II फंसे और छिपे का नया खेल II प्रधान संपादक सुभाष मिश्र आगाह कर रहे हैं कि हिन्दु—मुस्लिम वोट बैंक का खेल कोरोना महामारी से लड़ने में देश को कमजोर करेगा!

II फंसे और छिपे का नया खेल II प्रधान संपादक सुभाष मिश्र आगाह कर रहे हैं कि हिन्दु—मुस्लिम वोट बैंक का खेल कोरोना महामारी से लड़ने में देश को कमजोर करेगा!
  • सुभाष मिश्र


निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी समाज के जरिए देशभर में फैलेे संक्रमण को लेकर एक बार फिर हिन्दू—मुस्लिम का खेल खेलने की नापाक कोशिशेें जारी हो गई हैं। इस समय 'फंसे और छिपे' की नई शब्दावली सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही है। जो लोग लॉकआउट के बाद अपने घर नहीं जा पा रहे, उनको लेकर पूरी संवेदना के साथ 'फंसे' हुए शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं जो लोग मरकज में लॉकआउट के बाद रह गए थे, उन्हें छिपा हुआ बताया जा रहा है और इस आग में घी डालने का काम मौलाना शाद और उन जैसी कट्टरपंथी धार्मिक ताकतें कर रही हैं। इस समय जब पूरे देश को एकजुट होकर वैज्ञानिक तरीके से कोरोना संक्रमण को रोकना चाहिए तब मौलाना शाद जैसे लोग खुद फरार होकर पूरी बेशर्मी से बयानबाजी कर रहे हैं।


मौलाना शाद कह रहे हैं कि मौत से भागकर जाओगे कहां, मौत तो तुम्हारे आगे-आगे चल रही है, इसलिए जरा इस मौके पर अपनी अकल-समझ को जरा ठिकाने रखो। ऐसा ना हो कि महज डॉक्टरों की बातों में आकर नमाजें छोड़ो, मुलाकातें छोड़ो, मिलना-जुलना छोड़ो। 70 हजार फरिश्तों पर तुम क्यों नहीं यकीन रखते? साद कहते हैं कि ये खयाल बिलकुल बेकार खयाल है कि मस्जिद में जमा होने से बीमारी पैदा होगी। मस्जिद में आने से आदमी मर जाएगा तो इससे बेहतर मरने की जगह कोई और नहीं हो सकती। अब इन मौलाना को कौन समझाये कि मस्जिद में मरने से ना जन्नत मिलेगी, ना ही वहां की हूरें। बहुत से आतंकी संगठन, धर्मपरायण जनता अब खास करके कम पढ़े—लिखे युवाओं को जन्नत का सब्जबाग दिखाते हैं।

अभी तक निजामुद्दीन मरकज से 2361 लोगों के बाहर आने की जानकारी है। इनमें से बहुत सारे लोग पहले ही अलग—अलग राज्यों में जहां से वे आए थे, वापस जा चुके हैं। अकेले मुंबई में 442, केरल में 330 लोग मरकज से लौटते हुए पाए गए हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए 671 लोगों को अस्पतालों में भर्ती किया गया है। तबलीगी जमात और प्रशासन की लापरवाही के चलते आज सर्वाधिक 386 नए केस दर्ज हुए हैं। तमिलनाडु में ही जमात के 110 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। कोरोना संकट आया है और चला जाएगा, पर इस संकट के बीच में बहुत सारे लोग हमारे देश की सबसे पुरानी और खतरनाक बीमारी को फैलाने में बाज नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर तरह-तरह की पोस्ट के जरिए सांप्रदायिकता को फैलाने की पूरी कोशिश हो रही है।