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रिटायमेंट की उम्र में जज न बनने की सोच में गड़बड़, सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर की टिप्पणी

रिटायमेंट की उम्र में जज न बनने की सोच में गड़बड़, सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर की टिप्पणी

नई दिल्ली । हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की रिटायमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वकीलों की सोच में कुछ गड़बड़ है, अगर वे रिटायमेंट की उम्र के कारण जज नहीं बनना चाहते हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ उस समय आश्चर्यचकित रह गई, जब एक मामले में याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि वह कुछ बहुत ही अच्छे वकीलों को जानते थे, जो उच्च न्यायालयों में जज नहीं बनना चाहते, क्योंकि वहां रिटायरमेंट की उम्र 62 साल थी। जज एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम पीठ ने करते हुए कहा कि आप क्या कह रहे हैं? उनकी सोच में कुछ गड़बड़ है, वे जज नहीं बनना चाहते और आप उन्हें बेहतरीन वकील कहते हैं!

आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी, जिसमें उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की रिटायमेंट की उम्र 62 साल से बढ़ाकर 65 साल करने के लिए केंद्र सरकार को उचित निर्देश देने की मांग की गई थी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जज 65 साल पर रिटायर होते हैं। उपाध्याय ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि चूंकि हाई कोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट की तरह संवैधानिक कोर्ट है, इसलिए उनकी रिटायरमेंट की उम्र में भी एकरूपता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दोनों संवैधानिक अदालतें हैं और रिकॉर्ड की अदालतें भी हैं। सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाईकोर्ट भी मौलिक अधिकारों का रक्षक है। दोनों अदालतों के न्यायाधीश भी समान पद की शपथ लेते हैं। ऐसे में, हाई कोर्ट के जजों को जल्दी रिटायर क्यों होना चाहिए? वहां भी एकरूपता होनी चाहिए।

पीठ ने उपाध्याय से पूछा कि क्या उन्होंने हाई कोर्ट के न्यायाधीशों से सलाह ली है कि क्या वे 62 के बजाय 65 साल पर रिटायर होना चाहते हैं? साथ ही पीठ ने यह भी कहा, क्या आपने उनसे पूछा है? आप कैसे चिंतित हैं? आप रिटायमेंट की उम्र क्यों बढ़ाना चाहते हैं? वकील ने जवाब दिया कि रिटायमेंट की उम्र में अंतर होना तर्कहीन प्रतीत होता है लेकिन अदालत इससे सहमत नहीं है। पीठ ने इस पर टिप्पणी की है कि यह कैसे तर्कहीन है? संविधान में एक प्रावधान है जिसने रिटायरमेंट की उम्र निर्धारित की है। इसका कोई कारण होना चाहिए। आप यह नहीं कह सकते कि यह तर्कहीन है।

उपाध्याय ने भारत के विधि आयोग के साथ एक प्रतिनिधित्व के रूप में अपनी याचिका को स्थानांतरित करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस लेने की मांग की। हालांकि, अदालत ने इस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि आपने विधि आयोग में रिक्ति को भरने और इसे कार्यात्मक बनाने के लिए इस अदालत में याचिका दायर की है। एक बार जब आप उस याचिका में सफल हो जाते हैं, तो आप लॉ कमीशन के पास जा सकते हैं।

उपाध्याय की जनहित याचिका में कहा गया था कि सेवानिवृत्ति की उम्र में एकरूपता न केवल मामलों की पेंडेंसी को कम करने के लिए आवश्यक है, बल्कि बेंच में सर्वश्रेष्ठ कानूनी प्रतिभा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। जनहित याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के बीच अधीनता की आशंका को कम करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के साथ हाइ कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु को बराबर करना उचित था।