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तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं

तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं

रविवारीय जनधारा में मनोविज्ञान में पी.एच.डी. एवं मनोविज्ञान सलाहकार डॉ . ममता व्यास का कॉलम "तेरा मेरा मनवा" के जरिए मनोविज्ञान से जुड़े प्रश्नों के जवाब दिए जाएंगे।

जब तक हम जीवित हैं समस्याएं हमारे आसपास रहेगीं | समस्याओं के पथरीले रास्तों पर चलकर ही समाधान की सुंदर क्यारियां मिल जाती है| अक्सर लोग मुसीबतों से घबरा जाते हैं उस वक्त उनका मन विचलित हो जाता है और दिमाग सोचना बंद कर देता है। उस वक्त उनका ना भावनाओं पर काबू रहता है और ना  व्यवहार पर। ऐसी हालत में वह मानसिक रोगों का शिकार हो जाता है। मानसिक रोग के लक्षण, हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। ये इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसके हालात कैसे हैं और उसे कौन-सी मानसिक बीमारी है। मन की हजार उलझनों का सुलझाव भी मन के रास्तों से ही निकलता है। तेरा मेरा मनवा भी कुछ ऐसी ही बात करता है।


समस्या 1 - स्ट्रेस या तनाव के मुख्य कारण क्या हैं ? ( विशाल तिवारी भिलाई ) 

समाधान - स्ट्रेस होने की कई वजह हो सकती है, जिनमें परिवार में आपस में झगड़े होना, किसी प्रिय व्यक्ति की मौत , प्रोफेशन लाइफ में परेशानी आना, या वैवाहिक जीवन में अनबन होना आदि ।

समस्या-2 मेरे पिताजी की आयु करीब 80 हो गयी है ।आजकल उनका व्यवहार बहुत ही अजीब सा हो गया है । बच्चों की तरह बात -बात पर रोने लगते हैं । खाना खाने के बाद भी कह देते हैं कि नहीं खाया । कभी अचानक से बहुत खुश होकर हम सभी भाई बहनों से पुरानी बातें साझा करते हैं तो कभी एकदम से चुप हो जाते हैं कई दिनों तक किसी से बात नहीं करते । मेरी पत्नी और मेरा 10 वर्षीय बेटा उनके व्यवहार से तंग आ जाते हैं क्या करूँ ? ( प्रकाश जोशी भोपाल )

समाधान - बच्चे और बुजुर्ग एक समान होते हैं। यह सच है कि एक उम्र के बाद बुजुर्ग फिर से बच्चों की तरह व्यवहार करने लगते हैं। बात बात पर रूठ जाना , जिद्द करना या झूठ बोल देना । अपनी ही किसी बात पर रो देना । ये वो वक्त होता है जब उन्हें परिवार के सपोर्ट की जरुरत होती है | उन्हें भावनात्मक सहारे की जरुरत होती है | आप उन्हें उनके पुराने दोस्तों से या उनके किसी प्रिय व्यक्ति से उनकी बात करवाए | घर के सभी सदस्य उनसे बात करें उन्हें अकेलापन नहीं लगेगा ।

समस्या 3 –मेरे  भाई की बेटी  का विवाह पिछले बरस ही उज्जैन में हुआ था । विवाह के बाद उसके पति ने उसके साथ कोई  संबंध नहीं बनाये वो  दिन में कई घंटे  पूजा पाठ में लगा रहता था और कहता था किसी ज्योतिष /पंडित ने मना किया है, संबंध बनाने को । वो अपनी पत्नी को भी अपने साथ पूजा में बिठाता था । कई महीनों तक मेरी भतीजी चुप रही फिर डिप्रेशन में चली गयी और उसी तबियत बिगड़ गयी हम उसे घर ले आये । वो इतनी डरी हुई है कि वापस जाना नहीं चाहती । अब समझ नहीं आता हम क्या करे ? (सुनील श्रीवास्तव इंदौर )

समाधान – आपकी समस्या गंभीर है , सबसे पहले आप अपने शहर के किसी भी काउंसलर से आपकी भतीजी की काउंसलिंग करवाए | उस बच्ची से बातचीत करें उसके मन की बात बाहर निकलवाये | पति-पत्नी के रिश्तों के बिगड़ने  के मूल में कई मनोवैज्ञानिक एवं शारीरिक कारण हो सकते हैं | आजकल विवाह दहेज़ या घरेलू हिंसा की वजह से नहीं बल्कि नपुंसकता और संबंधों में असंतुष्टि की वजह से भी टूट रहे हैं । 

समस्या 4- मैं एक सिंगल मदर हूँ एक प्रायवेट स्कूल में टीचर हूँ ,मैंने अपने बेटे को बहुत संघर्ष करके पाला है | बचपन से ही वो पढ़ाई में बहुत होशियार था लेकिन दसवीं क्लास तक आते आते उसका ध्यान अब पढाई में नहीं लगता है । परीक्षा के समय वह बहुत बीमार हो जाता है मैं उसके भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हूँ कृपया सुझाये । ( मधुलिका मजुमदार, रीवा ) 

समाधान – आप खुद एक शिक्षिका हैं । आप अपने बेटे को उचित व योग्य मार्गदर्शन देकर उसका आत्मविश्वास बढ़ा सकती है। किशोर अवस्था तक आते आते बच्चों का ध्यान कई चीजों के प्रति बंट जाता है | आप धैर्य रखें एवं प्रेम से उसे समझाये , विचलित न हो आपके प्यार और सपोर्ट से वह फिर से अपनी पढाई पर ध्यान देने लगेगा।

समस्या -5 मैं अपनी माताजी को एक मनोचिकित्सक के पास ले गया था डाक्टर ने उन्हें सिजोफ्रेनिया नामक रोग बताया है। ये कौनसा रोग है क्या इसमें जान का खतरा होता है ? या व्यक्ति पागल हो जाता है ?परेशान हूँ |(गौरी शंकर मंडलोई, सतना ) 

समाधान ---सिजोफ्रेनिया बहुत गंभीर और खतरनाक मानसिक बीमारी हैं। हालांकि दुखद बात यह है कि इतनी भारी तादाद में लोग मानसिक रोग की गिरफ्त में आ रहे हैं, फिर भी लोग इसे छिपाए रखते हैं या इसे नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि अक्सर इस तरह की बीमारी के शिकार लोगों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता। आपने बहुत अच्छा किया जो डाक्टर को दिखाया | इलाज पूरी तरह से करवाए सब ठीक हो जायेगा | 

(डॉ ममता व्यास, साइकोलोजिस्ट एंड काउंसलर)