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सबसे ज्यादा फर्जी किसान मिले सारंगढ़ में, फिर से रकबा संशोधन की मांग

सबसे ज्यादा फर्जी किसान मिले सारंगढ़ में, फिर से रकबा संशोधन की मांग


गाताडीह समिति में रकबा काटने के बाद पहुंचे ढाई सौ किसान, खरीदी के महज दस दिन पहले कैसे होगा निराकरण

रायगढ़, 22 नवंबर। कितनी अजीब बात है कि जिले के सभी ब्लॉकों में किसान पंजीयन का काम पूरा हो चुका है। कहीं कोई आपत्ति बाकी नहीं है, लेकिन सारंगढ़ की गाताडीह समिति इस सबसे अलग है। वहां अभी भी कई किसानों को आपत्ति है कि उनका रकबा काट दिया गया। वहीं सबसे ज्यादा साढ़े छह सौ फर्जी किसान सारंगढ़ की 12 समितियों में ही मिले हैं।

इस बार सरकार ने किसान पंजीयन को लेकर बेहद सख्त तेवर अपनाए हैं। योजनाबद्ध तरीके से पहले पटवारियों को हर खेत का मुआयना कर गिरदावरी तैयार करने को कहा। जहां संदेह हुआ, वहां जांच भी करवाई। कलेक्टर भीम सिंह ने धान का ज्यादा रकबा दर्शाने वाले गांवों का पुन: जांच करने का आदेश भी दिया था। इसमें पता चला कि कहीं 7 को 70 कर दिया तो कहीं 58 को 858। इस वजह से रकबा बहुत ज्यादा दिख रहा था। गिरदावरी को भुइयां से लिंक कर हर किसान का डाटा अपडेट किया। जब किसान पंजीयन प्रारंभ हुआ तो सॉफ्टवेयर में भुइयां से क्रॉस चेक करने का विकल्प मौजूद था। एक मिनट में किसान का रकबा चेक कर गिरदावरी के हिसाब से धान बोया गया रकबा सामने आ जाता था जिसके हिसाब से पंजीयन हुआ। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रक्रिया के दौरान 2465 ऐसे किसानों का पंजीयन निरस्त किया गया जिनके नाम पर अब तक धान बेचकर समर्थन मूल्य हासिल किया जा रहा था। इनमें 2451 तो पुराने किसान थे जिनका पंजीयन कैरी फारवर्ड किया गया था। सबसे ज्यादा 654 फर्जी नाम सारंगढ़ की 12 समितियों में मिले। इसमें भी गाताडीह समिति में अकेले 307 नाम मिले। अब उसी गाताडीह समिति में फिर से रकबा संशोधन की मांग उठाई जा रही है।

प्रशासन की मेहनत पर पानी फेरने की कोशिश

जिला प्रशासन ने संयुक्त टीमें बनाकर ऐसे फर्जी पंजीयन को रोका था। लेकिन अंतिम दिनों में बार-बार मोहलत बढ़ाकर रकबा संशोधन करने की मांग करना बहुत अजीब है। पंजीयन की सूची का प्रकाशन भी किया गया था। सारंगढ़ में किसानों को 11 व 12 नवंबर को दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने का समय दिया गया था। लेकिन कोई किसान नहीं पहुंचे। 17 नवंबर को अचानक से गाताडीह समिति के गांवों से करीब ढाई सौ किसानों ने आपत्ति दर्ज कराई। सबकुछ बेहद नाटकीय तरीके से हो रहा है। किसानों का कहना है कि उनका रकबा छूट गया है।

फर्जी किसानों में गाताडीह के ही 307

पूरे जिले की 79 समितियों में 2465 किसानों का पंजीयन फर्जी पाया गया। इसमें से सारंगढ़ तहसील की 12 समितियों के 654 नाम हैं। इसमें भी गाताडीह समिति में ही 307 नाम ऐसे मिले हैं, जो वास्तव में हैं ही नहीं। फिर भी इनके नाम पर हर साल करोड़ों का धान बेचा गया। इतने सालों तक चले फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल था, इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। आखिर कैसे पंजीयन के दौरान इतनी बड़ी गड़बड़ी को अनदेखा किया गया।

फर्जी किसानों की संख्या

बरमकेला       316

धरमजयगढ़ 215

घरघोड़ा 96

खरसिया 337

लैलूंगा 129

पुसौर 294

रायगढ़ 332

सारंगढ़ 654

तमनार 92