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व्यंग्य: कचरा वाला आया है तू रचना निकाल - अखतर अली

व्यंग्य: कचरा वाला आया है तू रचना निकाल - अखतर अली



रद्धी वाला आया तो बताया कि अब पुराने अखबार और पत्रिका खरीदने के पहले देखा जायेगा कि उसमें छपा क्या है ? जो छपा है उसका कोई मूल्य है भी या नहीं ? कागज़ चिकना है पर रचना खुरदुरी है तो क्या मतलब ? अगर उस पर सपाट बयानी और विचारहीन रचना है तो नहीं लेगे | माना हम रद्धी लेते है लेकिन इतनी भी रद्धी वाली रद्धी नहीं लेते है |

मैंने कहा – यदि रद्धी रचनाओं वाले कागज़ घर में भर गया है तो उसका क्या करे ?

रद्धी वाला बोला – सुबह कचरा गाड़ी आती है उस में डाल दीजिये | प्रकाशित अप्रकाशित दोनों रचनाये वो ले लेते है , साहित्य में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकेगा | मेरे से मुलाकात होगी तो मै गाड़ी वाले को बोल दूगा आप अपना रद्धी साहित्य लाल कपड़े में बांध कर पैक कर देना |

मै चौका , लाल कपड़े में क्यों बांधू ?

रद्धी वाला बोला – लाल कपड़े के कारण लोग समझ जाते है इसमें ख़तरनाक वस्तु है इसलिये कोई हाथ नहीं लगाता है | आम आदमी की सुरक्षा का भी ध्यान रखना पड़ता है न | बिजली के नंगे वायर और रद्धी साहित्य का झटका कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता है |

उसकी बात से मेरे को झटका लगा , मैंने दर्द भरे स्वर में कहा – मेरा साहित्य घटिया नहीं है | मेरे लहजे से रद्धी वाला पिघल गया और समझाया – यह लिखने वाला नहीं पढ़ने वाला तय करेगा वैसे अपना बच्चा और अपनी रचना सब को प्यारी होती है |

मैंने उससे निवेदन किया कि मेरे साहित्य को कचरा गाड़ी में तो मत फिकवा कुछ तो उसकी कीमत दे दे |

रद्धी वाला बोला – पहले हम लोग घटिया रचना वाली भी रद्धी लिया करते थे , कमज़ोर रचना के कारण ही वह रद्धी कहलाई | वैसे भी रद्धी रचनाओं वाले रचनाकारों का मै बहुत सम्मान करता हूं क्योकि अपनी रोजी रोटी इन्ही के भरोसे चलती रही है लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर घटिया साहित्य की भी कीमत अदा करना दिल को स्वीकार नहीं होता है |

मैंने कहा – लेकिन तुमको कैसे मालूम की वह घटिया साहित्य है ?

उसे मेरी बुद्धि पर तरस आया उसने गर्व के साथ कहा – सर जी तीन पीढियों से कबाड़ी का धंधा कर रहे है हम लोग | एक नज़र में समझ जाते है कि ढेर में मेटल कितना है कचरा कितना है |

मैंने कहा – यानि एक पैसा नहीं दोगे ?

उसने कहा – देगे तो नही लेकिन फेकने का पैसा लेगे |

मै चौक गया – लोगे क्यों उनको तो सरकार कचरा फेकने के लिये ही रखी है ?

उसने स्वीकार किया कि सरकार उन्हें कचरा फेकने के लिये पैसा देती है लेकिन अंकल कचरा कचरा में भी तो अंतर होता है | घरो से जो निकलता है वह है कचरे की सुपर क्वालिटी | ले जाते समय रास्ते में गिर गया , बच्चो के हाथ लग गया या फिर हवा में उड़ कर किसी के आंगन या छत पर पहुच भी गया तो शरीर को किसी प्रकार का खतरा नहीं होता है | लेकिन घटिया साहित्य कचरे की पुअर क्वालिटी है यह विषाक्त भोजन की तरह होता है इससे अक्ल की वही हालत होती है जो विषाक्त भोजन से पेट की होती है | इसलिये इसको कचरा गाड़ी में लोड़ करने के बाद तालपत्री से ढकना होता है और शहर के बाहर आबादी से दूर ले जाकर गड्ढा खोद कर दफनाना होता है |

मेरी आंख में आंसू आ गये – दफना दोगे ?

उसने समझाया – मजबूरी है | सामान्य सा कचरा होता तो जलाया भी जा सकता था क्योकि उसमें से जहरीला धुआं निकलने का अंदेशा नहीं होता है , लेकिन गैर ज़िम्मेदाराना साहित्य से जो किरणें निकलती है वे बुद्धि के लिये बहुत घातक है इससे अल्प व्यस्क मस्तिष्क भष्ट भी हो सकते है |  

मै रुआसा हो गया , मैंने कहा ये रचनाये मेरी ज़िंदगी भर की कमाई है |

रद्धी वाला बोला – अगर कमाई है तो नम्बर दो की कमाई है , यह आपकी अघोषित आय है , इसे किसी तरह ठिकाने लगा देने में ही भलाई है | इनकम टैक्स वालो को इसका पता चलेगा तो अक्ल से अधिक संपत्ति के मामले में आप गिरफ्तार भी हो सकते है |

गिरफ्तारी की बात सुन कर मै घबरा गया |

मेरे चेहरे पर डर देख रद्धी वाले को डराने में और मज़ा आने लगा | उसने मेरे को डराते हुए कहा – आपकी तो कोई ज़मानत भी नहीं लेगा लोगो को यही डर लगा रहेगा कि छूट गये तो फिर लिखने लगोगे | देख लेना लेखक संघ तक आपकी गिरफ्तारी का विरोध नहीं करेगे उल्टा दुआ करेगे कि पुलिस थर्ड डिग्री इस्तेमाल करे |

मै सहम गया , थर्ड डिग्री कैसी होती है ?

उसने इधर उधर देख कर धीरे से कहा – आपके मामले में यह भी हो सकता है कि रात भर आप से आप की ही रचनाये पढ़ाई जाये |

मैंने कहा – मेरी बड़ी तमन्ना थी कि मेरे को मेरे लेखन के लिये पुरस्कृत किया जाये |

रद्धी वाले ने विश्वास के साथ कहा – शाल , श्रीफल और इक्कीस हज़ार रूपये का नगद पुरस्कार तो कबाड़ी संघ की तरफ़ से आपको भविष्य में न लिखने के लिये मै ही दिलवा सकता हूं |

मैंने उसका आभार माना और फिर से निवेदन किया कि कल कचरा वाली गाड़ी को ज़रूर भेज देना |

उसने यकीन दिलाया कि साहित्य की यह सेवा करना तो उसके लिये सौभाग्य की बात है वह कल घर में जमा सभी कचरा रचनाओं को ठिकाने लगा देगा | उसने भी मेरे से एक निवेदन किया कि आप भी एक वादा करिये कि अब और नवसृजन नहीं करेगे क्योकि कचरा साहित्य को नष्ट भर करने से कुछ नहीं होगा इसकी प्रजनन क्षमता को भी रोकना होगा तभी श्रेष्ठ रचनाओं के लिये जगह बनेगी |

मैंने उसको आश्वस्त किया कि अब वह निश्चिंत रहे मेरे द्धारा अब लेखन करना संभव ही नहीं है |

उसने आशंका ज़ाहिर की कि अगले माह आप नौकरी से रिटायर्ड हो रहे है अब तो आप के पास समय ही समय रहेगा इसी बात से लोगो में भारी टेंशन है , व्हाट्सअप और फ़ेसबुक ग्रुप में लोग परेशान है कि अब क्या होगा ?

मैंने उसकी बात पर हैरानी ज़ाहिर किया | जब लोगो को मालूम है कि अगले महीने मै रिटायर्ड हो रहा हूं फिर भी परेशान है ? अरे भाई मेरे जब मै दफ़्तर जाउगा ही नहीं तो लिखूगा कहां ?