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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोरोना के वैक्सीनशन में विदेशी मॉडल काम नहीं आएगा

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  - कोरोना के वैक्सीनशन में विदेशी मॉडल काम नहीं आएगा

- सुभाष मिश्र
हमारे देश की विशालकाय आबादी को देखते हुए हमें कोरोना वैक्सीन का टीका लगाने देशी मॉडल बनाना होगा, वरना संसदीय समिति की आशंका सही साबित होगी कि टीकाकरण के लिए कई साल लग जाएंगे। वर्तमान में हमारे देश में कोरोना वैक्सीनेशन में विदेशी मॉडल को तवज़्ज़ो देकर पहले 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों और 45 वर्ष से अधिक आयु के कोमोरबिटी वर्ग के नागरिकों को वैक्सीन लगाने का कार्य किया जा रहा है। प्रश्न है कि क्या ये विदेशी मॉडल भारत की 132 करोड़ की जनसंख्या पर कारगर साबित होगा? 16 जनवरी से आरम्भ किये गए टीकाकरण में अब तक देश में लगभग 4 करोड़ लोगों को टीका लग चुका है। शुरू की धीमी रफ्तार के बाद अब 30 लाख लोग प्रतिदिन की रफ्तार पकड़ चुकी है। टीकाकरण आरम्भ हुए 2 माह हो चुके हैं और इसी समय कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दे दी है। अक्सर भारत में हम समय रहते योजनाओं की चिंता नहीं करते, बल्कि स्थिति बिगडऩे पर चिंता करते हैं। अब जबकि कोरोना की दूसरी लहर आ चुकी है और देश के सात राज्य इससे प्रभावित हैं तब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर निर्णायक कदम उठाने की बात कही। उन्होंने गांवों तक कोरोना संक्रमण नहीं फैले इस पर चिंता जाहिर करते हुए छोटे शहरों में टेस्टिंग बढ़ाने पर जोर दिया। कोरोना संक्रमण के पहले दौर में देश की 78.5 फीसदी आबादी ऐसी थी जो कोरोना विषाणु के संपर्क में नहीं आई। इसमें ज्यादातर अर्धशहरीय और ग्रामीण आबादी समाहित थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि केन्द्र सरकार की ओर से टीकाकरण की इजाजत सबको मिलनी चाहिए। यदि टीकाकरण के वर्तमान नियम में ढील दी जाती है तो समूची दिल्ली को तीन महीने में कोरोना वैक्सीन के टीके लगाए जा सकते हैं।   

आज जरूरत है वैक्सीनेशन की व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की। इस संदर्भ में कुछ कदम उठाकर ऐसी व्यवस्था हम लागू करें तो त्वरित और बेहतर परिणाम मिल सकते हैं,  जिन पर अमल किया जाना चाहिए। सबसे पहले विशेष संक्रमित क्षेत्रों जैसे महाराष्ट्र के नगर मुम्बई, पुणे, नागपुर, अमरावती, मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर छत्तीसगढ़ के रायपुर दुर्ग में टीकाकारण के लिए आयुसीमा खत्म कर 18 वर्ष से अधिक आयु के शत-प्रतिशत लोगों को वेक्सीन दी जाए। पूरे देश में सभी निजी अस्पतालों को टीकाकरण के लिए अनुमति दी जाए व स्पष्ट प्रोटोकॉल दिया जाए। सरकारी टीकाकरण केंद्रों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए और वहां दो शिफ्ट में सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक एक टीम व दोपहर 3 से रात 8 बजे तक दूसरी टीम तैनात की जावे। मोबाइल वैक्सीनेशन यूनिट्स बनाकर शालाओं व महाविद्यालयों,रिहायशी कॉलोनीज में विशेष टीकाकरण शिविर लगाए जाएं और वहां एक एम्बुलेंस रखी जाए। भारत सरकार विशेष विमानों व हेलिकॉप्टर्स से वैक्सीन की आपूर्ति निरन्तर रखी जावे। किसी स्थान की अतिरिक्त वैक्सीन को स्थानांतरित किया जावे।

हमने कोरोना संक्रमण के दौरान बिहार जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव होते देखा। अब हम पश्चिम बंगाल, असम जैसे राज्यों ने चुनाव होते देख रहे हैं। हम जिस देश में रह रहे हैं वहां जब चुनाव में एक दिन में हम 20 करोड़ लोगों से मतदान करवा सकते हैं तो अगर इसी व्यवस्था को 50 प्रतिशत भी लागू करें तो एक दिन में 10 करोड़ टीके लगवाने के लक्ष्य कोई दिवास्वप्न नहीं है।

गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने देश में चल रहे टीकाकरण अभियान की धीमी गति पर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि इस दर से पूरी आबादी का टीकाकरण करने में कई साल लगेंगे। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, समिति कोविड-19 के लिए चल रहे टीकाकरण प्रक्रिया पर ध्यान देती है और देखती है कि अब तक भारतीय जनसंख्या का 1 प्रतिशत से कम टीकाकरण हो पाया है और इस दर से पूरी आबादी का टीकाकरण करने में कई साल लगेंगे। कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाले इस समिति ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है कि बड़ी संख्या में लोग वैक्सीन की दूसरी खुराक नहीं ले रहे हैं, क्योंकि वायरस का कहर फिर से लौट रहा है और दुनिया के अलग-अलग हिस्से में कोविड-19 के नए रूप सामने आ रहे हैं।

दिल्ली में 16 जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण अभियान के दो माह पूरे हो चुके है। अब तक करीब 6.50 लाख लोगों को ही वैक्सीन की पहली खुराक लग सकी है। यह दिल्ली की कुल आबादी का 3 फीसदी ही है। कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर लोगों में झिझक और भ्रांति के चलते कुल 2.78 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों ने टीके के लिए पंजीकरण कराया था। इनमें से अभी तक एक लाख 86 हजार कर्मियों ने ही टीके लगवाए हैं। वहीं, 4.5 लाख अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मचारियों में से 2 लाख 61 हजार को वैक्सीन लगी है। इस लिहाज से देखे तो पंजीकरण के हिसाब से अभी तक 50 फीसदी कर्मचारियों को ही टीका लगा है।

यह भी देखने में आ रहा है कि कुछ लोगों में दूसरी डोज़ को लेकर उत्साह नहीं है लेकिन सेकंड डोज़ नहीं लगाई तो इम्युनिटी पूरी तरह से डेवलप नहीं होगी। पिछले कुछ समय से देश में कोरोना के केस कम हो गए थे पर अब उनमें तेजी आई है। देश के कुछ हिस्सों में खासकर महाराष्ट्र, केरल, पंजाब की बात करें तो केस बढऩे लग गए हैं। अब देश में कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज़ लगाने का वक्त आ गया है जब तक दूसरी डोज़ वैक्सीन की नहीं लग जाती तब तक शरीर में इम्युनिटी नहीं आएगी। वैक्सीन ही एक तरीका है जिससे इस महामारी से बचाव कर सकते हैं। अगर एक वेव और आ गई तो संभालना बहुत मुश्किल होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन के बिना कोरोना संक्रमण को फैलने से रोक पाना मुमकिन नहीं है।

याद रहे कि आज कोरोना टीकाकरण के लिए गति याने स्पीड ज्यादा जरूरी है क्योंकि देश की आखिरी पंक्ति के टीकाकरण के 28 दिन बाद के भी दो हफ्ते बाद याने पहला डोज़ लेने के 6 हफ्ते (डेढ़ माह) बाद ही परिणाम मिलेंगे। इसलिए अगर आज से भी गति लाई जाए तो सुरक्षित स्थिति जून तक ही प्राप्त हो पाएगी। जागिये सरकार, कुछ करिये सरकार, जरुरत पड़े तो फिर से ताली-थाली बजाकर, दीए भी जलवाईये सरकार, पर कुछ तो करिए सरकार। ऐसे तो कोरोना जाने से रहा। या फिर देश के नागरिकों से मन की बात के जरिये कह दीजिए कि कोरोना के साथ जीना सीख लें। लोग भी स्वीकार कर कहने लगेंगे-
इसको ही जीना कहते हैं तो यूं ही जी लेंग
उफ न करेंगे लब सी लेंगे। आंसू पी लेंगे।
अब गम से घबराना कैसा, गम सौ बार मिला।