breaking news New

ध्रुव शुक्ल की कविताः आँगन का घर

ध्रुव शुक्ल की कविताः आँगन का घर


आँगन का घर

सरकता है धूप में

समय की छाया-सा

संध्या में विलीन होती काया-सा

Image result for घर  आँगन में पक्षी

घर के आँगन में वृक्ष का घर

वृक्ष के आँगन में पक्षी का घर 

आकाश के आँगन में उड़कर

संध्या में विलीन होती काया-सा

लौटता पक्षी वृक्ष के आँगन में


अनन्त के आँगन में आकाश का घर

आकाश के आँगन में सूर्य का घर

सूर्य के आँगन में चन्द्रमा का घर

Image result for आँगन में चन्द्रमा

संध्या में विलीन होती काया-सा

सूर्य जा रहा चन्द्रमा के घर

उगती काया-सा चला आ रहा 

रात्रि के आँगन में चन्द्रमा

डूब रहा भोर की काया में


इतने बड़े आँगन में

कहाँ है किसी का घर

सब खोज रहे अपना-अपना घर

एक-दूसरे की काया में