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यहां 5 रुपए किलो की दर पर बिक रहा हैं बारदाना

यहां 5 रुपए किलो की दर पर बिक रहा हैं बारदाना

राजकुमार मल, भाटापारा। कूड़े के ढेर में फेंक दिया जाने वाला बारदाना, पहली बार 5 रुपए किलो की दर पर बिक रहा है। पैबंद लगाने के काम आ रहे, ऐसे बारदाने में जैसी तेजी आ रही है, उसके बाद खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां अपने परिसर के उन हिस्सों की खोज-खबर ले रहीं हैं, जहां इन्हें वेस्ट के रूप में डम्प करके रखा गया है।


समर्थन मूल्य पर चल रही धान की खरीदी के बीच, बारदाना बाजार, रोज नई कीमत -नई गुणवत्ता के साथ अपनी हाजिरी लगा रहा है। पहली बार इस बाजार में ऐसे बारदाने भी नजर आ रहे हैं, जिनमें लगे पैबंद का स्वरूप, बारदाने के लगभग 30 से 40 फ़ीसदी हिस्से में छाया हुआ है। कीमत का कम होना, ऐसे बारदाने की बिक्री का मुख्य आधार बन रहे हैं। ऐसे में चलन से बाहर हो चुके बारदानों की मांग बढ़ चली है। फिलहाल इसकी बाजार दर प्रति किलो 5 रुपए बताई जा रही है।


इसलिए अनुपयोगी और उपयोगी... 

खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों में एक निर्धारित समय के बाद जूट के ऐसे बारदाने सीमेंट की सड़क बनाने वाली निर्माण एजेंसियों के लिए रख दिए जाते हैं। यह एजेंसियां, निर्माण के बाद तराई के लिए इन बारदानों का उपयोग करतीं हैं। आज से पहले तक इकाईयां इसकी खरीदी तीन से साढ़े तीन रुपए किलो में किया करतीं थीं। अब यह पांच रुपए किलो तक पहुंच चुकी है। 

यह ले रहे बढ़ी कीमत पर... 

 बारदानों की किल्लत के बीच, जूट के पुराने बारदाने जिस तरह मांग में बने हुए हैं, उसके बाद पैबंद लगा बारदाना ने इस बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में सफलता हासिल कर ली है। लिहाजा पैबंद के लिए जरूरी ऐसे बारदाने की मांग बढ़ी जिन्हें चलन से बाहर किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में सड़क निर्माण एजेंसियों और यूनिटों में मांग का दबाव बढ़ा  और अब कीमत 5 रुपए किलो तक जा पहुंची है।

इस कीमत पर पैबंद बारदाना... 

प्लास्टिक और जूट बैग के अलग-अलग काउंटर के बाद, अब पैबंद लगा बारदाना के लिए भी जगह अलग की जा चुकी है। मांग निकलने के बाद पैबंद लगे बारदाने 20 से 22 रुपए प्रति नग की दर पर बिकने लगे हैं। बता दें कि इसकी खरीदी ऐसे किसान कर रहे हैं, जिन्हें सीमित मात्रा में भंडारण करना है।