कोरोना पर ध्रुव शुक्ल की कविता

कोरोना पर ध्रुव शुक्ल की कविता


देश के वरिष्ठ कवि इन दिनो लाकडाउन में रहकर कोरेना से उपजी स्थितियों पर कविता लिख रहे हैं । हम उनकी कविता कोरोना कविता श्रृखंला के अन्तर्गत आज उनकी दूसरी कविता “जरूरत से ज्यादा “ आपको पढा रहे हैं । हमने जनमंच पर ध्रुव शुक्ल का कविता पाठ भी किया था । 

ज़रूरत से ज़्यादा

लोग कतारों में खड़े हैं दूकानों के सामने

जीने का सामान जुटाने

घर इतना भर गया है चीजों से

जीने की जगह ही नहीं बच रही घर में

बाहर हो रही है मुनादी

मौत से बचने के लिए घर में रहो


लोग बाहर भागते हैं घर छोड़कर

जीने की चाह में

चले जाते हैं बहुत दूर घर से

खरीद लाते हैं कुछ और

जगह कम पड़ती जाती है जीने की

बाहर हो रही है मुनादी

मौत से बचने के लिए घर में रहो


लोगों को पड़ गयी है आदत

जरूरत से ज़्यादा की

घर की चीजों पर छाई मौत को पहचाने बिना

जरूरत से ज़्यादा जीने की


अब दूर दुनिया की किसी दूकान से

लोगों के करीब अजनबी की तरह

आ रही है जरूरत से ज़्यादा मौत