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कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः जगन्नाथ बाहर निकलेंगे

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः जगन्नाथ बाहर निकलेंगे


मोल नहीं कर पाये हम जीवन का

कहाँ खो गयी न्याय की तुला!

जड़ें खोदते रहे लुटेरे

जिनमें बसते हैं जगन्नाथ

सबकी छाया बन कर


उजड़े वन, बौने पर्वत, सूखी नदियाँ

बीत गयी हैं कितनी सदियाँ

करते रहे लुटेरों का जय घोष

नहीं पाये बचा पाये हम

नारायण का समृद्ध लोक

VVS Laxman on Twitter: "May Lord Jagannath bestow peace ...


जनता जनार्दन होने का

पाला हमने अभिमान

हम पाल नहीं पाये जीवन को

जगन्नाथ का घर सँवार कर


दरिद्रता चुन ली हम ने

हम ही नारायण दरिद्र

इस लोकतंत्र के


जगन्नाथ बाहर निकलेंगे

कैसे जायेंगे हम उन के पास

छिपा कर अपना-अपना मुँह

कैसे खीचेंगे उनका रथ?