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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोरोना का बढ़ता प्रकोप

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोरोना का बढ़ता प्रकोप

- सुभाष मिश्र
पिछले एक हफ्ते के भीतर छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमितों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। हालांकि, ज्यादातर संक्रमित गंभीर रूप से पीडि़त नहीं हैं। लगभग 90 फीसदी से ज्यादा लोग घर में ही आइसोलेट होकर अपना इलाज कर रहे हैं। पिछली बार की तरह ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की जरूरत अब तक नहीं पड़ी है लेकिन जिस तादाद में रोज मरीज सामने आ रहे हैं वो सचेत करने वाला है। छत्तीसगढ़ में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन नए वैरिएंट की जांच करने के लिए लैब नहीं है। इसको लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री कई बार केन्द्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं लेकिन लैब की सुविधा अब तक नहीं मिल पाई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि टेस्ट रिपोर्ट में आने में देरी कहीं भारी न पड़ जाए।  

कोरोना के खिलाफ जारी जंग में एक और मील का पत्थर वैक्सीन की तीसरी यानी बूस्टर डोज के रुप में लोगों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए लगना शुरू हो गई है। इसे कोरोना वैक्सीन का बूस्टर डोज या प्रिकॉशन डोज कहा जा रहा है। भारत में बूस्टर डोज की शुरुआत 10 जनवरी 2022 से हो गई। पहले और दूसरे डोज की तरह इस बार कोविन ऐप पर नए रजिस्ट्रेशन नहीं करना होगा। जिन वरिष्ठ नागरिकों को बूस्टर डोज लगवाना है, वो सीधे टीकाकरण केंद्र पर जाकर ऐसा कर सकते हैं। उन्हें किसी तरह का हेल्थ सर्टिफिकेट भी नहीं दिखाना होगा।  करीब 1 करोड़ से अधिक हेल्थ व फ्रंटलाइन वर्कर्स तथा 60+ नागरिकों को उनकी प्रिकाशन डोज हेतु रिमाइंडर एसएमएस भेजे गए हैं।  

बूस्टर डोज के लिए टीकाकरण प्रक्रिया 8 जनवरी से शुरू हो चुकी थी। ऑनसाइट अपॉइंटमेंट के साथ टीकाकरण 10 जनवरी से शुरू हुआ। 60 साल और उससे अधिक आयु के नागरिकों को बूस्टर डोज के लिए डॉक्टर से सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है। बूस्टर डोज के अंतर्गत जिन लोगों को पहले कोवैक्सिन लगी है, उन्हें कोवैक्सिन लगाई जाएगी जिन्हें कोविशील्ड की दो खुराक मिली है, उन्हें कोविशील्ड ही लगाई जाएगी।

इस तीसरे चरण में 1.05 करोड़ स्वास्थ्य सेवा और 1.9 करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स के साथ ही 60 से अधिक आयु वर्ग के 2.75 करोड़ लोगों को टीके लगेंगे। रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट आप ऑनलाइन या फिर वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर ले सकते हैं। यह डोज सिर्फ ऐसे लोगों को लगाई जाएगी जो या तो फ्रंटलाइन वर्कर हैं या फिर हेल्थ वर्कर है या फिर सीनियर सिटीजन है। सिर्फ ऐसे ही लोगों को सबसे पहले कोरोना से बचाव के लिए बूस्टर डोज की शुरुआत की गई है।  

छत्तीसगढ़ में कोरोना के मामले बढऩे लगे हैं, ऐसे में अब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर एक मांग की है। फिलहाल छत्तीसगढ़ में सैंपलों की जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा नहीं है, जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच के लिए अभी रिपोर्ट को उड़ीसा भेजा जाता है। उन्होंने जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा प्रदेश में उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ से सैंपल भुवनेश्वर (उड़ीसा) भेजकर रिपोर्ट मंगानी पड़ती है जिसमें काफी समय बाधित होता है। जांच की गति धीमी होने के कारण हमें यह भी पता नहीं चल पा रहा है कि हमारे क्षेत्र में फैलने वाला कोरोना वैरिएंट ओमिक्रोन, डेल्टा अथवा अन्य कोई दूसरा है, जिसके कारण इसके रोकथाम, जांच या ईलाज इत्यादि के महत्वपूर्ण निर्णय लेने एवं रणनीतिक तैयारी करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण बेकाबू हो चुका है। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने गाइडलाइन जारी कर दी है। अब मंत्रालय और सभी राज्य सरकार के कार्यालयों में एक तिहाई कर्मचारी की उपस्थिति ही रहेगी। कर्मचारियों की ड्यूटी रोस्टर बनाकर लगाई जाएगी। गाइडलाइन के मुताबिक तृतीय और चतुर्थ क्षेणी कर्मचारियों की उपस्थिति एक तिहाई रहेगी साथ ही अनुविभाग और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति शत-प्रतिशत रहेगी।

वहीं सरकार ने बढ़ते कोराना संक्रमण को देखते हुए कर्मचारियों की उपस्थिति एक तिहाई करने के साथ ही मंत्रालय महानदी और इंद्रावती भवन में बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है। गाइडलाइन का पालन आज यानि मंगलवार से लागू होगा। आदेश के अनुसार मंत्रालय और सभी कार्यालयों में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के एक तिहाई कर्मचारियों को प्रतिदिन बुलाया जाएगा। इसके लिए विभागों को रोस्टर बनाते हुए ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

कोरोना की पहली लहर आने के समय जनवरी महीने तक देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे थे। नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर लोग आवाज़ उठा रहे थे। लॉकडाउन और कोरोना वायरस की वजह से इन प्रदर्शनों पर एक तरह से विराम लग गया।

लॉकडाउन की वजह से इस बात की संभावना भी नहीं रही कि कोई राजनीतिक दल धरना या प्रदर्शन करे। कोई रैली भी नहीं कर सकता है। कोरोना वायरस को लेकर देश में अजब हाल था, सब को पता था कि कोरोना की दूसरी लहर कितनी प्रभावी है लेकिन फिर भी राज्य और केंद्र स्तर पर इसको लेकर ना केवल तालमेल खऱाब रहा, बल्कि इस युद्ध में सभी अलग-अलग लड़ते दिखे, ना कि एकजुट होकर। इसका एक बड़ा कारण है और वो यह कि कोई भी दल ऐसा फैसला नहीं लेना चाहता था जो जनता को नापसंद हो। यानि कड़े फैसले लेने में सबको हिचकिचाहट हो रही थी। 2020 याद कीजिए, प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन लगाने का कड़ा फैसला लिया था। सभी विपक्षी दलों ने इसका स्वागत किया था। सभी का मानना था कि लॉकडाउन ज़रूरी है।   

छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 2502 नए केस मिले हैं। रायपुर में सबसे ज्यादा 830 संक्रमित मिले हैं। वहीं कोरोना से प्रदेश में दो लोगों की मौत हो गई है। वहीं रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, दुर्ग, जांजगीर-चांपा जिले में नाइट कर्फ्यू लागू है, बावजूद संक्रमण कम नहीं हुआ है। वहीं रविवार को प्रदेश में 31 हजार 17 टेस्टिंग किए गए। शनिवार को 46 हजार 495 सैंपलों की जांच की गई थी, जिसमें 3455 मरीज मिले थे। प्रदेश में पॉजिटिविटी दर 7.43 से बढ़कर 8.05 प्रतिशत हो गई है। रविवार को हॉस्पिटल से 22 लोग डिस्चार्ज हुए तो वहीं 80 लोगों ने होम आइसोलेशन पूरा किया है।

भारत तीसरी लहर में अस्पताल में भर्ती होने की दर 5-10 प्रतिशत रहा है। 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य पुरानी बीमारियों जैसी सह-रुग्णताएं हैं, उनके पास अपने डॉक्टर की सलाह पर एहतियाती खुराक प्राप्त करने का विकल्प है। हालांकि, बूस्टर शॉट्स के लिए पात्र लोगों को कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक प्राप्त करने के 9 महीने बाद ही उन्हें मिलेगा।

अब तक महाराष्ट्र में 36,265 मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 15,421 मामले, फिर दिल्ली में 15,097 मामले, तमिलनाडु में 6,983 मामले और कर्नाटक में 5,031 मामले सामने आये हैं। साथ ही छत्तीसगढ़ में भी 2400 व्यक्ति कोरोना से संक्रमित पाए गए है जिससे इसका पाजिटिविटी रेट 4.91 प्रतिशत पहुंच गया है। पिछले 24 घंटों में देश में 302 लोगों की मौत हुई है, जिससे मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 4,83,178 हो गई है. इसके बाद पश्चिम बंगाल में 19 दैनिक मौतें हुईं है। वहीं भारत का रिकवरी रेट अभी 97.57 प्रतिशत पर है।

कोरोना के इस नए संस्करण पर डब्ल्यूएचओ ने भी अपनी प्रतिक्रिया जताई है, इसकी कोविड-19 तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव का कहना था कि इसकी बहुत कम संभावना है कि ओमीक्रॉन इस महामारी का अंतिम चरण होगा।