स्टेट बैंक धमतरी में हुये 1 करोड 10 लाख की फर्जीवाडा में नया खुलासा

स्टेट बैंक धमतरी में हुये 1 करोड 10 लाख की फर्जीवाडा में नया खुलासा

संजय जैन

पीएचई विभाग के अधिकारी ने कहा पूरा मामला बैंक का, विभाग का कोई लेना देना नही

धमतरी। भारतीय स्टेट बैंक मुख्य शाखा रत्नाबांधा रोड से विगत दिनो फर्जी चेक के माध्यम से 1 करोड 10 लाख का फर्जीवाडा करने वाले आरोपी के खिलाफ अब तक संबंधित शाखा द्वारा पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज नही करायी गई है यहां तक की इस घटना की सूचना अब तक नही दी गई है। इस पुरे मामले को लेकर आज की जनधारा ने प्रमुखता से समाचार का प्रकाशन किया है। इसी कडी में प्रतिनिधि को जो जानकारी मिली है वह काफी चौकाने वाली है।  जिस चेक के माध्यम से 1 करोड 10 लाख रूपए का फर्जीवाड़ा किया है वह चेक पूर्व में किसी अन्य को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा दिया गया है वह भुगतान भी हो चुका है और इन्ही चेक के माध्यम से उक्त बैंक से किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा यह फर्जीवाडा किया गया है। 

वैसे तो स्टेट बैंक आफ इंडिया समुचे देश में विश्वसनीय बैंक के रूप में जाना जाता है। शासन के अधिकांश भुगतान इसी बैंक से होता रहा है। किसी भी ग्राहक द्वारा जरा सा त्रुटी किये जाने पर फौरन वह पकड में आ जाता है लेकिन 1 करोड 10 लाख रूपए का फर्जीवाडा किये जाने के समय कैसे बैंक के संबंधितो द्वारा सस्पेंस एकाउंट से कैसे इतनी बडी राशि का भुगतान कर दिया गया है यह समझ से परे है। बताया जाता है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा एक माह पूर्व चेक क्रमांक 476441 दिनांक 7/8/2020 को खादी ग्रामोद्योग के नाम पर 88128 रूपए का चेक काटा गया था दूसरा चेक क्रमांक 476442 दिनांक 13/8/2020 को 2643719 रूपए का घनश्याम अग्रवाल के नाम पर जारी किया गया था जिन्होने उक्त चेक का भुगतान भी प्राप्त कर लिये है इन्ही दोनो चेक नम्बर को डालकर फर्जीवाडा करने वाले व्यक्ति ने 58 लाख एवं 52 लाख कुल 1 करोड 10 लाख रूपए का हेरा फेरी कर दिया। हद तो यह है कि इतना बडा फर्जीवाडा बैंक में होने के बाद भी बैंक के संबंधित अधिकारियो द्वारा इसकी अब तक पुलिस रिपोर्ट नही की गई है जो कि संदिग्धता को प्रगट करता है। 

भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा 1 करोड 10 लाख रूपए की फर्जीवाडा होने की जानकारी को लेकर जब ब्रांच मैनेजर श्री राय से बातचीत की गई तो इनका कहना है कि मेरे क्षेत्र में मात्र बैंक का व्यवस्थापन है जो भी कार्यवाही करना होता है वह वरिष्ठ अधिकारी करते है। संभवत: इस मामले पर भी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्णय लिया जायेगा। उनसे यह पुछने पर इतनी बडी रकम का फर्जीवाडा हो चुका है और इसी बैंक से पूर्व में अगस्त माह में भुगतान भी संबंधितो ने प्राप्त कर लिया है दोबारा वही चेक नम्बर पर इतनी बडी राशि का भुगतान आने पर उसे जांच में न रखते हुए संस्पेस एकाउंट से कैसे उनके चेक को क्लीयरेंस कर दिया। इस पर उन्होने चुप्पी साध ली उनका सिर्फ यह कहना था कि हमने पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी है जो भी कार्यवाही या रिपोर्ट दर्ज होगा उनके द्वारा ही होगा। बातचीत उन्होने यह जरूर बताया कि उक्त फर्जीवाडा किसी के खाते से नही हुआ। जब प्रतिनिधि ने उनसे पुछा कि किसी के खाते से फर्जीवाडा हुआ या नही , चाहे आपके संस्पेस एकाउंट आपने भुगतान हो मामला फर्जीवाडा का तो है इस सवाल पर उन्होने चुप्पी साध ली। इधर 1 करोड 10 लाख रूपए के लोक स्वास्थ यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता एसआर सोनखुसरे ने बताया कि जिस बात को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मत्थे मढा जा रहा है दरअसल इस विभाग द्वारा खादी ग्रामोद्योग एवं राजनांदगांव के व्यक्ति को उपरोक्त चेक अगस्त माह में प्रदान किया गया था जिसका क्लीयरेंस भी हो गया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से इस लेन देन का कोई लेना देना नही है। इसकी सम्पूर्ण जवाबदारी बैंक की है और लोक स्वास्थ यांत्रिकी विभाग के मद से 1 करोड 10 लाख रूपए की हेरा फेरी नही की गई है। इस पूरे फर्जीवाडा पीएचई विभाग कोई लेना देना नही है। 

इधर भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से 1 करोड 10 लाख रूपए का फर्जीवाडा होने के संबंध में मुख्य ब्रांच के प्रबंधक से चर्चा कि इसके पश्चात बैंक के वरिष्ठ अधिकारियो से उपरोक्त के संदर्भ में जानकारी लेने दूरभाष पर अनेको बार सम्पर्क किया गया तो संबंधित अधिकारी ने मीटिंग में, दौरे में है ऐसा कहलवा दिया और जवाब देने से बचते रहे। इतने बडे बैंक से 1 करोड 10 लाख रूपए की हेरा फेरी होने को लेकर वरिष्ठ अधिकारियो से लेकर निचले क्रम के लोगो द्वारा कोई रूचि नही दिखाई जा रही है। जिससे ऐसा भी कयास लगाया जा रहा है कि पूरे  फर्जीवाडा को लेकर  बैंक के अधिकारी गंभीर नही है या तो किसी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि सुत्रो का कहना है कि यह काफी गंभीर मामला है। इस फर्जीवाडे की निष्पक्ष जांच करायी गर्ई तो इसमें बैंक के कुछ कर्मियों की भी शामिल होने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता। अब देखना यह है कि पूरे फर्जीवाडे केे एफआईआर कब तक कराते है।