दर्जनों एनजीओ और सरकार, फिर भी भूखे पेट सोने मजबूर! लॉकडाउन में फंसे ग्रामीणों को नही मिला चार दिन से भोजन, खाद्य विभाग का नम्बर भी नही आ रहा काम,

दर्जनों एनजीओ और सरकार, फिर भी भूखे पेट सोने मजबूर! लॉकडाउन में फंसे ग्रामीणों को नही मिला चार दिन से भोजन, खाद्य विभाग का नम्बर भी नही आ रहा काम,

चमन प्रकाश केयर


रायपुर. एक तरफ कोरोना वायरस के चलते छत्तीसगढ़ में भी 14 अप्रैल तक लाकडाउन है, वहीं दूसरी ओर गरीब मजदूरों को दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. कई परिवार दो दिन से भूखे हैं. अव्यवस्था का आलम यह है कि लेकडाउन में भोजन पहुंचाने का दावा करने वाले दर्जनों एनजीओ, नगर निगम, सरकार का खाद्य विभाग तक मदद नही कर पा रहा.

लॉकडाउन के वक्त राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन मैनजमेंट के तहत भूखे गरीब मजदूरों के लिए भोजन, पानी, शेल्टर होम्स एवं गरीब मजदूरो के लिए राशन पहुँचाने की व्यवस्था खाद्य विभाग के द्वारा की है लेकिन वह परेशानी को कम नही कर पा रही है. नगर निगम सीमा से लगे हुए ग्रामीण क्षेत्र परसुलीडीह, सकरी, जोरा, फुंडहर, कचना में गरीब मजदूरों तक शासन की यह सुविधा नही मिलने से इन मजदूरों के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा हो गया है। दूरदराज ग्रामीण अंचलों से आये ये मजदूर घर जाना चाह रहे हैं लेकिन लॉकडाउन के चलते यहाँ से कहीं जा नहीं पा रहे हैं. फुंडहर में मजदूरी करने सौ किलोमीटर दूर चोरभट्टी से आये मोती राम महेश्वरी, नीरा महेश्वरी, रामाधार, पंचू, जगदीश सहित करीब तीस लोग अलग-अलग गाँवो से मजदूरी करने आये हैं.

इन मजदूरों ने बताया कि दो दिन पहले राज्य सरकार द्वारा जारी खाद्य सामाग्री वितरण हेल्प डेस्क नम्बर पर शिकायत रजिस्ट्रर्ड कराया गया लेकिन आज तीन दिन हो गये, शासन की तरफ से कोई भी व्यक्ति नहीं पहुँचा और न ही कोई सुध लेने आया। मजदूरों ने बताया कि कल दोपहर से सभी मजदूर भूखे रहने पर मजबूर हैं। वहीं परसुलिडीह के हाऊसिंग बोर्ड कालोनी में तेलासी, नवगांव, (खरोरा) खौली सहित कई अलग-अलग गाँवों से आये मजदुर सीता बांधे, दिव्या, लाला, जीतेन्द्र, संजू , अंजलि, शत्रुह, प्रमिला सहित करीब पच्चीस मजदुर लॉक डाउन में फंसे हुए हैं जिनके पास खाने के लिए राशन नहीं है। इन मजदूरों ने भी तीन दिनों पहले भोजन के लिए आग्रह किया था लेकिन आज चार दिन बाद भी भोजन नही मिल सका. शासन से मदद मांगी गयी तो जवाब मिला कि दो क्विंटल चावल दिया गया है, जाकर सरपंच से ले लें. ऐसा करके फोन काट दिया गया.

मजदूरों ने कहा कि फ़िलहाल आस पास के लोगों मांगकर जैसे तैसे काम चला रहे हैं. ग्राम पंचायत टेकारी के सरपंच खिलेंद्र वर्मा ने बताया कि परसुलिडीह कालोनी के समिति वाले आए थे और उन्होंने राशन की मांग की है. पंचायत के सचिव को भेजकर सर्वे कराकर राशन की व्यवस्था की जाएगी।  सड्डू बीएसयूपी कालोनी में ठेले लगाकर जीवन यापन करने वाली बुधयारीन और फुग्गे बेचने वाली संतोषी ने बताया कि छोटे—छोटे बच्चों के पेट भरने के लिए हर रोज सुबह 6 बजे से सड़कों पर मांगने के लिए दस किलोमीटर जयस्तंभ चौक तक जाते हैं तब कहीं जाकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पाता है.


सरपंचों ने राशन नही दिया तो वापस ले लेंगे : जी.आर. कोर्राम, डिप्टी डॉयरेक्टर

खाद्य विभाग के डिप्टी डॉयरेक्टर जी.आर. कोर्राम ने बताया कि ग्राम पंचायतों के सरपंचों को दो क्विंटल राशन जरूरतमंद लोगों के लिए दिया गया है जो भूखे एवं गरीब मजदूर हैं, उनके लिए सरपंच द्वारा राशन उपलब्ध कराया जायेगा। यदि सरपंच जरूरतमंद लोगोे को राशन देने कोताही बरतेंगे तो उनसे राशन सामाग्री वापस ले लिया जायेगा। रही बात निगम क्षेत्र की, यहाँ पर सभी गरीब मजदूरोे के लिए भोजन वितरण के लिए टीम लगी हुई है.