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अहंकार को मिटाने से ही वास्तविक शांति मिलती है

अहंकार को मिटाने से ही वास्तविक शांति मिलती है

सक्ती- सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ" का उद्घोष करने वाले सिखों के दशम गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती पर सिख समाज के साथ सभी लोगों को प्रकाश पर्व की बधाई देते हुए सरस्वती शिशु मंदिर के व्यवस्थापक व उच्च न्यायालय के अधिवक्ता चितरंजय सिंह पटेल ने कहा कि आज स्मरण आ रहा है कि विद्यार्थी के रूप में हमने आदर्श विद्यालय सक्ती के  सांस्कृतिक उत्सव में गुरु जी के जीवन पर प्रस्तुत अभिनय में  सौभाग्य से मैंने गुरु गोविंद सिंह जी का पात्र निभाया जिसमें मेरे पांच सहपाठी पंच प्यारे की भूमिका थे। उस अभिनय के अभ्यास से मंच में प्रस्तुति देने के दरम्यान हमारे बालमन में अपने अपने किरदार इस तरह समा गए थे कि काफी दिनों तक गोविंद सिंह नाम का उद्घोष हमारे आदत में शुमार हो गया था। तब इस किरदार की वेशभूषा में हमें तैयार करने सक्ती स्कूल के सामने दुकान वाले सरदार जी अंकल,  शायद जसविंदर के चाचा या पापा आये थे तब उनके द्वारा हमें सजाने के दौरान गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन का ज्ञान बताने का असर हुआ कि हम लोग अपने किरदार को बखूबी निभा कर खूब तालियां बटोरी।

चितरंजय ने आगे कहा कि प्रकाश पर्व पर यह विषय शेयर करने का आशय सिर्फ यह है कि अब हमारे विद्यालयों में लगभग सांस्कृतिक आयोजन बंद हैं अगर यदा कदा होते भी हैं तो तथाकथित रिमिक्स सांग पर भोंडे पाश्चात्य नृत्य, जिस पर हो हल्ला के साथ चंद पलों के लिए तालियां भी बजती है पर हमारे भावी पीढ़ी के दिलों में हमारे महापुरुषों,उनके त्याग बलिदान, संस्कृति व राष्ट्र के लिए कुछ कर गुजरने का जज़्बा पैदा हो सके ऐसा भाव सर्वथा नगण्य है। गुरु गोबिंद सिंह जी जयंती पर्व पर आग्रह किया कि विद्या भारती की तरह सभी विद्यालयों में भारतीय संस्कृति व महापुरुषों के देश के प्रति बलिदान व  इतिहास को लेकर अपने भाव जागृत करने हेतु समोचित पहल हो तब हमारे विद्या मंदिरों में नक्सल वाद, अलगाव वाद जैसे राष्ट्र विरोधी भाव प्रगट करने वाले कन्हैया कुमारों का वजूद ही नहीं होगा। 

हिन्दू धर्म रक्षार्थ सिख समुदाय को एकजुट करके “खालसा पंथ” की स्थापना कर गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिखों को “पंज प्यारे” और “पंच ककार” दिए। आज उनकी जन्म जयंती पर सिखों के साथ संपूर्ण देशवासी अपने निजी अहंकारों को त्याग उनके आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र को सशक्त बनाने मातृभूमि के प्रति अपना योगदान सुनिश्चित करें । वन्देमातरम।