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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-ये मुलाकात एक बहाना है

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-ये मुलाकात एक बहाना है

हिन्दी सिनेमा में एक मशहूर गाना है- 'ये मुलाकात तो एक बहाना है, प्यार का सिलसिला पुराना है।Ó दरअसल छत्तीसगढ़ में इन दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भेंट-मुलाकात के नाम से सघन दौरा करके गांव-गांव तक पहुंच रहे हैं। गांव में पहुंचकर सरकारी व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण कर दोषी अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ जहां एक ओर कड़ी कार्यवाही कर रहे हैं, वहीं लोगों की शिकायत सुनकर उन्हें यथासंभव मौके पर मदद भी कर रहे हैं। कुछ लोगों को मुख्यमंत्री की भेंट मुलाकात का पूरा कार्यक्रम स्क्रिप्टेड लग रही है, जबकि यह एक तरह से जनता से सीधा-संवाद का माध्यम है। चूंकि यह कार्यक्रम घोषित है इसलिए अधिकारी अपनी ओर से अच्छे दिन का सपना दिखाने में सारी व्यवस्था चाक-चौबंध है, यह बताने में लगे हुए हैं। किन्तु सच किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाता है। ऐसा नहीं है कि भूपेश बघेल ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जो इस तरह से सघन दौरा कर रहे हैं। सरकार किसी की भी रही हो प्रशासन गांव की ओर, तो कभी आपकी सरकार आपके द्वार, ग्राम सुराज अभियान जैसे बहुत से नामों के साथ शासन-प्रशासन ने गांव में पहुंचने की कोशिश की है। यह एक तरह से सरकारी मशीनरी को गेयरअप करने की कवायद है। प्रशासन का भय नीचे स्तर तक बना रहे और दूरस्थ अंचल में बड़े नागरिकों को भी लगे कि उनकी खोज-खबर लेनी वाली सरकार है। दरअसल, इस देश के आदमी को ना तो एलोपैथी की जरुरत है ना ही होम्योपैथी की उसे सैम्पैथी की जरुरत है, जिसका नितांत अभाव सरकारी मशीनरी में देखा जाता है। सरकारी अमला जनता की छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर घनघोर असंवेदनशील होता जा रहा है।

वैसे जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं सरकारें जन्ममुखी होती जाती है। जो नेता पांच साल तक जनता के दुख-दर्द को पूछने को नहीं जाते वे चुनाव आते ही जनता को गले लगाने पर आमादा दिखाई देते हैं। इधर नेताओं का काम सोशल मीडिया और इन्वेस्ट कंपनी ने आसान कर दिया है। अब नेता लाउडस्पीकर की राजनीति पर उतर आये हैं। बहुत सी राजनीतिक पार्टियों और उनसे जुड़े नेता जनता को मूल मुद्दों से भटकाकर हनुमान चालीसा पढ़वाने में लगे हैं। बचपन से सुनते पढ़ते आ रहे हैं कि-
भूत पिशाच निकट नहिं आवै
महावीर जब नाम सुनावै।।

अब महावीर के नाम पर डराने-धमकाने की कोशिश चहुंओर हो रही है। ऐसे समय यदि कोई जमीनी नेता जनता के दुख-दर्द पूछने भरी दोपहर में गांव-गांव पहुंच रहा है तो उसे लेकर तरह-तरह के सवाल करना बेमानी है।


भूपेश बघेल जमीनी नेता हैं। वे जनता की नब्ज, उसकी समस्या, जरूरतों को बखूबी समझते हैं। वे हवा-हवाई नेता नहीं है जो चुनाव आने की प्रतीक्षा करें। हमेशा जल, जंगल, जमीन की चिंता करके आम आदमी को कैसे राहत मिले, यह प्रयास उनकी ओर से रहता है। यही कारण है कि राहुल गांधी जैसे कांग्रेस के शीर्ष नेता भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तारीफ़ करते नहीं थकते। इसका ताज़ा उदहारण हमें अभी तेलंगाना में देखने को मिला जहां राहुल गाँधी ने भरे मंच से कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है। चुनाव में किसानों ने हमें कहा कि उन्हें कर्जमाफी की जरूरत है। धान की कीमत 2500 रु. होनी चहिये। हमारे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनकी आवाज सुनी आज आप वहां जाकर पूछिये कि धान के लिए क्या दाम मिलता है। पूरे छत्तीसगढ़ के किसान आपको बतायेंगे कि उन्हें 2500 रुपया मिलता है। हमने 2 बड़े वादे किये थे पहला वादा था कि छत्तीसगढ़ के किसानों का हम कर्ज माफ़ करेंगे और दूसरा वादा था कि धान को हम 2500 रूपये में खरीदेंगे। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद ये दोनों वादे पूरे हुए।

बहरहाल, अभी भूपेश बघेल को लेकर इंटरनेट पर मिम्स भी बनाये जा रहे हैं जिसमें उन्हें नायक फिल्म के अनिल कपूर की तरह ऑन द स्पॉट फैसला लेने वाला मुख्यमंत्री बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री बघेल जब बलरामपुर जिले के सामरी विधानसभा क्षेत्र के कुसमी में वहां के लोगों से भेंट-मुलाकात करने पहुँचते हैं तब एक महिला गरीबी रेखा सूची से नाम काट देने की शिकायत करती है और बताती है कि उनके पास राशन कार्ड भी नहीं है। महिला की शिकायत पर सीएम तत्काल कुसमी नगर पंचायत के सीएमओ को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर देते हैं और दोषी अधिकारी के खिलाफ़ 15 मिनट के अंदर सस्पेंशन आदेश भी जारी हो जाता है। वैसे ही सीएम बघेल का काफिला जब रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र के सनावल में भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के लिये पहुँचता है तो वहां जनता की शिकायत पर जल संसाधन विभाग के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर उमाशंकर राव को निलंबित कर दिया जाता है। वहीं जब स्थानीय ग्रामीण अपने मुख्यमंत्री से कनहर अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना प्रभावितों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने और व्यवस्थापन नहीं होने की शिकायत करते हैं तो मुख्यमंत्री नाराजगी जताते हुए ये भी कहते हैं कि महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना में जमीन देने वाले किसानों के हितों की रक्षा उनके लिये सर्वोपरि है। इस काम में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वो कहते है कि राज्य शासन की तरफ से काफी पहले मुआवजे की राशि जारी कर दी गई है, लेकिन अभी तक किसानों को मुआवजे की राशि नहीं मिली है। सीएम बघेल मंच से ही मुख्य सचिव को निर्देश देते हंै कि दो माह के भीतर सभी किसानों को मुआवजे की राशि मिल जानी चाहिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जल संसाधन विभाग ने कार्यपालन अभियंता के निलंबन का आदेश भी जारी कर दिया जाता है। वैसे ही अपनी प्रदेश की जनता की शिकायत पर सीएम बघेल रघुनाथनगर की चौपाल में तत्काल पटवारी पन्नेलाल सोनवानी को निलंबित करने का फरमान सुनाते हैं।
यही नहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जनता को विकास कार्यों की सौगात भी अपने इस कार्यक्रम के तहत देने से नहीं चूक रहे हैं। भटगांव विधानसभा क्षेत्र के कुदरगढ़ पहुंचने पर सीएम बघेल चौपाल में ही जनता को करोड़ो रूपये के विकास कार्यों की सौगात देते हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कुदरगढ़ में शीघ्र रोप वे की सुविधा और विश्रामगृह के निर्माण के साथ ही उपस्वास्थ्य केंद्र और पुलिस चौकी भवन बनाये जाने की घोषणा भी करते हैं।

कुछ लोग मुख्यमंत्री के इस दौरे को पूर्व सीएम रमन सिंह द्वारा चलाये गये ग्राम सुराज अभियान से जोड़कर देख रहे हैं, मगर भूपेश बघेल का ये दौरा सही मायने में उस दौरे से थोड़ा अलग है, क्योंकि इस दौरे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल न सिर्फ जनता की समस्याएं सुन रहे हंै बल्कि लोगो के बीच उपस्थित होकर उन्हें ये परिचय करवा रहे हैं कि वो भी उन्ही की तरह जमीनी व्यक्ति है। और इस बात की बानगी रघुनाथपुर में देखने को मिली जहंा स्वामी आत्मानंद स्कूल के बच्चों के साथ सीएम बघेल भी बच्चे बन गए। उन्होंने बच्चों के साथ पारंपरिक खेलों में हाथ आजमाए। बघेल ने बच्चों के साथ गिल्ली-डंडा, पिट्टो और कंचे खेले। बघेल ने बच्चों से ही खेल के नियम-कायदे भी जाने। मुख्यमंत्री ने स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल के बच्चों से मुलाकात की और उनका उत्साहवर्धन किया। स्कूल की छात्राओं ने उन्हें अरपा पैरी के धार राजगीत गाकर भी सुनाया।
एक तरफ जहां आमजन मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर बेहद खुश है वहीं दूसरी तरफ शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों में एक भय भी है पता नहीं कब जनता किसकी शिकायत सीएम से कर दे और उन्हें सस्पेंड होना पड़ जाये। मगर सस्पेंशन कितने दिनों का होता है और मुख्यमंत्री के वापस रायपुर लौटने के बाद क्या व्यवस्थायें बदलेंगी, क्या ऐसे अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में बदलाव आएगा ये तो आने वाला समय ही बतायेगा।