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CBSE Class 12 Exam: दि‍ल्ली-हरियाणा समेत इन राज्यों ने कहा, पहले टीका-फिर एग्जाम

CBSE Class 12 Exam: दि‍ल्ली-हरियाणा समेत इन राज्यों ने कहा, पहले टीका-फिर एग्जाम


उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को कहा कि दिल्ली सरकार सीबीएसई द्वारा कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के विकल्प तलाशने के पक्ष में नहीं है और छात्रों का टीकाकरण किए बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाना एक बड़ी गलती साबित होगी। सीबीएसई के जुलाई-अगस्त में संक्षिप्त प्रारूप में केवल 19 प्रमुख विषयों के लिए कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा कराने के प्रस्ताव का अधिकांश राज्यों ने  समर्थन किया है.  वहीं केरल, असम, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा और मेघालय जैसे कई राज्यों ने केंद्र सरकार से शिक्षकों और छात्रों को परीक्षा केंद्र पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण करने का आग्रह किया है. 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रविवार को हुई राज्य के शिक्षा मंत्रियों और शिक्षा सचिवों की बैठक में शामिल एक अधिकारी का कहना है कि दिल्ली और महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों को छोड़कर अन्य ने सरकार के परीक्षाओं के प्रस्ताव का समर्थन क‍िया है. बता दें कि राजनाथ सिंह ने बैठक के बाद कहा कि सरकार की प्राथमिकता सभी परीक्षाओं को सुरक्षित माहौल में आयोजित करना है. इसके लिए कल यानी 25 मई तक लिखित में सभी राज्यों को अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा गया है. 

बता दें कि इस बैठक के बाद कम से कम ये स्पष्ट हो चुका है कि सीबीएसई कक्षा 12 की परीक्षा कैंसिल नहीं की जाएगी. महामारी की दूसरी लहर के कारण कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा पहले ही रद्द कर दी गई है. सूत्रों के मुताबिक उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, असम और तमिलनाडु आदि राज्यों ने संक्षिप्त प्रारूप में बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का समर्थन किया था. 

वहीं पंजाब राज्य एक ऐसा राज्य था जिसने व्यक्तिगत रूप से परीक्षा आयोजित करने पर जोर दिया, भले ही वह कुछ विषयों के लिए ही क्यों न हो. वहीं कर्नाटक और पुडुचेरी केंद्र सरकार के निर्णय के साथ साथ चलने पर सहमत हुए. लेकिन दिल्ली के श‍िक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि पहले छात्र व परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी देने वाले छात्रों का टीकाकरण हो तभी यह परीक्षा कराई जानी चाहिए. इस तरह राज्यों की अलग अलग प्रत‍िक्र‍िया ने सरकार के प्रस्ताव को फिलहाल अधर में लटका दिया है. 

इससे पहले बोर्ड ने सरकार के आगे परीक्षाएं आयोजित कराने के दो प्रस्‍ताव रखे थे. पहला प्रस्‍ताव था कि परीक्षाओं का पैटर्न बदल दिया जाए और केवल 1.5 घंटे का पेपर लिया जाए. दूसरा प्रस्‍ताव था कि केवल महत्‍वपूर्ण विषयों के एग्‍जाम लिए जाएं और बाकी सब्‍जेक्‍ट्स में बच्‍चों को इंटर्नल असेसमेंट के आधार पर पास कर दिया जाए. अधिकांश राज्‍यों ने परीक्षाएं आयोजित करने पर ही सहमति दिखाई.