breaking news New

खुदरा व्यापार के लिये मीठा जहर है ई कामर्स: गुप्ता

खुदरा व्यापार के लिये मीठा जहर है ई कामर्स: गुप्ता

सुलतानपुर। राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में ई-कॉमर्स देश के खुदरा व्यापार के लिए मीठे जहर का काम कर रहा है। देश में ई कॉमर्स में रिटेल सेगमेंट में ग्रोथ देखने को मिल रही है जो खुदरा व्यापार के लिए दिक्कतें खड़ी करती जा रही है।

गुप्ता ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 2016 में 5 करोड़ लोग की शॉपिंग करते थे और 2020 में 32 करोड़ लोग ई शॉपिंग कर रहे हैं। करोना वैश्विक महामारी में देश की अर्थव्यवस्था का आधार एमएसएमई सेक्टर धराशाई हो गया है जिससे बेरोजगारी की बढ़ती चली जा रही है। देश का असंगठित क्षेत्र (रिटेल सेक्टर) 43 करोड़ लोगों को रोजगार देने का काम करता है।

उन्होने कहा कि व्यापारी समस्याओं के समाधान व राजनीतिक अधिकारों व निम्नलिखित मांगों को लेकर 19 दिसंबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रविंद्रालय खुदरा व्यापारी महासम्मेलन आयोजित किया गया है। जिसकी तैयारी के सिलसिले में आज वह सुलतानपुर में हैं। इतनी बड़ी संख्या में रोजगार देने के बावजूद खुदरा व्यापार दिन पर दिन समाप्त होता चला जा रहा है। इसका मुख्य कारण ऑनलाइन ट्रेडिंग है।

विश्व में सर्वाधिक ग्रोथ ई कॉमर्स में इंडिया में ही देखने को मिली। यूएस में 12 प्रतिशत चीन में 23 प्रतिशत और भारत में 68 फीसदी की ग्रोथ है। वर्तमान में फ्लिपकार्ट 45 प्रतिशत,स्नैपडील 26, अमेजॉन 12, पेटीएम सात प्रतिशत की ग्रोथ हर साल हासिल कर खुदरा व्यापार को तबाह कर रहे हैं।

बड़ी-बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां हेवी डिस्काउंट लगाकर देश के खुदरा व्यापार को जमींदोज करने का काम कर रही है। इस तरह की फ्लैश सेल को रोकने का काम किया जाए । देश के खुदरा व्यापार को बचाने के लिए की व्यापार पर 18 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया जाए।

देश के कानून मंत्रालय का बजट 2645 करोड़ रुपए में से 1100 करोड़ रुपए कैपिटल एक्सपेंडिचर में खर्च होता है। 1545 करोड़ों का बजट बचता है जबकि अमेजन अपनी लीगल फीस के तौर पर 8546 करोड़ रूपये खर्च बता बता रही है। देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का भी लीगल खर्च इतना नहीं है। अमेजन पर कानूनी केस भी कम कर रहे हैं।

सीधी बात है पैसा किसी और काम में खर्च हो रहा है, अमेजन की 2 साल में अमेजन की कमाई 42085 करोड़ रही है अमेजन की 6 कंपनी में मिलकर लीगल फीस के तौर पर 8546 करोड़ पर दिए है इन कंपनियों के आपस में रिश्ते की भी जांच हो केंद्र सरकार से मांग इसकी सीबीआई जांच करवा कर कड़ी कार्रवाई की जाए ।