breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - आप से चंडीगढ़ करे आशिकी

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - आप से चंडीगढ़ करे आशिकी

- सुभाष मिश्र

अभी हाल ही में एक फिल्म आई है चंडीगढ़ करे आशिकी! अब किसे मालूम था कि नगरीय चुनाव में चंडीगढ़ के लोग आप पार्टी से अपनी आशिकी का इजहार इस तरह करेंगे कि मछली की आंख पर निशाना लगाने के लिए उत्सुक बहुत से धनुर्धर तीर कमान उठाने में ही परास्त हो जायें। दरअसल पंजाब में तमाम तरह की उठापटक, सत्ता परिवर्तन और अमरिन्दर सिंह जैसे कांग्रेस के छत्रप से गलबहियां के बावजूद भाजपा को पंजाब की सत्ता व्हाया चंडीगढ़ हाथ आते नहीं दिख रही है। कांग्रेस में मची महाभारत में बहुत से धुरधंर कुरुक्षेत्र में अपने लोगों के हाथों घायल होकर कराह रहे है। अन्ना आंदोलन से जन्मे अरविंद केजरीवाल और उनके बहुत से उत्साही साथियों ने भारतीय राजनीति में जिस तरह की आमद दर्ज की है, उससे बहुत सारे राजनीतिक विश्लेषक हैरान हैं। सोशल मीडिया पर केजरीवाल को खुजलीवाल, खांसीवाल, मफलर वाला बताने वाले बहुत से लोगों को कहना पड़ रहा है कि आप से भी खूबसूरत आप के अंदाज है।

शिक्षा स्वास्थ्य और स्वच्छता को अपनी राजनीति का पहला एजेंडा बनाने वाले अरविंद केजरीवाल की पार्टी जिस तरह धीरे-धीरे दिल्ली के आसपास के राज्य और छोटे राज्यों में अपनी जड़े जमा रही है, वह जनता के बदलते मूड और विकल्प की तलाश को दर्शाती है। सबसे ताकतवर समझी जाने वाली केन्द्र की मोदी सरकार की नाक के नीचे दिल्ली में दो बार से अधिक अपनी जीत का परचम फहराने वाली आम आदमी पार्टी ने अपना वोट बैंक बढ़ाने और राष्ट्रीय पार्टी का रूतबा पाने के लिए जिस तरह की रणनीति बना रही है वह कछुवा और खरगोश की कहानी की याद दिलाती है।

जिस तरह आयुष्मान खुराना और वाणी कपूर की फिल्म चंडीगढ़ करे आशिकी का खुमार उतरने कानाम नहीं ले रहा है। वैसी ही खुमारी अब आम आदमी पार्टी को लेकर भी लोगों में दिख रही है। चंडीगढ़ करे आशिकी ने बाक्स आफिस पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए अब तक 18.86 करोड़ बटोर लिया है। इस फिल्म की कहानी आप पार्टी के अंदर-बाहर की कहानी की तरह है। लव रोमांस और ड्रामा से भरी हुई है। आप को कुमार को अब आप पर विश्वास नहीं है। मोदी फैक्टर और मीडिया हाईप के चलते बहुतों का विश्वास डगमगाया है। आंदोलनजीवी कहलाने वाली आप पार्टी ने अपने उदभव काल से लेकर अब तक बहुत से उतार-चढ़ाव देखे हैं। मोदी शैली में ही भाजपा को तू डाल-डाल मै पात -पात का खेल अब आप वाले एनजीओ, आंदोलनकारी अच्छी तरह से सीख गये हैं। अब वे केन्द्र से उस तरह नहीं टकरा रहे हैं जैसे शुरू-शुरू में टकरा रहे थे।

मसाला फिल्मों में होने वाले सभी तरह के दृश्यो की तरह ही अब आम आदमी पार्टी भी धर्म, जाति और तरह-तरह की रियायतों, मुक्त सामग्री वितरण का खेल सीख गई है। बीच जब हिंदी सिनेमा में जब भी कुछ ऐसा बनता है जिसका अंदाजा भी फिल्म बनाने वालों या फिल्म देखने वालों की मौजूदा पीढ़ी को नहीं होता तो ऐसे प्रगतिशील सिनेमा की तारीफ तो होती है लेकिन इसे देखने वाले कम होते हैं। फिर कुछ फिल्में जनता के धीमे-धीमे रिस्पॉन्स से सफल हो जाती है। जिस तरह से सिनेमा में एक सफल अभिनेता के रूप में आयुष्मान खुराना स्थापित हुए कुछ वैसे ही अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में अपनी जड़ें जमाई है।

पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में मिली जीत से आम आदमी पार्टी को बूस्टर डोज मिल गई है। 14 पार्षद सीटें जीतने में कामयाब रही है, लेकिन सबसे ज्यादा वोट कांग्रेस ने हासिल किए हैं। इस तरह से चंडीगढ़ निगम चुनाव के नतीजे कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के लिए सियासी तौर पर झटका है, क्योंकि चंडीगढ़ निगम पर ज्यादातर बीजेपी का ही कब्जा रहा है और शहरी वोटों पर उसकी पकड़ मानी जाती थी। पंजाब में बीजेपी का सियासी आधार शहरी वोटों के साथ-साथ हिंदू वोटर में रहा है। जो अब धीरे-धीरे खसक रहा है।

अकाली दल के साथ गठबंधन में रहते हुए बीजेपी शहरी और हिंदू बहुल सीटों पर ही किस्मत आजमाती रही हैं लेकिन, चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने बीजेपी को हिंदू बहुल सीटों पर सियासी मात देने में सफल रही है, उससे साफ है कि यह वोट बैंक भी अब खिसक रहा है।

कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के लड़की हूं लड़ सकती हूं, के तर्ज पर चंडीगढ़ में 40 प्रतिशत सीटें महिलाओं को दी थी। चंडीगढ़ में इस बार 13 महिलाएं जीतकर आई हैं। नगर निगम में महिलाओं के लिए 12 वार्ड आरक्षित हैं। निकाय चुनाव हमेशा स्थानीय मुद्दों पर होते हैं। चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव इसका कोई अपवाद नहीं है। मुफ्त सुविधाओं के आकर्षक वादों ने आम आदमी पार्टी अपने पहले ही प्रयास में बड़ी सफलता तो दिला दी है, लेकिन इसे जमी पर उतारना उतना आसान नहीं होगा। इस चुनाव नतीजों को भले ही हम स्थानीय चश्मे से देख रहे हों लेकिन इसका एक राष्ट्रीय संकेत भी ये है कि चंडीगढ़ जैसे महानगर से भाजपा को पहले ही प्रयास में पछाडऩा शहरी मतदाताओं को भाजपा का वोटबैंक माना जाता रहा है, ऐसे में दिल्ली के बाद चंडीगढ़ में विजय पताका फहराकर केजरीवाल ने जता दिया है कि आने वाले पंजाब चुनाव में उन्हें कमतर आंकनाबड़ी भूल साबित हो सकती है वे पूरी ताकत से ताल ठोकने जा रहे हैं।

केजरीवाल ने पंजाब की जनता से 6 वादे भी किए हैं, यह वादे हेल्थ सेक्टर से जुडे हुए हैं, जिनमें उन्होने मुफ्त इलाज और टेस्ट जैसी चीज़ों का जि़क्र किया है। उन्होंने कहा कि टेस्ट औरऑपरेशन मुफ्त होंगे और दवाइयां भी मुफ्त मिलेंगी। सभी सरकारी अस्पतालों को सही किया जाएगा जहां लोगों का प्राइवेट अस्पतालों की तरह इलाज किया मिलेगा। अगर कोई इंसान रोड एक्सीडेंट में घायल हो जाता है तो उसका खर्च सरकार उठाएगी, चाहे इलाज किसी भी महंगे हॉस्पिटल से हो। पंजाब के हर शख्स को एक हेल्थ कार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें उसकी सभी हेल्थ से जुड़ी जानकारी होगी, यानी उसे हर जगह अपनी रिपोर्ट्स लेकर घूमना नहीं पड़ेगा। पंजाब के हर इंसान को मुफ्त इलाज मिलेगा। पंजाब के हर पिंड में मोहल्ला क्लीनिक खोला जाएगा, यानी पिंड क्लीनिक खोला जाएगा। पूरे राज्य में लगभग 16 हज़ार पिंड क्लीनिक खुलेंगे।

चुनाव के साथ मतदाताओ के लिए बहुत से वादे भी आते है। हर राजनैतिक दल मतदाता को तरह-तरह के आश्वासन देकर धर्म जाति समुदाय के साथ-साथ बहुत से अप्रत्यक्ष भय भी दिखाने में भी पीछे नहीं रहते। ऐसे में आम आदमी पार्टी भी अपने दिल्ली मॉडल को लोगो के सामने लाकर वोट मांग रही है। ये तो आने वाला समय ही बतायेगा की चड़ीगढ़ में दिखाई गई आशिकी क्या रंग लाती है।

हम तो प्रसंगवश केवल मीर तकी मीर की तरह यही कहेंगें -
इब्तिदा ए-इश्क़ है रोता है क्या
आगे-आगे देखिए होता है क्या  
क़ाफि़ले में सुबह के इक शोर है
यानी ग़ाफि़ल हम चले सोता है क्या  
सब्ज़ होती ही नहीं ये सरज़मीं  
तुख़्म-ए-ख़्वाहिश दिल में तू बोता है क्या ।।