breaking news New

भारत माता के सच्चे सपूत लौह पुरुष और आयरन लेडी इंदिरा गांधी को विनम्र श्रद्धांजलि, मरवाही के महारथियों को हार्दिक शुभकामनाएं

भारत माता के सच्चे सपूत लौह पुरुष और आयरन लेडी इंदिरा गांधी को  विनम्र श्रद्धांजलि, मरवाही के महारथियों को हार्दिक शुभकामनाएं

सक्ती।  भारत माता के सच्चे सपूत लौह पुरुष को जन्म दिन पर नमन  किया गया।  वही  दूसरी लौह महिला के रूप में चर्चित रही पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी की पुण्य तिथि के अवसर पर उन्हें याद किया गया।  बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें नमन किया। आज आजाद भारत के प्रथम गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल व भूतपूर्व प्रधान मंत्री आयरन लेडी इंदिरा गांधी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।  सरदार ने गांधी जी का मांन रखने के लिए प्रधान मंत्री के पद त्याग किया जबकि तत्कालीन अधिकतर प्रांतीय परिषद नेहरू के बजाय सरदार पटेल को देश के प्रथम प्रधान मंत्री के रूप में देखना चाहती थी। 

 वहीं इंदिरा ने एक बार पद मोह में पूरे देश को आपातकाल के दंश झेलने के लिए मजबूर कर दिया था।  कुल मिलाकर ताकतवर होना एक अलग हैसियत है पर ताकत का इस्तेमाल सरदार ने जिस प्रकार देश के पुनर्निर्माण व सशक्त भारत की रचना में कर खण्ड -खण्ड देशी रियासतों का विलीनीकरण कर इतिहास रच दिया पर वहीं इंदिरा ने अपनी फौलादी मंसूबों के जरिए अपने कुर्सी के खातिर देश के इतिहास को आपातकाल के नाम पर कलंकित कर दिया।  हम ताकतवर और शक्तिशाली बनें पर प्रतिपक्षियों के दमन के लिए ताकत का बेजा इस्तेमाल क्षणिक भय पैदा तो कर सकता है पर आपको स्थायी सम्मान नहीं दिला सकता। 

आज इतिहास फिर से अपने आपको दुहराते दिख रही है।  जो अजित जोगी अब इस दुनिया में नहीं रहे जब तक कांग्रेस में रहे एक आदिवासी के रूप में पहचाने जाते थे।  कांग्रेस में आदिवासियों के राष्ट्रीय प्रमुख के साथ ही आदिवासी सांसद, विधायक और यहां तक कि उन्हें छत्तीसगढ़ के प्रथम आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेस ने प्रचारित किया। आज उनके निधन के बाद उनके परिवार को कांग्रेस के द्वारा दबाव पूर्वक फर्जी आदिवासी करार देकर चुनाव मैदान से ही बाहर कर देना। एक प्रकार से प्रतिपक्षी दमन के नवीनतम उदाहरण है। 

 वर्तमान सरकार का यह कदम स्वयं के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। क्योंकि जोगी के जमीन पर छल पूर्वक जोगी परिवार को नेस्तनाबूद करने का दु:साहस क्षेत्रीय जनता के गले  उतरते नही  दिख रही है। हम यह नहीं कहते कि छोटे जोगी बहुत शरीफ हैं पर उनको किनारे करने का जो तरीका कांग्रेस ने ईजाद किया है वह आपातकाल के दमन का ही रूप प्रतीत होता है। खैर हर राजनीतिक रथ और उसके सारथी का अपना अलग अंदाज है कि चाहे युद्ध मे रथ को कैसे हाँके। पर यहां न तो पार्थ नजर आता है और न ही श्रीमान कृष्ण दिख रहे हैं केवल दुर्योधन, दु:शासन आदि के साथ दिल्ली की धृतराष्ट्र भी मौन ही दिखाई दे रहा है। कौरव पांडव भी पहचान में नहीं है पर तय है मरवाही के महाभारत के फैसले से छत्तीसगढ़ की राजनीतिक फिजां में भारी परिवर्तन सुनिश्चित लग रहा है। 

अंत में भारत के दोनों महान व्यकितत्व को पुन:विनम्र श्रद्धांजलि के साथ ही मरवाही के महारथियों को हार्दिक शुभकामनाएं।