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मन को ईश्वर में रमाने से ही मिलेगी सद्गति : अंधमोह सदैव जीवन में घातक होता है -पं. संतोषानंद

मन को ईश्वर में रमाने से ही मिलेगी सद्गति  : अंधमोह सदैव जीवन में घातक होता है -पं. संतोषानंद


भिलाई। केम्प दो वार्ड 24 गांधी चौक नहरपार में आयोजित संगीतमय भागवत कथा के दूसरे दिन कथाव्यास पं. संतोषानंद तिवारी ने भागवत का महात्मय, व्यास व परीक्षित जन्म सहित वराह अवतार का प्रसंग सुनाया। महाराज ने बताया कि श्रीमद भागवत साक्षात गंगा है। इसके कथा श्रवण से मनुष्य के कई जन्मों के पापाें का क्षय हो जाता है। धृतराष्ट्र के पुत्रमोह ने कौरव वंश का नाश कर दिया। उन्होंने बताया कि मोह जरूर करना चाहिए, लेकिन अंधमोह नहीं। अंधमोह सदैव जीवन में घातक ही होता है। अभिमन्यु और उत्तरा की कोख से जन्मे परीक्षित ने व्यास के पुत्र शुकदेव से गंगा तट पर आत्मज्ञान प्राप्त कर मोक्ष को प्राप्त किया। अपने बचपन में अनजाने में टिड्डियों के शरीर में कांटे चुभाने पर दूसरे जन्म में मंडप ऋषि ने भारी कष्ट भोगा। वहीं धर्मराज थोड़ी-सी भूल के लिए कष्ट भोगने विदुर के रूप में जन्म लिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कर्म करते हुए जीवन को सुधारना चाहिए, तभी कभी मनुष्य योनि में जन्म ले सकेंगे।

आगे कथावाचक ने वराह अवतार प्रसंग पर बताया कि राक्षस हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को रसातल में छुपा दिया। भगवान विष्णु ने वराहावतार लेकर हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाले व धर्म की रक्षा की। इस तरह जब-जब पाप बढ़े, नारायण पृथ्वी पर अवतार लिए। मन परमात्मा तो तन संसार है। मन को ईश्वर में रमाने से ही सद्गति मिलेगी। सत्संग से भवसागर पार करना आसान है। आयोजक समिति के भोला चौधरी ने बताया कि आज भरत कथा, सती व ध्रुव चरित प्रसंग होगा।