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एक ऐसा व्यक्ति जो स्वयं कभी स्कूल नहीं गए लेकिन बच्चों के लिए बनवाएं स्कूल, राष्ट्रपति ने पद्मश्री पुरस्कार से किया सम्मानित

एक ऐसा व्यक्ति जो स्वयं कभी स्कूल नहीं गए लेकिन बच्चों के लिए बनवाएं स्कूल, राष्ट्रपति ने पद्मश्री पुरस्कार से किया सम्मानित

मंगलुरु।  कर्नाटक के मंगलुरु शहर के रहने वाले ऑरेंज वेंडर हरेकला हजब्बा को सोमवार को नई दिल्ली में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार  हरेकला हजब्बा को मंगलुरु के एक गांव न्यूपाडपु में स्कूल का निर्माण कर ग्रामीण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दिया गया है।  

आपको बता दें कि हजब्बा बहुत अर्से से संतरा बेचते आ रहे है और उन्होंने मूल शिक्षा भी प्राप्त नहीं की है, यहाँ तक वे कभी स्कूल भी नहीं गए है। इसलिए अपने गांव में शिक्षा में क्रांति लाने के लिए उन्होंने अपना मन बना लिया था। जब एक विदेशी ने हजब्बा से संतरे का भाव पूछा तो उन्होंने विदेशी से बात नहीं कर सका जिसका उन्हें बहुत बुरा लगा। हजब्बा को सिर्फ कन्नड़ भाषा समझ आती है, हिंदी और अंग्रेजी उसने कभी सीखी ही नहीं इसलिए उसने गांव में एक स्कूल बनाने का फैसला किया है। 


मगर दो दशक तक हजब्बा का सपना सिर्फ एक सपना ही रहा गया था, फिर वर्ष 2000 में उन्होंने अपने गांव के पूर्व विधायक यू.टी. फरीद से संपर्क बनाया जिन्होंने स्कूल के निर्माण का कार्य सैंक्शन किया। हजब्बा ने तब तक अपने पहिलांथ्रोपिक कार्यों से "अक्षरा सांता" की उपाधि प्राप्त की। 

पद्मश्री हासिल करने के बाद जब हजब्बा को पूछा गया की उसका अगला लक्ष्य क्या रहेगा तब उसने बताया की वह और भी स्कूल और कॉलेज अपने गांव में बनवाना चाहता है और मिले हुए पुरस्कार राशि से वह अपने गांव की ज़मीनें खरीदना चाहता है ताकि वह वहां बच्चों के लिए और भी कुछ बनवा सके। 

हजब्बा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी प्री- यूनिवर्सिटी कॉलेज बनवाने का अनुरोध किया है। हजब्बा ने जो स्कूल बनवाया है उसमें  28 छात्रों के साथ शुरू हुआ था और अब 175 छात्रों अध्ययन कर रहे है।