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समाजहित में नशीले पदार्थों के सेवन पर अंकुश जरूरी

समाजहित में नशीले पदार्थों के सेवन पर अंकुश जरूरी

दीपक कुमार त्यागी

सम्पूर्ण विश्व में हमारे प्यारे देश भारत को सबसे युवा देश माना जाता है, भारत में जिन लोगों को युवा आयु वर्ग का माना जाता है उन लोगों की कुल जनसंख्या तकरीबन 67 प्रतीशत के आसपास है। देश के भविष्य इन होनहार युवाओं को नशे जैसे बेहद घातक व्यसनों से बचाकर रखना हमारी सरकार के साथ-साथ हम सभी आम व खास लोगों की भी नैतिक व सामुहिक जिम्मेदारी है। जिस तरह से देश में नशे के सौदागरों के द्वारा चोरीछिपे या मिलीभगत करके बेहद सुलभता के साथ युवा वर्ग के लोगों को नशे का जहरीला सामान हर जगह उपलब्ध करवाया जा रहा है, वह परिवार, समाज के साथ-साथ देश की युवा पीढ़ी के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। चिंताजनक बात यह है कि आज हमारे देश का युवा वर्ग जिन लोगों को अपना आदर्श मानता है उनमें से भी चंद लोग नशीले पदार्थों से जुडे मामलों में एनसीबी व पुलिस की पूछताछ के बाद जेल की हवा तक खा चुके हैं, जो स्थिति समाजिक व मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहतर नहीं है। जब से प्रसिद्ध अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या केस की जांच शुरू हुई, तो उस दौरान जांच एजेंसियों को मायानगरी मुम्बई की फिल्म इंडस्ट्री में चल रहे नशे के व्यापार व रोजमर्रा होने वाली खपत के बारे में कुछ ठोस जानकारी मिली, जिस पर पुलिस व एनसीबी ने लगातार अपनी कार्यवाही करनी शुरू कर रखी है और अब इस जांच का दायरा महीनों बाद भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है, एक के बाद एक नामचीन लोग पूछताछ के बाद सलाखों के पीछे जा रहे हैं। हाल ही में कामेडियन भारती सिंह व उनके पति हर्ष लिम्बचिया को गांजा सेवन करने व रखने के आरोप में एनसीबी ने गिरफ्तार किया था। जबकि आज स्थिति यह है कि देश का एक बहुत बड़ा युवा वर्ग फिल्मी सितारों को अपना आदर्श मानकर उनके आचरण का अक्षरशः अनुशरण करने का प्रयास करता है, जिसके चलते वो नशाखोरी का भी अनुशरण कर रहा है। इसलिए फिल्म इंडस्ट्री व समाज के विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त इस नशे की घातक लत पर जल्द से जल्द लगाम लगाने के लिए हमारे देश के सिस्टम को धरातल पर ठोस व सख्त कार्यवाही करनी होगी।

हमारे देश की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कृपा से मायानगरी स्थिति फिल्म इंडस्ट्री की नशाखोरी का मामला पिछले कुछ समय से देश में हर तरफ बेहद सुर्खियों में बना हुआ है, कुछ लोगों की वजह से फिल्मी दुनिया की बनी इस स्थिति को देखकर देश का भोलाभाला कानून पसंद आम-आदमी बहुत ज्यादा आश्चर्यचकित व चिंतित है। अभिनेता सुशांत सिंह केस में हत्या या आत्महत्या की गुत्थी सुलझाने निकली देश की बेहद प्रतिष्ठित जांच एजेंसियों ने अपनी जांच के दौरान इस मामले के तार नशा करने वालों से जोड़कर कुछ बड़े चहरों को उजागर करने का काम किया है। जिसके बाद से ही मायानगरी में एनसीबी की रडार पर देश के युवा वर्ग के बेहद चहेते कई नामचीन बॉलीवुड स्टार आ गए हैं। अपनी जांच के दौरान फिल्मी दुनिया के कुछ बड़े नामचीन चेहरों से एनसीबी पूछताछ तक कर चुकी है, उनमें दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुल प्रीत आदि जैसे दिग्गज मुख्य रूप से शामिल हैं। लेकिन इतने दिनों की जांच के बाद भी अभी तक हमारी जांच एजेंसियों को ड्रग्स या अन्य प्रकार नशे का कारोबार करने वालों के खिलाफ कोई ठोस बड़ी कार्यवाही करने में सफलता हासिल नहीं हो पायी है। अधिकांश लोगों का मानना है कि अभी तक केवल छुटभैया सप्लायर या नशा करने वाले चंद उपभोक्ताओं पर ही एनसीबी व पुलिस कार्यवाही का डंडा चल रहा है, नशे के बड़े-बड़े तस्कर धन्नासेठ व्यापारियों के खिलाफ अभी तक भी कोई कारगर ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। सूत्रों की माने तो अगर एनसीबी जांच की कार्यवाही का ईमानदारी से दायरा आगे बढ़ती है तो कई बड़े चेहरों से शराफत का नकाब हटना अभी बाकी है, उनसे पूछताछ होनी बाकी है उनका जेल की सलाखों के पीछे जाना बाकी है। 

मायानगरी के अलावा भी जिस तरह से देश के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों ने बड़ी संख्या में आज लोगों को अपनी गिरफ्त में लेकर, नशे की भयंकर स्थाई लत लगाकर अपने आगोश में ले लिया है, वह स्थिति हमारे सभ्य समाज व देश की प्रगति के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। देश में आज नशे की लत ने बहुत सारे लोगों की व उनके परिवारों की जिंदगियों को नरक बना दिया है। नशे की लत की वजह से आज घर परिवार तेजी से बिखर कर टूट रहे हैं, परिवारों की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल होकर चरमरा रही है, समाज में बहुत तेजी से अपराधों में बढोत्तरी हो रही है। अब हम लोगों को यह विचार करना होगा कि उम्रदराज हो चुके लोगों के साथ-साथ अन्य वर्गों के लोगों में लंबे समय से चले आ रहे नशे को छुड़ाने के बेहद मुश्किल कार्य को अंजाम कैसे दिया जाये, विशेषकर हम अपनी युवा पीढ़ी को नशे से कैसे बचाएं, इसके लिए हम सभी को सामुहिक प्रयास करना होगा।

 "युवा भारत में आज सरकार व समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि देश के बच्चों, युवाओं, व महिलाओं में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति पर किस प्रकार अंकुश लगाकर, उनको नशे की लत लगने से हर हाल में बचाना है, नशाखोरी पर लगाम लगाकर देश के भविष्य को नशा मुक्त रखकर के देशवासियों के जीवन को उज्जवल बनाना है।"

हालांकि इसके लिए समय-समय पर केन्द्र व प्रदेश सरकारों के द्वारा देश में जगह जगह ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ चलाया जाता रहता है, लेकिन देश में यह अभियान धरातल पर जब ही कामयाब हो पायेगा, जब हमारा सिस्टम नशीले पदार्थों की सरलता से उपलब्धता पर बेहद सख्ती के साथ अंकुश लगा सकें, वरना तो देश में छिपे बैठे नशे के बेहद ताकतवर सौदागर हम सबकी मेहनत पर यूं ही धडल्ले से पानी फेरकर अपनी तिजोरी भरते रहेंगे और नशा बेचकर आकूत दौलत कमाते रहेंगे।

कुछ दिनों पहले तक देश के न्यूज चैनलों की कृपा से आम आदमी के बीच मुंबई की माया नगरी में कलाकारों के बीच व्याप्त नशे की जबरदस्त चर्चा थी, उनके नशा करने के किस्से न्यूज चैनलों के द्वारा ऐसे चटकारे लेकर सुनाएं जा रहे थे, जैसे देश में नशा केवल ये चंद फिल्मी दुनिया के लोग ही करते हो। कुछ न्यूज चैनलों ने तो अपनी टीआरपी की खातिर लोगों की ऐसी मानसिकता कर दी है कि जैसे मुम्बई की फिल्मी दुनिया में कलाकारों के द्वारा अभिनय कम और नशा व आवारागर्दी ज्यादा की जाती है, फिल्मी दुनिया के बारे में इस प्रकार की धारणा बनाना सरासर गलत है। हालांकि इन न्यूज चैनलों में से कुछ अगर अपने गिरेबान में भी झांक कर देख ले तो उन सभी को समझ आ जायेगा कि उनके यहां भी नशे की क्या स्थिति है, आज नशीले पदार्थों के सेवन की गिरफ्त में माया नगरी मुम्बई या फिल्मी दुनिया ही नहीं बल्कि देश का एक बहुत बड़ा वर्ग आ चुका है। आज देश में छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवा यहां तक की बुजुर्ग व महिलाएं भी तरह तरह के नशे के आदी होकर नशे का गुलाम बन चुके हैं। दिखावे व बनावटी भरी दुनिया में नशा आज बहुत सारे लोगों के लिए तो स्टेटस सिबंल बनकर उनको हर तरह से खोखला कर रहा है और सिस्टम मूकदर्शक रहकर उनकी बर्बादी देख रहा है, यह स्थिति हमारे सभ्य समाज के लिए बेहतर नहीं है।

" लेकिन अफसोस यह कैसी विडंबना है कि प्रत्येक व्यक्ति को नशे के गंभीर परिणाम व उससे होने वाली जानलेवा बीमारियों का अच्छे से पता है, फिर भी वह स्वयं को घातक नशे का सेवन करने से नहीं रोक पाता है। वह नशा करके खुद की मौत को दावत देता है और अपने परिवार व आसपास के समाज की खुशियों को ग्रहण लगा देता है। मैं सभी नशा करने वालों से अनुरोध करता हूँ कि इस बुराई को समय रहते छोड़ दें क्योंकि यह उसके परिवार के हंसते-खेलते जीवन को बहुत जल्द बर्बाद कर देगी। किसी भी प्रकार के नशे की लत एक समय के पश्चात घर-परिवार, पैसा और ज़िंदगी सामाजिक स्टेटस सभी कुछ को बर्बाद करके व्यक्ति को ज़िंदगी मौत के दोराहे पर लाकर अकेला खड़ा कर देती है।"

आज चिंताजनक बात यह है कि हमारे समाज में पुरुषों के साथ नशा करने में महिलाएं भी उनका कंधा से कंधा मिलाकर साथ दे रही हैं। बड़ी तादाद में देश की महिलाएं भी नशे की गिरफ्त में बुरी तरह फंस चुकी हैं। जो स्थिति हमारी आनी वाली पीढियों के स्वास्थ्य के मद्देनजर बिल्कुल भी उचित नहीं है।

आकड़ों की बात करें तो छोटे बच्चे भी नशे की गिरफ्त में तेजी से आते जा रहे हैं वो विक्स, आयोडेक्स, खांसी की दवा, इनहेलर की दवाओं, नींद की दवाओं,  शूज पॉलिश, फेविकोल और पट्रोल आदि खाकर व सूंघकर नशा करते हैं। बच्चों के द्वारा इस तरह का किया जाने वाला नशा भविष्य में उनमें नशे की घातक लत को लगा देता है। जो एक समय के बाद हार्ड ड्रग्स जैसे कि हेरोइन और ब्राउन शुगर आदि तक लेने का कारण बनता है। सूत्रों के अनुसार आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पिछले कुछ वर्षों में जितने मरीज़ डॉक्टर के पास दिखाने आते उनमें से नब्बे फ़ीसदी को हेरोइन और ब्राउनशुगर की लत लगी होती है। यह ट्रेंड समाज के लिए बहुत ख़तरनाक है। कुछ वर्षों पहले तक ऐसा नहीं था, लोग नशे के लिए शराब पर अधिक निर्भर थे। देश में आज लोग विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, तस्करों व हमारे सिस्टम की मिलीभगत के चलते आज बेहद सुलभता के साथ ड्रग्स, भांग, कोकीन, अफीम, गांजा, हैरोईन, हशीश, ब्राउन शुगर, चरस, आदि बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। बहुत सारे केमिकल व दवाइयों के नशे लोगों के द्वारा किए जा रहे हैं। एनसीबी भी फिल्मी दुनिया के हाईप्रोफाइल मामले की जांच करने में बेहद व्यस्त है, आम आदमी का परिवार नशाखोरी से बहुत ज्यादा त्रस्त है।

वैसे एनसीबी व पुलिस के साथ-साथ नशे से लड़ने के लिए हम लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर पारिवारिक एवं सामाजिक सामूहिक संकल्प लेने की तत्काल आवश्यकता है। देश में सिर्फ सरकार या नशामुक्ति संस्थाएं केवल नशाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। नशे रोकने में सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारा सिस्टम व संस्थाएं सिर्फ नशे के दुश्परिणाम के बारे में लोगों को जागरूक करने पर जोर देते हैं, वो उसकी रोकथाम के लिए धरातल पर ठोस प्रयास सही से नहीं कर पाते हैं। वैसे भी जागरूकता सिर्फ समझदार या बड़ों को नशे की लत से दूर करती है, जबकि हमको रोकथाम बचपन से ही नशे की लत न लगे इसके लिए करनी है। देश में बढ़ती नशाखोरी के खिलाफ आज राष्ट्रीय स्तर पर जन चेतना आना बेहद जरूरी है। नशे पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकारों को भी राजस्व का लोभ छोड़कर शराब व भांग आदि को बढ़ावा देना बंद करना होगा, तब ही भविष्य में देश में बढ़ती नशाखोरी पर शिकंजा कसा जा सकता है।