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विधानसभा ब्रेकिंग : मंत्री सिंहदेव ने सदन और पद की गरिमा से खिलवाड़ किया : विपक्ष..विधायक बृहस्पति सिंह सदन में मौजूद..बीजेपी की जेपीसी की मांग यथावत..कई आदिवासी विधायक बृहस्पति के साथ..

विधानसभा ब्रेकिंग : मंत्री सिंहदेव ने सदन और पद की गरिमा से खिलवाड़ किया : विपक्ष..विधायक बृहस्पति सिंह सदन में मौजूद..बीजेपी की जेपीसी की मांग यथावत..कई आदिवासी विधायक बृहस्पति के साथ..

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन आज सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने कार्यवाई शुरू की। 

उन्होंने कहा कि कल विपक्ष ने विधायक अपमान वाले मुद्दे पर चर्चा कराने तथा जेपीसी गठन करने की मांग की थी, इस पर कोई फैसला हो इसके पहले प्रश्नकाल चलने देना चाहिए। इस पर भाजपा के विपक्षी विधायकों ने हंगामा खड़ा कर दिया उन्होंने अपनी कल की मांग जेपीसी गठन की मांग पर जोर दिया। विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मामला गंभीर हो गया है और सरकार को इस मामले की जांच करानी चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी के विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जेपीसी गठित करके जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्री सिंहदेव ने सदन की मंत्री पद की गरिमा का उल्लंघन किया है, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिये। इसके बाद भाजपा विधायकों ने हंगामा खड़ा कर दिया। 

जोगी कांग्रेस के विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि सरकार, जो पीड़ित विधायक है, उन्हें सदन में आने से रोक रही है, इस पर विधानसभा अध्यक्ष को चाहिए कि उन्हें सदन में बुलाया जाए। इसके बाद विधायक बृहस्पति सिंह सदन में आए हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ नही कहा। फिलहाल सदन में गतिरोध कायम है। प्रश्नकाल शुरू नहीं हो सका है जबकि सदन की कार्यवाही एक बार 5 मिनट के लिए स्थगित की गई। समाचार लिखे जाने तक विवाद बना हुआ है गतिरोध कायम है और सरकार और विपक्ष के बीच मुद्दे को लेकर खींचातानी जारी है। 

दूसरी ओर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी आज पूरे मामले को शांत करते और समझाते हुए दिखे। उन्होंने मुस्कुराते हुए भाजपा के सभी विधायकों की ओर देखकर हाथ जोड़ते रहे। उनका मतलब था कि अब बहुत हो गया। प्रश्काल और सदन चलने दिया जाय। पूरी कार्यवाही के दौरान सदन में मंत्री टीएस सिंह देव की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। 

दूसरी ओर राजनीतिक प्रेक्षकों का अनुमान है कि इस विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। माना जा रहा है कि विधायक बृहस्पति सिंह के पक्ष में 50 से ज्यादा आदिवासी विधायक खड़े हैं। उनका समर्थन कर रहे हैं। कल भी कारण बताओ नोटिस जारी होने पर कई आदिवासी विधायकों ने इसका विरोध किया था। इस मुद्दे के उठने के बाद अब मामला आदिवासी बनाम सिंहदेव हो गया है। 

संदेश यह भी जा रहा है कि सिंहदेव इस मामले में अलग-थलग पड़ गए हैं। उनके साथ कोई विधायक खड़ा नहीं है और आदिवासी विधायक भी उनके खिलाफ है। वैसे सरकार और पार्टी से इतर, आम जनता की सहानुभूति सिंहदेव के साथ है। जनता का मानना है कि सिंहदेव के साथ अन्याय और राजनीति हो रही है।