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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - सियासत नहीं संवेदनशीलता चाहिए

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - सियासत नहीं संवेदनशीलता चाहिए

-सुभाष मिश्र

छत्तीसगढ़ का जशपुर चर्चा में है। यहां के राजपरिवार के सदस्य भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप सिंह जूदेव के बेटे व पूर्व विधायक युद्धवीर सिंह का असामयिक निधन हो गया। भाजपा के नेतागण लगातार वहां अपना दुख जताने जा रहे हैं, उसी समय जशपुर के दिव्यांग प्रशिक्षण केंद्र में वहीं के केयर टेकर और चौकीदार द्वारा मूक बधिर बालिकाओं के साथ दुव्र्यवहार, छेड़छाड़ व एक बच्ची के साथ बलात्कार की घटना सामने आई। इस घटना के बाद से छत्तीसगढ़ की सियासत गरमाई हुई है। भाजपा-कांग्रेस कानून व्यवस्था और महिलाओं, बच्चियों और खासकर के दिव्यांगों के साथ होने वाली घटना को लेकर आमने-सामने है। इस पूरे मामले में सियासत की बजाय एक संवेदनशीलता चाहिए, जो समूचे समाज और तंत्र से नदारद है। जब भी इस तरह की कोई घटना होती है तो लोग उसके मूल में जाने की बजाए एक-दूसरे पर दोषारोपण करते नजर आते हैं। जिस अधीक्षक को दिव्यांगों की साईन लैंग्वेज नहीं आती थी उसकी पदस्थापना वहां कैसे हुई। जो रखवाले वहां तैनात किये गये थे उनके चाल-चलन की जानकारी क्यों नहीं ली गई। नेशनल क्राईम ब्रांच के अनुसार पूरे देश में वर्ष 2020 में 28046 महिलाओं के साथ रेप की घटना हुई। वहीं छत्तीसगढ़ में 1202 रेप की घटनाएं हुई। छेड़छाड और बलात्कार की अधिकांश घटनाओं में अधिकतर नजदीकी लोग शमिल होते हैं, यह तथ्य कई रिपोर्ट के जरिए भी सामने आ चुका है।

छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती आदिवासी आबादी बाहुल्य जिले जशपुर में खनिज न्यास मद से राजीव गांधी शिक्षा मिशन द्वारा संचालित दिव्यांग केंद्र में घटी घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। सरकार ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए जशपुर के कलेक्टर महादेव कावरे को हटा दिया। इसके पहले केंद्र के अधीक्षक को भी निलंबित किया जा चुका है। नशे में धुत होकर दिव्यांग बच्चियों से छेड़छाड़ और रेप करने वाले दिव्यांग केंद्र के चौकीदार और केयर टेकर के विरुद्ध पुलिस कार्यवाही करते हुए उन्हें जेल भेजा जा चुका है।

दरअसल जब भी हमारे देश के किसी भी कोने में इस तरह की घटना होती है तो राजनीतिक पार्टियां आपस में हाय तौबा मचाती है। सरकार की ओर से भी कड़े कदम उठाने की बात होती है। दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद कानून में बहुत सारी तब्दीलियां हुई, किन्तु यह सिलसिला नहीं रूका। उसके बाद हैदराबाद में एक वेटनरी डाक्टर, उसके बाद हाथरस में एक दलित लड़की और फिर लड़कियों के लिए सबसे सुरक्षित समझी जाने वाली मुंबई में एक लड़की के साथ गैंगरेप की घटना हुई। तमाम कानूनी प्रावधान व पुलिस के एनकाउंटर के बाद भी छोटी-छोटी लड़कियों, महिलाओं और दिव्यांग बच्चियों के साथ होने वाली ऐसी सारी घटना समाज की मानसिकता और स्त्री के प्रति उसकी सोच को बताती है। बहुत सारे लोग अभी भी औरत को एक उपभोग की वस्तु और हर तरह के जुर्म सहकर चुपचाप रहने वाली मानकर उसके साथ किसी भी तरह का बर्ताव करते हैं।

छत्तीसगढ़ के जशपुर में स्थित एक दिव्यांग केंद्र में 22 सितंबर की रात एक मूक-बधिर नाबालिग से दुष्कर्म की घटना हुई थी। घटना के बाद वहां पहुंचे शिक्षकों द्वारा बनाए गए इस वीडियो में बच्चियों से साइन लैंग्वेज (मूक बधिरों की भाषा) में सवाल-जवाब करते हुए देखा गया, जिसमें जिस शिक्षक को हॉस्टल का सुपरिटेंडेट बनाया गया है उसे साइन लैंग्वेज ही नहीं आती थी। जशपुर स्थित समर्थ दिव्यांग केंद्र में नशे में धुत केयर टेकर और चौकीदार ने बच्चों से मारपीट और अश्लील हरकतें की। उनके कपड़े फाड़ दिए। बच्चे जान बचाने के लिए नग्न हालत में कैंपस में भागते रहे। चौकीदार ने 15 साल की एक बच्ची से दुष्कर्म किया, जबकि 5 बच्चियां यौन उत्पीडऩ की शिकार हुई। हॉस्टल अधीक्षक संजय राम के पास इस केंद्र के अलावा दो और स्कूलों का भी प्रभार है। संजय राम के अनुसार उन्होंने विभागीय अधिकारियों से पिछले दो साल में छह बार साइन लैंग्वेज न जानने के चलते हास्टल में न रह पाने और अतिरिक्त प्रभार होने की बात लिखित रूप में बताई थी। हॉस्टल में 22 बच्चे और 12 बच्चियां रहती हैं। इनमें से कोई भी बोल और सुन नहीं सकता है। अधीक्षक संजय राम को निलंबित कर दिया और राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला समन्वयक विनोद पैंकरा को शोकाज नोटिस जारी किया गया है। इस दौरान हॉस्टल की स्वीपर कुमार बाई बीच-बचाव करने आई तो आरोपियों ने उसे बाथरूम में बंद करदिया। वह किसी तरह से बाहर निकली और फोन कर हॉस्टल अधीक्षक को सूचना दी।

इस घटना के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में बयानबाजियों का दौर शुरू होकर यहां की सियासत भी गरमाने लगा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों एक-दूसरे पर घटना के लिए आक्षेप लगा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जशपुर की घटना शर्मनाक है। इस राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं है। स्कूल में पढऩे वाली बच्चियों को ऐसा सामना करना पड़ रहा है, ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़ में न तंत्र काम कर रहा है, न प्रशासन काम कर रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि बोलने और सुनने में असमर्थ दिव्यांग बच्चों के साथ हृदय विदारक विभत्स घटना घटी, इस अमानवीय घटना की न्यायिक जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने भी जशपुर की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भाजपा के 15 साल के कार्यकाल में ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को पुरस्तृत किया जाता था। छत्तीसगढ़ के मुख्यमत्री भूपेश बघेल ने मूक-बधिर बच्चियों के साथ दुष्कर्म मामले पर जशपुर कलेक्टर का ट्रांसफर कर दिया है। कांग्रेस से जुड़े लोग भाजपा के 15 साल की घटनाओं की याद दिलाते हुए कांकेर और दल्लीराजहरा, आमाडोला की याद दिला रहे हैं। कांग्रेस के ही एक मंत्री ने पूर्व में एक कम उम्र की लड़की के साथ बलरामपुर में हुई घटना के संबंध में गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी की थी। तमाम कानूनी प्रावधान, महिलाओं और दिव्यांगों के साथ होने वाली छेड़छाड़, बलात्कार या अभद्रता की घटनाएं तब तक नहीं रूक सकती जब तक समाज की मानसिकता में बदलाव नहीं आता। यह सारा मामला हमारी सोच और नजरिए परनिर्भर करता है।

प्रसंगवश रंजना जायसवाल की कविता
बच्ची की फरियाद
मुझे इतनी जोर से प्यार मत करो अंकल
देखो तो, मेरे होंठो से निकल आया है खून
मेरे पाप धीरे से चूमते हैं सिर्फ माथा।
मुझे मत मारो अंकल, दुखता है।
मैं आपकी बेटी से भी छोटी हूँ
क्या उसे भी मारते हैं इसी तरह
मेरे कपड़े मत उतारो अंकल,
अभी नवरात्रि में
मुझे लाल चूनर ओढ़ाकर पूजा था न तुमने।
तुम्हें क्या चाहिए अंकल, ले लो मेरे चेन,
घड़ी, टॉप्स, पायल और चाहिए तो ला दूँगी
अपनी गुल्लक, जिमसें ढेर सारे रुपए हैं
बचाया था अपनी गुडिय़ा की शादी के लिए
सब दे दूँगी तुम्हें
अंकल-अंकल ये सब मत करो
माँ कहती है-ये बुरा काम होता है
भगवान जी तुम्हें पाप दे देंगे
छोड़ो मुझे, वरना भगवान जी को बुलाऊँगी
टीचर कहती है-भगवान बच्चों की बात सुनते हैं।
अब बच्ची लगातार चीख रही थी
पर भगवान तो क्या,
वहाँ कोई इन्सान भी न था।