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धान खरीदी केंद्र और साप्ताहिक बाजार में कोरोना से बचाव के नियम तार-तार

धान खरीदी केंद्र और साप्ताहिक बाजार में कोरोना से बचाव के नियम तार-तार

राजकुमार मल, भाटापारा। साप्ताहिक हाट बाजार और समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी करने वाली उपार्जन केंद्रों की स्थिति भी संक्रमण को निमंत्रण दे रही है। नियमों की अवहेलना में अब ग्रामीण क्षेत्र, शहर से आगे निकलते नजर आते हैं क्योंकि मेला,मड़ई और धार्मिक आयोजन पर अब तक रोक नहीं लग सकी है।

कोरोना और ओमीक्रॉन

पहुंच चुके ख़तरे के बीच तमाम पाबंदियां प्रभावी हो गईं हैं। इसी के साथ ऐसी सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है जिनसे भीड़ बढ़ती हो, लेकिन शहरी के अलावा ग्रामीण क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा अब तक जरूरी नियम के बंधन से दूर है। इसमें साप्ताहिक हाट बाजार का नाम सबसे आगे चल रहा है क्योंकि यहां हर कदम पर गाइडलाइन की अवहेलना नजर आ रही है। ना मास्क और ना सोशल डिस्टेंस। ऐसे में सैनिटाइजर जैसे शब्द का उपयोग, ना ही करें तो ही सही होगा।

मावली बाजार आज

ग्रामीण क्षेत्रों में सिंगारपुर का मावली बाजार, शहर में भी जाना जाता है क्योंकि इसके लिए आपूर्ति भाटापारा से ही होती है। प्रति गुरुवार को लगने वाला यह साप्ताहिक बाजार, कम से कम 10 गांव की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि भीड़ कितनी रहती होगी। संक्रमण के खतरे के बाद सुरक्षा इंतजाम को लेकर पंचायत ने कौन से कदम उठाए हैं। इसकी सूचना बुधवार की शाम तक नहीं थी।

और भी हैं कई बाजार

करही बाजार, कड़ार, तरेंगा, दतरेंगी, निपनिया, रोहरा, खोखली, सिद्ध बाबा, टेहका, सेमरिया समेत सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में भीड़ जुट रही है लेकिन पंचायतों ने इस पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। स्थानीय प्रशासन की भूमिका शहर तक ही सीमित नजर आती है।

बेफिक्र हैं उपार्जन केंद्र

समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जा रही है। हर दिन टोकन कटवाने और कृषि उपज बेचने पहुंच रहे किसानों की भीड़ से संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन ना उपार्जन केंद्र प्रभारी ध्यान दे रहें हैं, ना जिला सहकारी बैंक। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच भी खानापूर्ति तक रह गई नजर आती है। इसलिए गाइडलाइन से दूर, अपनी मनमानी की लाइन खींची जा चुकी है।