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एयर इंडिया के प्रबंधक ने संघर्षपूर्ण पलायन की कहानी साझा की

एयर इंडिया के प्रबंधक ने संघर्षपूर्ण पलायन की कहानी साझा की

नयी दिल्ली।  काबुल में भारतीय दूतावास के अधिकारियों के एक समूह को लंबा कुर्ता पहने एक तालिबानी ने कहा, “ हवाई अड्डे के लिए पांच मिनट में सामान समेट लें । हम आप सभी को सुरक्षित निकालेंगे। ”

सोलह अगस्त को अपने बचाव के लिए सांस रोक कर इंतजार कर रहे सभी लोगों के लिए यह पर्याप्त समय था। बिना सामान या न्यूनतम सामान के अधिकारियों ने कठिन वक्त समाप्त होने की उम्मीद में राहत की सांस ली। चौबीस कारों में सभी भारतीय अधिकारी एक तालिबानी वाहन की सुरक्षा देख रेख के साथ हवाई अड्डे के लिए निकल पड़े।

काबुल में तैनात एयर इंडिया के प्रबंधक सुदीप्तो मंडल ने फोन पर  साथ अपने लगभग 36 घंटे के दु:खद अनुभव को साझा किया। वह काबुल से अपने पलायन को लेकर खुद को भाग्यशाली मानते हैं क्योंकि यह सिर्फ एक भारतीय दूतावास की कार के लिए नहीं था जिसे उन्होंने हवाई अड्डे पर संयोग से देखा था।उन्होंने कहा कि वह कल्पना नहीं कर सकते कि क्या हुआ होता अगर वह कार नहीं दिखाई देती।

बढ़ती अराजकता के बीच 15 अगस्त को काबुल से आखिरी उड़ान देखने के बाद श्री मंडल हवाई अड्डे की इमारत में लौट आए और अपने स्थानीय ड्राइवर को खुद को ले जाने के लिए बुलाया। लेकिन ड्राइवर ने अवरुद्ध सड़कों और शहर में तनावपूर्ण माहौल का हवाला देते हुए आने में असमर्थता व्यक्त की। इससे श्री मंडल स्तब्ध रह गए क्योंकि उनके दिमाग में अनिश्चितता का बादल छा गया था।

किस्मत से उन्हें हवाई अड्डे पर एक भारतीय दूतावास की कार मिली जो एक अधिकारी को लेने आयी थी। वह अपने भाग्य को धन्यवाद देते हुए तुरंत बाहर आ गए । वह ड्यूटी पर तैनात एक दूतावास के अधिकारी के साथ भारतीय दूतावास आ गए , जहां एक और आश्चर्य उनका इंतजार कर रहा था। कई तालिबानी अपने लंबे कुर्ते में दूतावास में बैठे थे। अब तक श्री मंडल को एहसास हो गया था कि बचना आसान नहीं होगा।

“हम आपको नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। आप वापस क्यों जा रहे हो? हम आपकी रक्षा करेंगे, ”श्री मंडल के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था जब एक तालिबानी व्यक्ति ने यह कहा। यह उनके लिए थोड़ी राहत की बात थी लेकिन अंदर ही अंदर दहशत गहरा गयी।

जैसे-जैसे रात होती गई वैसे-वैसे  मंडल की बेचैनी भी बढ़ती गई। अगले दिन 16 अगस्त को उन्हें और दूतावास के अन्य अधिकारियों को तालिबानियों ने बताया गया कि उन्हें हवाई अड्डे तक ले जाया जाएगा। लेकिन तालिबानियों के किसी भी अगली सूचना के बिना कई घंटे बीत गए। अंत में आधी रात के आसपास, तालिबानियों ने  मंडल और अन्य दूतावास के अधिकारियों से कहा कि वे हवाई अड्डे की ओर जा रहे और पांच मिनट में अपना सामान समेट लें।

हर कोई इस सटीक क्षण की प्रतीक्षा कर रहा था और वह क्षण आते ही सभी कारों की ओर दौड़ पड़े। चौबीस कारों में अधिकारियों के साथ एक तालिबानी वाहन भी था। दूतावास से हवाई अड्डे तक का 7-8 किलोमीटर का सफर लग रहा था कि जैसे खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। हवाई अड्डे के रक्षा क्षेत्र तक पहुँचने में लगभग चार घंटे लग गए क्योंकि तालिबानियों द्वारा जाँच के लिए कारों को कई बार रोका गया था।

 मंडल के पास बदलने के लिए कपड़े, भोजन, पानी तक नहीं था, लेकिन उन्हें कोई शिकायत नहीं थी। वह अमेरिकी और तुर्की सुरक्षाकर्मियों द्वारा संचालित रक्षा क्षेत्र में पहुंच गए थे और एक सी -17 भारतीय वायु सेना का विमान सभी को वापस मातृभूमि में ले जाने की प्रतीक्षा कर रहा था।

 मंडल हालांकि दर्दनाक अनुभव के बावजूद नागरिक उड़ानों की अनुमति दिए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि जब एयर इंडिया का परिचालन शुरू हो तो वह काबुल वापस जा सकें। वह 2019 से काबुल में पदस्थ है। उन्हें काबुल से भारतीयों और अफगानियों के फोन आते रहते हैं कि 'उड़ान कब शुरू होगी?'