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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत का परचम

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत का परचम

-सुभाष मिश्र

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत का परचम लगातार फहरता जा रहा है। मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में 2004 में भाजपा ने कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी का लाभ लेकर अपनी जो सत्ता काबिज की थी, वह 15 साल तक रही, किंतु 2018 के चुनाव में एक बार फिर पूरे देश में भाजपा की सुनामी के बावजूद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 90 में से 67 सीटों पर विजयी रही। भाजपा को 15 सीटों पर सिमटना पड़ा। इसके बाद हुए 3 उपचुनावों में भी कांग्रेस का परचम लहराया। अब कांग्रेस की विधानसभा में 70 सीटें हैं। छत्तीसगढ़ की 15 नगरीय निकायों में हुए उपचुनाव में जिस तरह से कांग्रेस की जीत दर्ज हुई है, उसे भूपेश बघेल की सरकार के कामकाज और नेतृत्व की जीत के रुप में देखा जा रहा है। भूपेश बघेल ने पिछले तीन साल के अपने कार्यकाल में जिस तरह से गांव, गरीब और किसान के हक में फैसले लिए हैं, वह क्रांतिकारी है। छत्तीसगढ़ की नगर पंचायतों खास करके बस्तर क्षेत्र की अर्धनगरीय संस्थाओं में कांग्रेस की जीत के बहुत मायने हैं। भाजपा के घर्मातंरण और आदिवासी उपेक्षा के लगातार आरोपो के बीच कांग्रेस की इस जीत के अलग मायने हैं। कांग्रेस को सत्ता में काबिज रखने में प्रदेश के आदिवासी इलाके की अग्रणी भूमिका रही है । बस्तर संभाग में कांग्रेस सुकमा जिले के कोंटा, बीजापुर के भोपालपटनम ओर, भैरमगढ़ में कांग्रेस का कब्जा हो गया है। नरहरपुर, प्रेमनगर और मारो में भी कांग्रेस ने अपनी जीत दर्ज की है।

सामान्यत: उपचुनाव में सत्ता पक्ष की जीत होती है। जिस पार्टी के पास सत्ता, संसाधन है वोटरों को ये लगता है कि जो भी काम कराना है, वह वही सरकार करेगी, जो सत्ता पर काबिज है, तो लोग सामान्यत: उसके प्रतिनिधी को चुनते हैं। नगर पंचायत, नगर पालिका में वार्ड के मतदाताओं की संख्या सीमित होती है। अधिकांश लोग एक-दूसरे को पहचानते हैं। ऐसे में उस नेता के जीतने की संभावना अधिक होती है जिसका जातीय वोट बैंक तगड़ा होता है। बहुत बार सरकार के कामकाज से नाराज लोग उपचुनाव में मौजूदा सत्ता के खिलाफ वोट देकर भी अपना आक्रोश दर्ज करते हैं, किन्तु छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार के पिछले तीन सालों में ऐसा कुछ नहीं हुआ। यही वजह है की उनका जीत का परचम लगातार फहरता रहा है।

जमीनी नेता भूपेश बघेल का प्रभामंडल दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। आज छत्तीसगढ़ के सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के आम लोगो की जुबान पर है। लोगों का ये भी कहना है कि इन चुनावों में जब प्रचार किया जा रहा था तो एक तरफ़ जहाँ कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के चेहरे को केंद्र में रखकर प्रचार किया था, तो वहीँ दूसरी तरफ़ भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को सामने रखकर प्रचार किया था। सभी नगरीय निकायों में भाजपा ने अपने प्रत्याशियों के साथ प्रधानमंत्री की तस्वीर भी बैनर-पोस्टरों पर लगाई थी और अब चुनाव के नतीजे आने के बाद तस्वीरें साफ़ हो चुकी है कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जादू बरकऱार है। सूबे के ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें जहाँ नगर पंचायतों के चुनाव हुए वहां तो कांग्रेस ने भाजपा का सूपड़ा ही साफ़ कर दिया। इस जीत का पूरा श्रेय पार्टी के कार्यकर्ता भूपेश बघेल की चुनावी रणनीति और उनके द्वारा लगातार लोकहित में चलाई जा रही नरवा,गरवा,घुरवा और बाड़ी जैसी महत्वकांक्षी योजनाओं को दे रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य आधुनिकता और परंपराओं के बीच संतुलन बनाकर कृषि अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना है। इस योजना का शुभारंभ जल संरक्षण, पशुधन संरक्षण और विकास, घरेलू कचरे के माध्यम से जैविक खाद का उपयोग और स्वयं की खपत के लिए बैकयार्ड में फलों और सब्जियों की खेती और अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिए किया गया है।

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार 17 दिसंबर को 3 साल पूरे किये। इस तीन साल के कार्यकाल में भूपेश बघेल की सरकार ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। इस बीच सरकार ने 11 लाख किसानों का 9 हजार करोड़ रुपए ऋण माफ किया है, साथ किसानों से 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदा। बस्तर में सरकार ने लोहंडीगुड़ा में आदिवासियों की जमीन वापसी का ऐतिहासिक फैसला लिया।भाजपा शासनकाल में चिटफंड कंपनियों के जाल में फंसे ग्रामीणो की सुनवाई तेज हुई और चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई ।अब तक पुलिस ने 12 कंपनियों पर शिकंजा कसा है। पुलिस ने इन कंपनियों से करोड़ों की संपत्ति जब्त की। सरकार चिटफंड कंपनियों के निवेशकों को उनका पैसा दिलवा रही है। राजनांदगांव में 16 हजार 796 निवेशकों को 7 करोड़ 32 लाख रुपये वापस किये गए थे। अकेले राजनांदगांव जिले में अब तक 9 करोड़ 78 लाख रुपये की राशि निवेशकों को वापस लौटाई जा चुकी है।

ऐसे बहुत सारे मुद्दों के चलते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है और इसी लोकप्रियता ने कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में फिर से स्थापित किया है। भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद तीन सालों की सबसे बड़ी सफलता तो यही है कि यहाँ की जनता अब अपने अधिकारों, अवसरों और वास्तविक तरक्की को स्वयं महसूस कर रही है, मुख्यमंत्री कुछ सार्थक बदलाव करने में सफ़ल हुए हैं। आज विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल की चर्चा पूरे देश और दुनिया में है। तीन वर्षों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में गरीबों तथा कमजोर तबकों के लिए ऐसे प्रयास किए गये हैं, जिनके बारे में पहले कभी सोचा नहीं गया था।

भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस की इस सरकार ने ऐसी योजनाएं बनाई, जो वास्तव में आदिवासी अंचल हो या मैदानी क्षेत्र सभी का भला कर सके। लोहंडीगुड़ा में जमीन वापसी के साथ आदिवासियों और किसानों के लिए न्याय का आगाज हुआ। निरस्त वन अधिकार दावों की समीक्षा से हजारों निरस्त व्यक्तिगत दावों को वापस प्रक्रिया में लाया गया। अब तक 22 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि आदिवासी तथा परंपरागत निवासियों को दी जा चुकी है, जो 5 लाख से अधिक परिवारों के लिए आजीविका का जरिया बन गई है। छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 2500 से बढ़ाकर 4000 रूपए प्रतिमानक बोरा करना शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजनाÓ लागू करने से वन आश्रित परिवारों की जिंदगी में नई रोशनी आई है। तीन साल पहले सिर्फ 7 वनोपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही थी, लेकिन अब 52 वनोपजों को समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की। इतना ही नहीं 17 लघु वनोपजों के लिए संग्रहण पारिश्रमिक दर अथवा समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोतरी भी की गई है। इस तरह लघु वनोपजों के समर्थन मूल्य पर खरीदी करने, प्रसंस्करण करने, इनमें महिला स्व-सहायता समूहों को जोडऩे और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण में बड़ी भूमिका निभाने के लिए छत्तीसगढ़ को भारत सरकार ने 25 पुरस्कार प्रदान किए है। शायद इन्ही कार्यों का ये परिणाम है कि अब बस्तर में कांग्रेस को इस नगरीय निकाय चुनाव में क्लीन स्वीप मिली है।

शहरी क्षेत्रों की बात हम करें तो स्वच्छता के लिए भी तीन साल में छत्तीसगढ़ को लगातार तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। इस बार छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक 67 नगरीय निकायों को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिला है और एक बार फिर छत्तीसगढ़ को देश के सबसे स्वच्छ राज्य के रूप में मान्यता मिली है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं कि किसान मेरी जान है, मेरे प्राण है और किसानी मेरी धड़कन है। जिस दिन मैं किसानी नहीं करूँगा या किसानी की बेहतरी के लिए नहीं सोचूंगा, समझ लीजिए कि उसी क्षण वह व्यक्ति नहीं रहूंगा, जिसको आप लोग प्यार करते हैं। मैंने बचपन से जवान होते तक खेतों में काम किया है, इसलिए मुझे खेती-किसानी की पूरी जानकारी है। हर फसल किसान के लिए एक सीढ़ी होती है। इनपुट कास्ट कम होना और आउटपुट का दाम अच्छा मिलना ही खेती को लाभदायक बना सकता है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार किसानों के साथ खड़ी रहती दिखाई देती है। इस साल 105 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदी का अनुमान है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्र सरकार से लगातार धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति की मांग भी कर रहे है और यदि यह अनुमति मिल गई तो समझिए कि फिर प्रदेश को किसी के सामने हाथ भी नहीं फैलाना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ में एक ऐसी अर्थव्यवस्था बन जायेगी जिससे किसान को अपनी उपज का मनचाहा दाम मिलेगा।
छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल में सबसे बड़ी बात है, एक दूसरे का साथ, चाहे वह योजनाओं के रूप में हो या परस्पर सहयोग के रूप में उदाहरण के लिए जब ये सरकार गांव की बात करती हैं तो किसी एक विभाग या एक योजना की बात नहीं करती। नरवा, गरुवा, घुरुवा, बारी, गोधन न्याय योजना से शुरूआत करते हुए मल्टीयूटीलिटी सेंटर, रूरल इंडस्ट्रियल पार्क और फूडपार्क तक पहुंच जाते है। इन सबका संबंध गांवों और जंगलों के संसाधनों से है। इनका संबंध खेती से भी, वनोपज से भी, परंपरागत कौशल और प्रसंस्करण की नई विधाओं से भी है। कमजोर तबकों को सशक्त करने की बात महात्मा गांधी, नेहरू, शास्त्री, डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल, इंदिरा जी, राजीव जी जैसे हमारे सभी महान नेता कहते थे। शायद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसका मर्म पकड़ा और तीन सालों में 80 हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि इन कमजोर तबकों की जेब में डाली। इस तरह स्वावलंबन के भाव से छत्तीसगढ़ के जनजीवन में एक नई ताजगी का संचार हुआ है।

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व तीन वर्षों में यह साबित कर दिखाया है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को सिर्फ अपने राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे देश में नई और सही सोच के साथ काम करने वाले लोगों के रूप में पहचाना जाएगा और यही एकमात्र कारण है कि छत्तीसगढ़ की जनता ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को देखते हुए नगरी निकाय चुनाव में कांग्रेस को चुना है। कांग्रेस के बारे में कहा जाता है की कांग्रेस को कांग्रेसी ही हराते हैं। यदि कांग्रेसजन एकजुट रहते हैं तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस का गढ़ बना रह सकता है ।