breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोरोना टीके को लेकर अंधविश्वास और विवाद

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोरोना टीके को लेकर अंधविश्वास और विवाद

-सुभाष मिश्र
कोरोना का टीका इस समय सर्वाधिक चर्चा में है। टीके को लेकर जहां केंद्र और राज्य एक-दूसरे के आमने-सामने है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण को लेकर अच्छा खासा अंधविश्वास और भ्रांति का वातावरण फैला हुआ है। अभी तक देश की केवल 20 करोड़ 26 लाख आबादी को ही टीका लग पाया है। शहरीय क्षेत्रों में जहां टीकाकरण को लेकर अच्छा खासा उत्साह है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लोग टीका लगाने से बचना चाहते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अब कोरोना से ग्रामीण आबादी ज्यादा प्रभावित हो रही है। तीसरी लहर के आने पर पता नहीं क्या होगा। कोरोना से बचाव का एक मात्र विकल्प टीकाकरण है, जिसकी रफ्तार बहुत धीमी है।

कोरोना की वैश्विक बीमारी जब से आई है, तब से लेकर अब तक इसे लेकर तरह-तरह के विवाद और भ्रांति का वातावरण बना हुआ है। अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बेडन भी ट्रंप की ही तरह अब चीन के बुहान शहर से कोरोना कैसा फैला इसकी खोज खबर में लग गए हैं। चीन और अमेरिका कोरोना वायरस को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। हमारे देश भारत में कोरोना की पहली लहर के बाद बरती गई लापरवाही और किसी प्रकार की ठोस रणनीति नहीं अपनाने के कारण सरकार घेरे में है। देश में कोरोना संक्रमण से हुई लाखों मौतों ने सरकार को बचाव की मुद्रा में ला दिया है। टीकाकरण कार्यक्रम के लिए कोई केंद्रीय टीकारण नीति नहीं होने के कारण आज राज्यों के सामने आने वाले नागरिकों को टीका लगवाने का संकट है। राज्य के मुख्यमंत्री इसके लिए सीधे-सीधे केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोष दे रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दिखाये जा रहे सच से सरकार सकते में है और नियम कानून की आड़ में उन्हे घेरने पर आमदा।

देश एक ओर कोरोना वैक्सीन की कमी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में जो कोरोना टीके लगाने के लिए उपलब्ध है, उन्हें अंधविश्वास और भ्रांति के चलते ग्रामीण लगाना नहीं चाहते।

कोरोना से मुक्ति के लिए जहां गायत्री परिवार एक साथ तीन लाख घरों में यज्ञ करवा रहा है, वातावरण को शुद्ध करने की बात कर रहा है। वहीं दूसरी ओर रायपुर के साहू समाज ने कोरोना वैक्सीन को लेकर व्याप्त भ्रांतियां, अंधविश्वास को दूर करने के लिए सोशल डिस्टेसिंग का पालनकर कलश यात्रा आयोजित की है। साहू समाज वैक्सीन जागरूकता अभियान के अंतर्गत 26 से 31 मई तक कर्मा सेवा सप्ताह आयोजित कर गांव-गांव में व्याप्त भ्रांति को दूर करने की शानदार कोशिश कर रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, कुर्मी आबादी का बाहुल्य है, उन्हें और अन्य समाजों को भी साहू समाज की तरह सामने आकर गांव-गांव में इस तरह का अभियान चला कर वैक्सीन को लेकर व्याप्त अफवाहों, अंधविश्वास और डर को दूर करने की पहल करनी चाहिए। यह माडल पूरे देश की समाज पंचायतों और गांव पंचायतों को अपनाना चाहिए। किसान आंदोलन के समय जिस तरह की एकजुटता खाप पंचायत ने दिखाई, टीकाकरण जागरूकता के लिए भी इसी तरह की जरूरत है। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में वन विभाग के फॉरेस्टर अफसर संतोष रात्रे गांव-गांव में जाकर लोगों को वैक्सीनेशन कराने का संदेश दे रहे हैं। हाथ में तमूरा लिए छत्तीसगढ़ी गीत के माध्यम से बता रहे हैं, कोरोना वैक्सीन लगवाओ, यह संक्रमण से सौ आना सुरक्षित करावे।

छत्तीसगढ़ में कोरोना की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में 5 गुना अधिक मौतें हुई है। अभी तक यहां 12780 से अधिक लोग कोरोना से मर चुके हैं। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आबादी बाहुल्य वाले बिलासपुर-सरगुजा संभाग के जिलों में गांवों में इस दिनों कोरोना के अधिक प्रकरण देखे जा रहे हैं। सरकार अपनी ओर से दवा कीट उपलब्ध करा रही है। कोरोना टेस्टिंग की रफ्तार भी तीन गुना अधिक बढ़ी है। अभी छत्तीसगढ़ में 70 हजार से अधिक टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं। हर जिले में कोविड के उपचार हेतु विशेष अस्पताल स्थापित किया जा रहा है। ये सारे प्रयास तभी कारगर सिद्ध होंगे जब ज्यादा से ज्यादा आबादी को जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन के टीके लगे। अभी टीको के अभाव में शहरों के बहुत सारे टीकाकरण केंद्र बंद हो गए हैं। जो हाल छत्तीसगढ़ का है, वहीं हाल देश के अन्य राज्यों का भी है।
एक तरफ शहरी एरिया में 18+ वैक्सिनेशन के लिए सुबह 5 बजे से टीका लगवाने वालों की लाइन लग रही है तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक का धुंगियामुड़ा गांव में अब तक किसी भी उम्र के किसी भी व्यक्ति ने टीका नहीं लगवाया है। आसपास पड़ोस के गांवों में वैक्सीन लगवाने के बाद महीने भर बुखार, अपाहिज होने व मौत की अफवाह के कारण यहा के लोग कोविड वैक्सीन नहीं लगाना चाहते हैं।  

राजस्थान के अलवर जिले में मेव समाज के लोग जिनकी आबादी 8 से 9 लाख है। वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं। वैक्सीन को लेकर गांव में खासी अफवाह फैली हुई है। कुछ गांव के लोग कहते हैं कि वैक्सीन लगवाने से मौत हो जाती है। तो कुछ का कहना है कि वैक्सीन लगवाने से नपुंसकता होती है।

लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि जो टीके वो लगा रहे हैं उनका असर कब तक रहेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक बार टीका लगाने के बाद वर्षों तक कोरोना के गंभीर संक्रमण से बचाव हो सकता है, लेकिन संक्रमण से बचाव के लिए एक साल के बाद एक बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है। टीकाकरण के एक साल बाद न्यूट्रीलाइजिंग एंटीबाडी घटने लगेंगे जिसके लिए टीके की एक बूस्टर डोज लेना जरूरी होगा ताकि इन्हें फिर बढ़ाया जा सके। बिना बूस्टर डोज के भी टीकाकरण कई सालों तक कोरोना के गंभीर संक्रमण से बचाएगा। यदि टीके के बाद किसी व्यक्ति में न्यूट्रीलाइजिंग एंटीबाडी कम भी पाई जाती है, तो भी वह कोरोना संक्रमण को रोकने में कारगर होगी। यदि किसी टीके की प्रभावकारिता 50 फीसदी है, तो उसे भी लगाने वालों में कोरोना संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति की तुलना में 80 फीसदी कम एंटीबाडी बनती है।

जिस देश में रातो-रात गणेशजी की मूर्ति दूध पीने लगे, उस देश में किसी भी प्रकार का भ्रम, अंधविश्वास अफवाह फैलाना बहुत आसान है और जब इस तरह का काम योगगुरू रामदेव बाबा जैसे लोग करने लगे तो फिर क्या कहेंगे। वैसे हमारे देश में बहुत बड़ा अंधविश्वास कथित धार्मिक बाबाओं, गुरुओं और साधु-संतों ने फैलाया। रहा सहा काम हमारे राजनेता ऐसे लोगों को महिमा मंडित करके, अपने साथ मंच पर बिठाकर कर देते हैं।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बाबा रामदेव के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज की मांग करते कहा रहा है कि कोरोना टीका को लेकर भ्रामक और गलत बयान दिए गए हैं। तमाम डॉक्टर इस समय बाबा रामदेव से ना सिर्फ नाराज हैं, बल्कि उनके बयान को मनोलब गिराने वाला बता रहे हैं। कुछ दिन पहले बाबा रामदेव ने योग अभ्यास सत्र के दौरान कोरोना वैक्सीन को लेकर कहा था- एक हजार डॉक्टर तो अभी कोरोना की डबल वैक्सीन लगाने के बाद मर गए, अपने आप को नहीं बचा पाए ये कैसी डॉक्टरी है। इससे पहले बाबा रामदेव ने एलोपैथी को स्टुपिड और दिवालिया साइंस बताया था। जब पूरे देश में जीवन रक्षक चिकित्सा पध्दती को लेकर ऐसे अविश्वास का माहौल बनाया जा रहा हो वहां का ग्रामीणजन यदि थोड़ा बहुत भ्रमित हो रहा हो तो आश्चर्य नहीं करना चाहिए।