517 करोड़ खर्च करने के बाद मवेशियों का जीवन बदहाल, जर्जर हो रहे वेटरनरी सेंटर, चिकित्सक भी नहीं पहुँचते ड्यूटी पर, पशुपालन विभाग का हाल

517 करोड़ खर्च करने के बाद मवेशियों का जीवन बदहाल, जर्जर हो रहे वेटरनरी सेंटर, चिकित्सक भी नहीं पहुँचते ड्यूटी पर, पशुपालन विभाग का हाल
रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष पशुपालन व पशु चिकित्सा के लिए करोड़ों का बजट पास होता है जिसमे पशुओं और मवेशियों की सुरक्षा एवं कल्याण का जिम्मा होता है। हाल ही में मार्च 2019 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने बजट में पशु कल्याण के लिए घोषणा की जिसमें स्पष्टतौर पर बताया गया की राज्य में 12 नए पशु औषधालयों का निर्माण था 4 औषधालय का उन्नयन किया जाएगा।

इससे पहले वर्ष 2018 में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने पशुपालन मद में 517 करोड़ रुपए का बजट पास किया था। जिसमें पशुओं की सुरक्षा को लेकर 25 वेटरनरी डिस्पेंसरी का निर्माण शामिल था। मगर यह बजट केवल फाइलों तक सीमित रह गया। जिन औषधालय के विकास के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च की गई वहीं अगर जाकर देखेंगे तो राजधानी के पशु औषधालय जर्जर अवस्था मे दम तोड़ते दिख रहे हैं।

दस साल से बदहाली का जीवन
भाटागांव में बनें पशु औषधालय का निर्माण 2010 में किया गया था और अभी तक 10 वर्ष में केवल एक बार ही चिकित्सालय पर रंग-रोगन किया गया। साथ ही मुश्किल से कभी-कभार कोई पशु इलाज के लिये आ जाए तो चिकित्सक भी ड्यूटी से नदारद रहते हैं। 2018-19 बजट सत्र में केवल पशु चिकित्सा के लिए राज्य सरकार ने 169 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा था मगर इस रकम का कहां सदुपयोग हुआ ये आप औषधालय देखकर ही समझ सकते हैं।

रेस्क्यु वाहन का पता नहीं
पशुओं की सुरक्षा पर ध्यान देने के मकसद से 108 संजीवनी की तरह पशुओं को रेस्क्यु वाहन की सुविधा बीजेपी सरकार ने मुहैया कराई थी। जिसके अंतर्गत दुर्घटनाग्रस्त पशुओं का तत्काल इलाज किया जाना था। साथ ही उस समय कृषि मंत्री रहे बृजमोहन अग्रवाल ने पंडरी में 5 रेस्क्यु वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। मगर अब न तो उस रेस्क्यु वाहन का पता है और राजधानी के कई चौक-चौराहों पर मवेशियों की भीड़ लोगों को परेशानी का सबब बन जाती है।

गोठान का भी पता नहीं
राज्य सरकार पशुओं के लिए गोठान के निर्माण पर जोर दे रही है और गोठान के लिए सरकार प्रतिमाह 10 हजार रुपए अनुदान देने की बात कही है। मगर हाल ही बिलासपुर का मामला सामने आया था जिसमे 10 गोठनों के निर्माण में केवल 1 ही गौठान बनाया गया। इस तरह गोठान के नाम पर मुनाफाखोरी का व्यापार भी चल रहा है।

पशुओं के विकास के लिए सरकार द्वारा प्रयास किया जा रहा है। समय-समय पर योजनाओ को निकाला जाता है। जो औषधालय जर्जर अवस्था मे उनका मुआयना किया जाएगा और उनके संदर्भ में जांच होगी। डॉ सीआर प्रसन्ना, डायरेक्टर पशुधन विकास विभाग