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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -ढाई नहीं तीन साल

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -ढाई नहीं तीन साल

- सुभाष मिश्र

ये ढाई-ढाई साल की नहीं पांच साल चलने वाली सरकार है जिसने आज अपने तीन साल पूरे किये हैं। जो लोग भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार को ढाई-ढाई साल की सरकार बताकर, बॉडी लैंग्वेज पढ़कर यह दावा कर रहे थे, वे खामोशी से तीन साल की उपलब्धियों का नजारा देख रहे हैं। जो इसे गोबर की सरकार बता रहे थे, अब वे लोग गोबर से पेंट, बिजली बनाने की जुगत में लगे हैं।

पेशे से किसान, जुझारू तेवर वाले और ग्रामीण जनजीवन में रचे बसे भूपेश बघेल विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी अपने धैर्य को बनाये रखकर ऐसे निर्णय लेते हैं जो उनकी दूरगामी सोच को बतलाती हैं। महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानने वाले भूपेश बघेल की सरकार गांधीजी के ग्राम स्वराज की अवधारणा को नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी योजना के जरिये जमीन पर उतारते हैं। अपनी सरकार बनने के चौबीस घंटे के भीतर ही किसानों की कर्ज माफी करने वाले भूपेश बघेल एक के बाद एक ऐसे फैसले लेते हैं जिससे यहां के छत्तीसढिय़ा स्वाभिमान में चार चांद लग जाते है।

धान के रास्ते समृद्धि की तलाश करते हुए भूपेश बघेल एक और दुस्साहस का परिचय देते है। वे लगातार किसानों से समर्थन मूल्य से ज्यादा का भुगतान करते हुए धान के साथ बोरे तक खरीद रहे हैं। यदि केन्द्र सरकार का यही अडियल रवैया रहा तो आने वाले समय में खरीदा गया धान सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है पर भूपेश बघेल स्वभावगत ये चुनौती ले रहे हैं।

विपक्ष में रहते हुए उनके विरूध्द झूठे प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने पर सपरिवार आर्थिक अपराध ब्यूरो के आफिस में अपनी गिरफ्तारी देने की बात हो या हाईकमान को दिल्ली में जाकर विधायकों की संख्या बल के रूप में अपना समर्थन दिखाना हो, भूपेश बघेल कहीं भी पीछे नहीं हटते।
भूपेश बघेल में एक किसान बसता है जिसके लिए बारह मास एक से होते हैं। किसान की तरह अपनी सत्तारूपी खेत की 24 घंटे रखवाली करने वाले भूपेश बघेल ने तीन साल में कांग्रेस विधायक और संगठन के रूप में अपना रकबा बढ़ाया है। कोरोना जैसी आपदा में भी छत्तीसगढ़ को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रखने वाले भूपेश बघेल ने गढ़बो नया छत्तीसगढ़ का नारा देकर यहां के जन-जन के मन में एक नई उर्जा और उत्साह का संचार किया है।

छत्तीसगढ़ अब देश के ऐसे राज्यों में शुमार हो चुका है जिसकी सार्वजनिक वितरण प्रणाली हो या गोधन न्याय योजना या स्वच्छता अभियान जिसे देखने के लिए बाहर से लोग आने लगे हैं। छत्तीसगढ़ का अपना विकास का ढांचा और जनभागीदारी बाकी राज्यों के लिए प्रेरणास्पद है। छत्तीसगढिय़ा अस्मिता के साथ अपने जमीन से जुड़ाव की वजह से पूरे प्रदेश में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। सुराजी गांव योजना के नाम से नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी को छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी के रुप में लागू करके ग्रामीण क्षेत्र में विकास की नई अवधारणा को जन्म दिया गया है।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर 21 मई 2020 से नरवा यानि बरसाती नाले का संरक्षण कर कृषि और उससे संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। गरुवा के जरिए पशुधन का संरक्षण-संवर्धन किया जा रहा है। घुरवा के नाम से कृषि और जैविक अपशिष्टों से जैविक खाद का निर्माण किया जा रहा है। बारी योजना से पारंपरिक घरेलू बाडिय़ों में सब्जियों और फल-फूल के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुआत छत्तीसगढ़ के 18 लाख 38 हजार किसानों को चार किश्तों में 5628 करोड़ रुपये की राशि प्रदान करके छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गतिशीलता प्रदान की गई है। छत्तीसगढ़ देश का ऐसा पहला राज्य है जिसने गौमाता को कथित रुप से पूजने और दंगो के दायरे से बाहर लाकर गौवंश के पालन को प्रोत्साहित करने, फसलों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जैविक खाद उत्पादन के साथ जोड़ा है। यहां गाय पूजने के साथ-साथ आर्थिक समृघ्दि के काम आती है। गोधन न्याय योजना के जरिये लोगों और पशुपालकों को गोबर विक्रय से अतिरिक्त लाभ दिलाने की अनूठी योजना प्रारंभ की। छत्तीसगढ़ में मनाए जाने वाली हरेली के त्यौहार से 20 जुलाई 2020 से यह योजना शुरु की गई। गोधन न्याय योजना से करीब पौने दो लाख पशुपालकों से 114 करोड़ रुपये का गोबर खरीदा जा चुका है। 80 हजार महिलाओं को आजीविका मिली है।

छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है जिसे गांधी जयंती 2 अक्टूबर 2021 से गौठानों में गोबर से बिजली उत्पादन की नई पहल प्रारंभ की है। छत्तीसगढ़ में गोबर से पेंट, चप्पल, दीपावली के दीये आदि बन रहे हैं। यहां के अलग-अलग क्षेत्रों के 75 गोठान में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की शुरुआत हुई है। गोठानों में गोबर से कार्बीक्सी मिथाईल सेल्युलोज निर्माण की इकाई स्थापित की जा रही है। एक ओर जहां भूपेश बघेल की सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का काम किया है वहीं प्रदेशवासियों की सेहत और नौनिहालों की शिक्षा-दीक्षा पर विशेष ध्यान दिया है। छत्तीसगढ़ के 65 लाख परिवारों को डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना के दायरे में लाकर उन्हें इलाज की सुरक्षा प्रदान की गई है। 56 लाख से अधिक गरीबी रेखा के नीचे जीने वाले परिवारों को 5 लाख रुपए तक की इलाज की सुविधा दी गई है। वहीं सामान्य श्रेणी के 9 लाख परिवारों को 50 हजार रुपए तक के इलाज की सुविधा दी गई है। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों, दुर्गम जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना के जरिए ऐसे लोगों के जान माल की सुरक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण, दवा वितरण किया जा रहा है जो अस्पताल तक पहुंच सकते। दाई-दीदी क्लिनिक योजना के जरिए गली-मोहल्लों में पहुंचकर महिला और किशोरियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। लोगों को सस्ती दवाएं मिले इसके लिए श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर प्रारंभ कर सौ से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी समस्या समझी जाने वाली नक्सल समस्या से भी बड़ी समस्या कुपोषण को मानकर इसे दूर करने का संकल्प लेने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गांधी जयंती दो अक्टूबर 2019 से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरुआत कर बच्चों और महिलाओं को गर्म और पके हुए पौष्टिक आहार के साथ अतिरिक्त आहार नि:शुल्क देने पहल की है। इस योजना के बेहतर परिणाम भी आने शुरु हो गए हैं। अभी तक राज्य के 1 लाख 40 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं।

चुनावी घोषणा पत्र में जिन वादों को भूपेश बघेल की सरकार ने किया था उनमें से एक बड़ा वादा बिजली बिल हाफ योजना भी थी। छत्तीसगढ़ में 1 मार्च 2019 से घरेलू बिजली बिल में प्रतिमाह की गई खपत पर 400 यूनिट तक बिजली बिल पर आधे बिल की राशि की छूट है। इस योजना से छत्तीसगढ़ के 40 लाख उपभोक्ताओं को सीधे लाभ हो रहा है।

छत्तीसगढ़ की 32 प्रतिशत से अधिक आबादी जो आदिवासी है और जिनमें से अधिकांश आबादी वन क्षेत्रों में निवास करती है, ऐसी आबादी के बड़े वर्ग को जिनकी संख्या 445573 है, व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र वितरित किये गये हैं ताकि वे काबिज जमीन पर मालिकाना हक के साथ रह सके।
मां कौशल्या के मायके यानि छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पर्यटन परिपथ का निर्माण किया जा रहा है। राज्य के 75 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया गया है जहां से भगवान राम के वनगमन की कहानी प्रचलित है। कहा जाता है कि भगवान ने अपने 14 साल के वनवास में ज्यादा समय दंडकारण्य में बिताया था। छत्तीसगढ़ भगवान राम को अपना भंाजा मानता है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में भांजे के पैर पूजने की परंपरा है।

बाजार, तकनीक और नये तरह के ज्ञान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की दृष्टि से बच्चे के बेहतर भविष्य को लेकर छत्तीसगढ़ में स्वामी आत्मानंद के नाम से शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना के प्रति अभिभावकों का जबर्दस्त रुझान है। अभी तक छत्तीसगढ़ के 172 स्थानों पर सर्व सुविधायुक्त स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले जा चुके हैं। स्वामी आत्मानंद विद्यालय में एक लाख से अधिक गरीब बच्चे नि:शुल्क रुप से अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं।

कोरोना की विपरित परिस्थिति में जहां कई देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, वहीं छत्तीसगढ़ ने इस काल में भी विकास के नए आयाम बनाए। इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा सबने की है। आज राजीव गांधी न्याय योजना और गोधन न्याय योजना की बदौलत ग्रामीण इलाकों में आर्थिक स्थिति बेहतर बनी रही, इसी का नतीजा था कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में प्रदेश ने देशभर में सबसे बेहतर ग्रोथ हासिल की है। इस तरह अपने कुशल प्रबंधन और जमीनी जुड़ाव और समझ के चलते भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ को विकास की नई राह पर आगे बढ़ा रहे हैं।

प्रसंगवश यह शेर याद आता है -
तेवर तो हम वक्त आने पर ही बताएंगे
शहर आप खरीदोगे लेकिन हुकूमत हम चलाएंगे।