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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - क्या महामारी का बयान देश के खिलाफ है?

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - क्या महामारी का बयान देश के खिलाफ है?

-सुभाष मिश्र
कोरोना संक्रमण से उपजी स्थिति और सरकार की असफलता, नाकामी को बताना क्या देश के खिलाफ बयानबाजी है। क्या ये देश की छवि दुनिया में सामने खराब करने की सोची-समझी साजिश का हिस्सा है? जब सरकार लोगों में उम्मीद पैदा कर रही हो, तब विपक्ष लोगों को डरा रहा है। क्या विपक्ष को इस समय सब कुछ भूलकर सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर वैसा ही आचरण करना चाहिए, जैसा बहुत से देशभक्त कहलाने वाले टीवी चैनल, सत्तापक्ष के नेता और उनके विचारों को मानने वाले बहुत से लोग कर रहे हैं।

यह बात इसलिए हो रही है कि विपक्ष और बहुत से लोग कोरोना महामारी से उपजी स्थिति और मौतों के लिए सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर निशाना साध रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस महामारी का सबसे अच्छा मुकाबला भारत ने किया है। विपक्षी पार्टी के नेता, लोगों के बीच भ्रम पैदा करके जान बूझकर श्मशान, कब्रिस्तान, गंगा के किनारे की लाशों और अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौतों का बार-बार जिक्र करते हैं। सरकार से जुड़े लोग यह मानने तैयार नहीं है कि टीकाकरण कार्यक्रम में किसी प्रकार की कोई लापरवाही बरती जा रही है। अभी तक 22 करोड़ 66 लाख वैक्सीन राज्यों को दी जा चुकी है तथा 216 करोड़ वैक्सीन के डोज दिसम्बर तक राज्यों को दे दिए जाएंगे। अभी तक वैक्सीनेशन का राष्ट्रीय औसत 6.3 प्रतिशत है। जो दूसरे देशों से बहुत बढिय़ा है। मोदीजी रात-दिन एक करके इस आपदा से निपटने का प्रयास कर रहे हैं। विपक्ष उनके आंसुओं को भी घडिय़ाली आंसु बताने पर आमदा है।

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार पर असफल होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सभी को वैक्सीन टीको की उपलब्धता कब तक होगी? वैक्सीनेशन इसी तरह से चलता गया तो मई 2024 में हिन्दुस्तान की पूरी जनता का वैक्सीनेशन होगा। सरकार और प्रधानमंत्री को आज तक कोरोना समझ ही नहीं आया है। कोरोना सिर्फ एक बीमारी नहीं है, कोरोना एक बदलती हुई बीमारी है।

अगर वैक्सीनेशन इसी तरह चलता रहा तो कोरोना की तीसरी, चौथी और पांचवी वेब आएगी। हमारी मृत्यु दर झूठ है, और सरकार इस झूठ को फैला रही है। सरकार को समझना चाहिए कि विपक्ष उनका दुश्मन नहीं है, विपक्ष उनको रास्ता दिखा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर आने का कारण प्रधानमंत्री की नौटंकी है। राहुल गांधी ने कहा कि लॉकडाउन और मास्क पहनना अस्थायी समाधान है, वैक्सीन ही कोविड का स्थायी समाधान है। कोरोना संकट को लेकर हमने एक के बाद एक सरकार को सलाह दी, लेकिन सरकार ने हमारा मजाक बनाया है। सरकार को हकीकत स्वीकार करने की जरूरत है, वास्तविक मौत की संख्या परेशान करने वाली हो सकती है, लेकिन हमें सच बोलने के लिए टिके रहना चाहिए।

कोरोना को लेकर भारत में जिस तरह की लापरवाही बरती गई है उसे लेकर पूरी दुनिया के मीडिया में भारत की बहुत किरकिरी हुई है। न्यूयार्क टाईम्स में 27 अप्रैल को प्रकाशित खबर के अनुसार सरकार साल की शुरुआत में ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे कि कोरोना पर फतह पाली गई है। वो बड़ी रैलियां कर रही थी और कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन को अनुमति दे रही थी। द आस्ट्रेलियन ने लिखा कि अहंकार, अति राष्ट्रवाद और अफसरशाही की अक्षमता की वजह से भारत में इतना विकराल संकट खड़ा हुआ है। भीड़ पसंद प्रधानमंत्री जहां गदगद है, वही जनता का गला घुट रहा है। ये कहानी है भयानक कोहराम मचने की।
द गार्जियन लिखता है कि सिस्टम धराशायी हो गया और भारत कोविड के नरक में गिर गया। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को महामारी की दूसरी लहर को झेलने के लिए अनाथ छोड़ दिया है। द टाइम्स लंदन-भारत की दूसरी कोरोना लहर में लडखड़़ाते मोदी। द इकोनामिस्ट ने 24 अप्रैल को लिखा सरकार का ध्यान भटकने और आलस की वजह से कोरोना विकराल हुआ है।

भाजपा प्रवक्ता और केंद्रीय मंत्रियों का कहना है कि जो विपक्ष आज पानी पी-पीकर कोरोना महामारी के लिए केंद्र सरकार को कोस रहा है, उसी विपक्ष के लोगों ने पहले कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रम की स्थिति निर्मित की थी। केंद्र सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ राज्यों को वैक्सीन उपलब्ध करा रही है और इस राष्ट्रीय आपदा से निपटने के लिए दिन-रात प्रयासरत है।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि देश में हर शख्स को इस साल के अंत तक कोरोना वायरस का टीका लग जाएगा। जावड़ेकर ने कहा कि यदि राहुल गांधी को कोरोना वैक्सीन की चिंता है तो फिर उन्हें कांग्रेस शासित राज्यों की ओर देखना चाहिए, जहां बड़ी खामियां है। कांग्रेस शासित राज्य 1 मई से दिए गए कोटे को ले ही नहीं रहे है, जिनका इस्तेमाल 18 से 44 साल की आयु वाले लोगों के टीकाकरण के लिए किया जाना है। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता के साथ मिलकर कोविड का सामना कर रहे है, तब राहुल गांधी प्रयासों के लिए नौटंकी शब्द का उपयोग करते हैं। यह देश और जनता का अपमान है। हम नौटंकी जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता में आए 7 साल पूरे हो चुके हैं। पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हो चुके हैं। इस वक्त पूरा देश कोरोना महामारी के अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है। मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी कोरोना से निपटना है। दूसरी बड़ी नाकामी किसानो का 6 माह से चल रहा आंदोलन है। मोदी सरकार को कोरोना महामारी पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। उन्हे पूरी दुनिया के सामने कोरोना के वास्तविक आंकड़े रखना चाहिए। यह बीमारी वैश्विक है, जो छिपाने से नहीं टीका लगाने से ही जायेगी। यदि आपके कहने से लोगो ने कोरोना भगाने ताली-थाली और दीवाली मनाई है तो लाखों लोगो के मरने पर थोड़ा मातम भी मनायेंगे। विपक्ष आपसे सवाल करेगा और सरकार को मीडिया मैनेजमेंट करने की बजाय सच का सामना करना चाहिए। ये वैशिवक आपदा है जिसे सरकार नहीं लाई।