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कोरोना योद्धाओं के साथ पत्रकारों ने भी अपनी जान का जोखिम उठाया, आखिर ये नाइंसाफी क्यों ?

कोरोना योद्धाओं के साथ पत्रकारों ने भी अपनी जान का जोखिम उठाया, आखिर ये नाइंसाफी क्यों ?

रायपुर। प्रदेश में सभी को कोरोना वैक्सीन का बेसब्री से इन्तजार था।  प्रदेश में   कोरोना वैक्सीन आ भी गया और लगना भी शुरु हो गया। ऐसे में लोगों को इसे लेकर उम्मीद और विश्वास बढ़ है। जो लोग कोरोना काल में अपनी जान पर खेल कर दूसरों की जान को बचाये है जिन्हें हम कोरोना योद्धा कहते है , उनमें से एक तबका  पत्रकारों और उनके परिवारों का भी है। वैक्सीन आने के बाद एक वरि्ष्ठ पत्रकार ने पूछ लिया पत्रकारों को कब वैक्सीन मिलेगी। इस सवाल का तुरंत उत्तर नही था। लेकिन इस सवाल की पड़ताल करने पर मालूम हुआ कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वैक्सीन आने के समय सबसे पहले पत्रकारों को देने का प्रस्ताव राज्य शासन ने दिया था, लेकिन केंद्र से अनुमति नहीं मिली है। हमारी समझ के हिसाब से जो पत्रकार टीका लगाना चाहते हैं, उन्हे अन्य फ्रंट लाइन वर्कर के रूप में टीका लगाया जाना चाहिए। 

दरअसल इसलिए, कि कई पत्रकार परिवारों पर मृत्यु की आपदा और कई इसका गहरा दंश झेल चुके हैं। आर्थिक हानि के साथ-स्वास्थ्य का नुकसान भी उठाना पड़़ा है। इनमें वे परिवार है जो किसी न किसी रूप में प्रिंट, इलेक्ट्राॅनिक, वेब मीडिया  एवं शासकीय मीडिया(जनसंपर्क विभाग) से भी जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ में इन सभी के परिवारों को उनकी स्वेच्छा के अनुरूप टीका लगाया जाना आवश्यक है।