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एक कविता ने उड़ाये मोदी भक्तों के होश

एक कविता ने उड़ाये मोदी भक्तों के होश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कथित छवि को नुकसान पहुंचाने वाली , उनक खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने के लिए उनका आईटी सेल मैदान में तुरंत उतर आता  है। इत्तेफाकन अगर वह आवाज गुजरात से गुंजित हो जाए तो भक्तों की हालत देखने लायक हो जाती है। गुजराती कवियित्री पारुल खक्कड़ ने अपनी महज चौदह पंक्तियों से विश्व गुरु का सिंहासन डगमगा दिया है। फेसबुक पर लिखी गई उनकी कविता पर अट्ठाइस हजार गालियों भरे कमैंट्स आ चुके है। ये कमैंट्स किसने किये होंगे , इस पर ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है ।

कल तक पारुल जी को गुजरात में सिर्फ उनके लिखे भजनों की वजह से ही जाना जाता था ! अब उनकी कविता का कई भाषाओं में अनुवाद हो रहा है। उधर गुजरात में ही मौत के आंकड़ों में बेहिसाब मिलावट की खबर आने के बाद  गुजरात सरकार भी हरकत में आ गई है । चार हजार कोविड मौतों के सरकारी आंकड़ों के  सामने एक लाख तेईस हजार मृत्यु प्रमाण पत्र को नकारने के लिए मुख्यमंत्री की पूरी टीम सामने आ गई है। 

सच सामने आ रहा है। प्रायोजित प्रचार से अलंकृत मूर्ति में दरारे दिखने लगी है। पारुल खक्कड़ की कविता का हिंदी अनुवाद ह्यास शैख़ ने किया है। 


एक साथ सब मुर्दे बोले ‘सब कुछ चंगा-चंगा’

साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा


ख़त्म हुए शमशान तुम्हारे, ख़त्म काष्ठ की बोरी

थके हमारे कंधे सारे, आँखें रह गई कोरी

दर-दर जाकर यमदूत खेले

मौत का नाच बेढंगा

साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा


नित लगातार जलती चिताएँ

राहत माँगे पलभर

नित लगातार टूटे चूड़ियाँ

कुटती छाति घर घर

देख लपटों को फ़िडल बजाते वाह रे ‘बिल्ला-रंगा’

साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा


साहेब तुम्हारे दिव्य वस्त्र, दैदीप्य तुम्हारी ज्योति

काश असलियत लोग समझते, हो तुम पत्थर, ना मोती

हो हिम्मत तो आके बोलो

‘मेरा साहेब नंगा’

साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा