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वैश्विक ड्रोन हब बनने की भारत में अपार क्षमता, ड्रोन नियमावली हुई सरल, लाइसेंस लेना होगा आसान

वैश्विक ड्रोन हब बनने की भारत में अपार क्षमता, ड्रोन नियमावली हुई सरल, लाइसेंस लेना होगा आसान

नयी दिल्ली।  सरकार ने आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में पहुंच आसान बनाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए ड्रोन नियमावली को सरल कर दिया, जिसके तहत रूट का निर्धारण करने के साथ ही ड्रोन का परिचालन, लाइसेंस, शुल्क एवं अन्य प्रक्रियाओं को आसान बना दिया गया है।

नागर विमानन मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी ड्रोन नियमावली 2021 में बताया गया है कि मानवरहित एयरक्राफ्ट प्रणाली (यूएएस) जिसे आमतौर पर ड्रोन कहा जाता है से कृषि, खनन, आधारभूत संरचना, सर्विलांस, आपात स्थिति में कार्रवाई, परिवहन, मैपिंग, रक्षा क्षेत्र में काफी मदद मिलेगी। आसान इस्तेमाल, विविध उपयोग एवं सुदूर क्षेत्रों तक आसान पहुंच की बदौलत ड्रोन रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। भारत के पास वर्ष 2030 तक वैश्विक ड्रोन हब बनने की अपार क्षमता है।

ड्रोन नियमावली 2021 के विशेषताओं का उल्लेख करते हुए मंत्रालय ने बताया कि इस नियमावली के बनने से पहले तक ड्रोन परिचालन के लिए कई तरह की स्वीकृति लेनी होती थी लेकिन अब यूनीक ऑथोराइजेशन नंबर, ड्रोन विनिर्माण एवं रखरखाव का प्रमाण-पत्र, आयात मंजूरी, मौजूदा ड्रोन की स्वीकार्यता, ऑपरेटर परमिट, शोध एवं विकास संगठनों का प्रमाणीकरण, स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस, रिमोट पायलटों के निरीक्षकों का प्रमाणीकरण के लिए ली जाने वाली स्वीकृतियों को समाप्त कर दिया गया है।

ड्रोन परिचालन से संबंधित 25 फॉर्म को घटकार पांच तथा पूर्व की 72 प्रकार के शुल्क को घटाकर अब चार कर दिया गया है, जैसे बड़े ड्रोन के लिए रिमोट पायलट लाइसेंस शुल्क को कम करके 3000 रुपये और सभी श्रेणी के ड्रोन के लिए शुल्क 100 रुपये कर दिया गया है, जो 10 वर्ष तक वैध रहेगा। साथ ही यूजर फ्रेंडली सिंगल विंडो सिस्टम आधारित डिजटल स्काई प्लेटफॉर्म का विकास किया जाएगा। इसके माध्यम से अधिकांश स्वीकृतियों डिजटली प्राप्त हो जाएंगी और संचालकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।