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कोरोना की जानलेवा कहर से अस्पताल में मरीज तोड़ रहे दम, वेंटिलेटर खा रहे धूल

कोरोना की जानलेवा कहर से अस्पताल में मरीज तोड़ रहे दम, वेंटिलेटर खा रहे धूल

झांसी।  उत्तर प्रदेश के झांसी में एक ओर कोरोना की दूसरी लहर जानलेवा कहर बरपा रही है तो दूसरी ओर जिला अस्पताल में पहले दिन से ही वेंटिलेटरों की किल्लत बताकर मरीजों को चलता किया जा रहा है । इस बीच मंगलवार को इसी अस्पताल में लगभग 12 वेंटिलेटरों के यूं ही धूल फांकने का मामला प्रकाश में आया है।
जिला अस्पताल में वेंटिलेटर की किल्लत बताकर मरीजों को चलता करने की स्थिति में कई लोगों की जान चली गयी है और आज भी ऑक्सीजन की कमी के कारण यहां आये दो मरीजों की मौत हो गयी। इसके इतर जिला अस्पताल में 12 वेंटिलेटर यूं ही रखे हुए है मीडिया के लोगों को इसकी जानकारी होने पर पत्रकार धरने पर बैठे और इस मामले को उजागर किया। पत्रकारों ने इन वेंटिलेटरों की तस्वीरें और वीडियो भी वायरल किये जिसमें सभी वेंटिलेटर एकदम नये नजर आ रहे हैं।
अस्पताल के सीएमएस से जब पत्रकारों ने जानकारी चाही तो मना कर दिया गया। इस बीच किसी चिकित्सक का वकतव्य आया कि सभी खराब हैं। कमाल की बात तो यह है कि जब आज तक उन्हें उपयोग में ही नहीं लाया गया और सभी नए रखे हैं तो खराब कब हो गए। उन्हें खरीदा भी गया लेकिन किसी की जानकारी में भी नहीं रहे।
जब पत्रकार धरने पर बैठ गए तो आनन फानन में जिला अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल प्रशासन को पत्र लिखकर 7 वेंटिलेटर मेडिकल कॉलेज भिजवा दिए। यहां सवाल यह उठता है कि जब वेंटिलेटर खराब बताए जा रहे थे तो फिर क्या खराब वेंटिलेटर मेडिकल कॉलेज भिजवाए गए हैं ? उधर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आज ही करीब 50 वेंटिलेटर खरीदने पर भी चर्चा हुई थी।
झांसी मीडिया क्लब के तत्वावधान में अध्यक्ष मुकेश वर्मा व वरिष्ठ पत्रकार सुल्तान आब्दी, पत्रकार रानू साहू,इमरान खान, तोसिफ कुरैशी, मोहम्मद कलाम, प्रमेन्द्र सिंह, मनीष अली सहित कई पत्रकार धरने पर बैठे और उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द जिला अस्पताल में धूल खा रहे वेंटिलेटर जनहित में चालू किये जाए अगर यह चालू नहीं किए गए तो उनका यह धरना आंदोलन में प्रवर्तित हो जाएगा।
कुछ दिनों पूर्व जिलाधिकारी ने भी जनपद के कोविड अस्पताल और उनमें वेंटिलेटर की व्यवस्था की सूची जारी की थी, इसमें जिला अस्पताल में 4 वेंटिलेटर का जिक्र था। मतलब साफ है कि उन्हें भी जानकारी नहीं थी कि जिला अस्पताल में 12 वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं।
इस पूरी अव्यवस्था के बीच आज भी दो मरीजों ने जिला अस्पताल में वेंटिलेटर के अभाव में दम तोड़ दिया।
जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से बात की गई तो हमेशा की तरह उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें कुछ नहीं मालूम जो भी जानकारी चाहिए जिला अस्पताल के सीएमएस से बात करो।
जिला अस्पताल में जिस तरह की लापरवाही देखने को मिली है, इससे तो यह प्रतीत होता है कि उन्हें इस आपातकाल में प्रदेश के मुखिया के आदेशों की भी कोई चिंता नहीं है। मुख्यमंत्री योगी चाहते हैं कि किसी को अस्पताल से लौटाया न जाए और दूसरी ओर यहां का जिला अस्पताल किसी का इलाज करना ही नहीं चाहता।
इस पूरे मामले पर जब सांसद अनुराग शर्मा से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है जिलाधिकारी से भी बात हो गयी है। मैं पूरी तरह से व्यवस्थाओं में लगा हूं लेकिन अगर कोई जानकारी लेने पर झूठ बोल दे तो क्या करें हालांकि पूरे मामले पर कार्रवाई अवश्य की जायेगी।