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बुझे कई घरों के चिराग, चंद महीनों में हुई 5 नवजात शिशु की संदिग्ध मौत

बुझे कई घरों के चिराग, चंद महीनों में हुई 5 नवजात शिशु की संदिग्ध मौत

चंद्र प्रकाश साहू

परिजनों ने कहा टीका लगने से हुई मौत, कहा बुढापा का सहारा थे हमारे बच्चे

महिला बाल विकाश विभाग , स्वास्थ्य विभाग के कार्य पर उठ रहे सवाल

सुरजपुर। जिले में लग़ातार नव जात शिशुओँ के मौत का आंकड़ा रुकने का नाम नही ले रहा हैं। हाल ही के कुछ महीनों में पांच नवजात शिशुओं के संदिग्ध मौत होने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि शिशु की मौत टिका लगने से हुई है। जिसे जिले के स्वास्थ्य अधिकारी टीके से मौत होने के आरोप को एक सिरे से नाकार रहे है। 

मिली जानकारी के मुताबिक बीते 3 माह के अंतराल में चार बच्चों  नवजात शिशु की मौत ग्राम रुनिहा डीह में हुई है। तो वहीं एक शिशु नमदगिरी ग्राम में हुई है। जानकारी के मुताबिक जुलाई माह में ग्राम रुनिहाडीह के ग्रामीण  टोन नारायण आत्मज अम्मा लाल रजवाड़े को के घर मे एक बच्चे का  का जन्म हुआ था। परिजनों ने खुसी जाहिर करते हुए बूढ़ापा में सहारा बनने को लेकर ख्वाब सजाए हुए थे कि तभी बच्चे को लगने वाले टिका 28 जुलाई 2020 को लगावाया था। जिसके 3 सितम्बर को मासूम की संदिग्ध अवस्था मे मौत हो गई। तो वहीं इसी ग्राम के दिनेश कुमार पिता रामफल के 4 माह के बच्चे को टिका 6 अकटुबर 2020 को लगा था। जो 19 अकटुबर को मौत हो गई। रुनिहा डीह ग्राम के ही दुबराज आत्मज चमरू लोहार के 2 माह की लड़की इसी दिन अकटुबर माह में ही टिका लगा था। जो 18 अकटुबर को मौत हो गई। ग्राम नमदगिरी के आलोक साय आत्मज अमर साय ढ़ेढ माह की बच्ची को टिका 22 दिसम्बर को टिका लगा था। जो महज 10 घण्टे के बाद मौत हो गईं। वहीँ ग्राम रुनिहा डीह के टेकाराम आत्मज बुधराम रजवार के दो माह के शिशु 5 जनवरी 2021 को टिका लगा था जो 7 जनवरी को मौत हो गई। जितने भी मौते हुई है उनके परिजनों के का कहना है कि बच्चे टिका के पहले स्वस्थ थे। किन्तु टिका लगने के बाद ही बच्चो के सेहत खराब हुई और उनकी मौत हो गई। परिजनों के टिका से लगने के आरोप व मीडिया में आने के बाद स्वास्थ विभाग हरक्क्त में आया। और नवजात शिशु के शव को पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। ताकि मौत के कारण पता चल सके। परिजनों ने टिका से मौत होने का कारण बता रहे है। तो वहीं जिला प्रशासन के कार्य को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। 

केंद्र व राज्य सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकाश द्वारा तमाम तरह के योजनाओं का संचालन कर रही है। जिसके लिए जिले में  गौड़ खनिज मद से गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशु के पोषण व उनके देख भाल के लिए योजनाओ के संचालन बस कागजों में सिमट कर रह गया है। जिसका लाभ बच्चों को व उनके परिजनों को नही मिल रहा है। ऐसे में जब बच्चों व उनके माँ को पोषण आहार नही मिलेगा तो बच्चों के सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ना लाजमी है। इसके साथ ही 4 बच्चों के संदिग्ध परिस्थियों में मौत होने के बाद भी जिला के स्वास्थ्य अधिकारी पोस्टमार्टम करना तक उचित नही समझा गया जो स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई तरह के सवाल खड़े करते है। जबकि 

महिला बाल विकाश विभाग द्वारा माँ व बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार रेडीटूईंट पैकेट में गुणवत्ता नही होने का मामला मीडिया के सुर्खियों में बना रहता है। जिसके बाद भी महिला बाल विकाश विभाग इस ओर ध्यान नही देती है। बल्कि समूह संचालकों से रिश्वत कमीशन खोरी में व्यस्त है। और बच्चे व उनके परिजनों के पोषण आहार भगवान भरोशे है। 

इस सम्बंध में जिला स्वास्थ्य अधिकारी सीएचमो आर एस सिंह से जब इस सम्बध में बताया कि हाल ही में हुए मौत का सूचना मिला है। हमने इसका पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पीएम के उपरांत ही मौत का कारण पता चल पाएगा। टिका से मौत होने के सवालों पर कहा कि किसी भी शिशु के टिका लगने के 12 घण्टे के उपरांत ही मौत होती तो टिका के कारण हो सकता था। किंतु मौत टिका के 3 दिन बाद हुई है। पीएम रिपोर्ट के बाद ही मौत का कारण सामने आ पायेगा। 

इस सम्बंध में महिला बाल विकाश विभाग के जिला अधिकारी मुक्ता नंद खूंटे से सम्पर्क करने कि कोसिस की गई किन्तु वे मीडिया से दुरी बनाकर रखना मुनासिफ समझते है।