से जुड़े हुए नहीं हैं इसी प्रकार शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में लगभग 40 प्रतिशत मंत्री भी ऐसे ही हैं।

          प्रशिक्षण वर्ग में विधायकों को नसीहत दी गई है कि अपने निजी सहायकों(पीए) से बचकर रहें क्योंकि चाय से अधिक केतली गर्म हो जाती है इसलिए अपने आसपास वालों से सतर्क रहें। बिचौलियों और दलालों से भी बचें ऐसे लोग अपना आर्थिक उद्देश पूरा  करते रहते हैं।कार्यकर्ताओं से संबंध रखे उनकी बात सुनें तथा उन्हें प्राथमिकता दें। इस बात का भी ध्यान रखें कि क्षेत्र में आपका दफ्तर है वहां आचार-व्यवहार में यदि विनम्रता छोड़ी तो मुश्किल होगी क्योंकि 2018 के विधानसभा  चुनाव में 13 मंत्री  हार गए थे। जहां तक मंत्रियों से मिलने का सवाल है कुछ चेहरों को छोड़ दिया जाए अधिकांश मंत्रियों से मिलना विधायकों के लिए कुछ कम लेकिन कार्यकर्ताओं के लिए और आम जनता के लिए अधिक कठिन होता है। नसीहत का असर यदि मंत्रियों में देखने को मिला तो कुछ बदलाव का एहसास हो सकेगा। यदि इस नसीहत से मंत्रियों ने ही सबक ले लिया तो छवि में कुछ सुधार हो सकता है। उल्लेखनीय है कि यदि जो 13 मंत्री 2018 में चुनाव  हारे थे उनमें से आधे जीत जाते तो ना तो भाजपा की सरकार जाती और ना ही  आंतरिक तौर पर समन्वय और तालमेल के लिए आज पार्टी को मशक्कत करना पड़ रही है वह करना  होती। पार्टी को  आपस में तालमेल बना कर रखना और नए-पुरानों को साधने में ज्यादा मशक्कत करना पड़ रही है। देखने वाली बात यही होगी कि प्रशिक्षण वर्ग से दीक्षित होने के बाद आचार व्यवहार में क्या बदलाव आता है।

            भाजपा में मध्य प्रदेश का  संगठन पूरे देश में आदर्श माना जाता है तथा बीते समय में कई परिवर्तन हुए हैं ।इस बदले हुए परिदृश्य में प्रदेश के संगठन को रोल मॉडल बनाने का संकल्प लिया है और इस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। इस संकल्प की जानकारी 2 दिनी प्रशिक्षण  वर्ग के समापन के अवसर पर  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने दी।  उज्जैन में  पत्रकारों से चर्चा करते हुए शर्मा ने  कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित संगठन है और विधायकों तथा जनप्रतिनिधियों को बताया गया है कि सत्ता में रहते हुए मन में कार्यकर्ता भाव को किस प्रकार बनाए रखा जा सकता है तथा विरोधियों कि झूठ और भ्रम को कैसे नाकाम  किया जा सकता है। प्रश्नों के उत्तर में शर्मा ने कहा कि 15 माह की कमलनाथ सरकार  प्रदेश को बंटाधार युग में ले जा रही थी और यहां की स्थिति वर्ष 2002-03  जैसी होती जा रही थी। भाजपा सरकार द्वारा चालू की गई गरीब कल्याण की  सभी योजनाएं बंद कर दी गई थीं। ऐसी स्थिति में कुछ कांग्रेसी विधायक आगे आए और उन्होंने त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। शर्मा का तर्क था कि इन विधायकों ने जो कुछ किया वह प्रदेश को बचाने के लिए किया ।

           ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सभी मंत्रियों को सलाह दी कि उन्हें सप्ताह या महीने में 4 घंटे का समय कार्यकर्ताओं के लिए सुनिश्चित करना चाहिए और आपको यह सोचना होगा कि कार्यकर्ताओं ने ही आपको इस मुकाम तक पहुंचाया है। बात तो कार्यकर्ताओं के मन की है लेकिन महीने में 4 घंटे का समय ना रखने के बराबर ही होगा। यदि कार्यकर्ताओं के मन की पीड़ा सुनना है और समझना है तो सप्ताह में कम से एक दिन इतना समय रखने पर ही कोई सार्थक नतीजे सामने आ सकते हैं और कार्यकर्ताओं कि नाराजगी भी एक बड़ी सीमा तक दूर हो सकती है। सिंधिया ने ऐसे आयोजन 6 माह में एक बार रखने का सुझाव दिया। 

      प्रशिक्षण वर्ग के समापन सत्र में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विधायको को हिदायत दी कि वे सोशल मीडिया के सहारे  विरोधियों पर जमकर प्रहार करें  तथा सदन में ज्यादा से ज्यादा समय दें। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की जरूरत इसलिए है क्योंकि आजकल युवा वोटर्स  सबसे ज्यादा इसी से जुड़े हुए हैं। सदन में विधायकों की भूमिका और सोशल मीडिया का उपयोग विषय पर तोमर ने कहा कि विधायकों को सदन के अंदर और बाहर पार्टी का पक्ष पूरी प्रमुखता और मजबूती के साथ रखना होगा।  तोमर ने कहा कि विपक्षी दल या विरोधियों द्वारा अफवाह फैलाई जाए या भ्रामक बातों का प्रचार किया जाए तो विधायक हमेशा  इतनी तैयारी रखें कि उसका माकूल जवाब दे सकें। ऐसा करके ही इस प्रकार के हथकंडों से निपटा जा सकता है। 

     भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री  शिवप्रकाश ने मिशन 2023  और उसके बाद  मिशन 2024 की सफलता का मंत्र विधायक और प्रदेश पदाधिकारियों को दिया । उनका कहना था कि संगठन में कार्यकर्ता ही सबसे महत्वपूर्ण होता है ,उसके बल पर ही पहले प्रदेश में  और फिर बाद में देश में भाजपा की सरकार बनेगी  इसलिए उन्हें कभी भी नजरअंदाज ना किया जाए।  पार्टी की रीति नीति के हिसाब से आगे बढऩे  के टिप्स देते   हुए  उन्होंने सलाह दी कि वे भाजपा और संघ से इतर  संघ के अनुषांगिक संगठनों जो संघ की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने के लिए  सक्रिय हैं से भाजपा विधायक व मोर्चा संगठन पदाधिकारियों को  समन्वय रखना चाहिए।