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धान खरीदी केंद्र प्रभारियों ने विपणन संघ के खिलाफ खोला मोर्चा

धान खरीदी केंद्र प्रभारियों ने विपणन संघ के खिलाफ खोला मोर्चा


आरोप - परिवहन की लचर व्यवस्था के कारण धान का उठाव नहीं हुआ, शासन को हो रहा करोड़ों का नुकसान

नुकसान की भरपाई का भार सहकारी समितियों पर डालने की स्थिति आ गई है, समितियां डूबने के कगार पर पहुंच चुकी है

समिति प्रभारियों की मांग क्षतिपूर्ति पूर्णता शासन द्वारा वहन की जाए एवं अतिरिक्त खर्च की राशि भी शासन द्वारा समितियों को दिया जाए

सक्ती, 21 जून। धान उत्पादन और विपणन के लिहाज से प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है जांजगीर चाम्पा, हर साल जिला धान खरीदी में नंबर वन भी रहता है. जांजगीर-चांपा जिले में सहकारी समितियों के धान खरीदी प्रभारियों ने विपणन संघ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। धान खरीदी केंद्र प्रभारियों का  आरोप है कि परिवहन की लचर व्यवस्था के कारण धान का उठाव नहीं हुआ इसकी वजह से शासन को करोड़ों का नुकसान हो रहा है और नुकसान की भरपाई का भार सहकारी समितियों पर डाला जा रहा है, जिसकी वजह से समितियां डूबने की कगार पर पहुंच चुकी है।  सहकारी समिति प्रभारियों की मांग है कि क्षति पूर्ति प्रशासन के द्वारा वहन की जाए एवं अतिरिक्त खर्च की राशि भी शासन द्वारा समितियों को दिया जाए। 

गौरतलब है कि जांजगीर-चांपा जिले में साल 2020-21 में समर्थन मूल्य पर 196 सहकारी समितियों की 231 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से जिले के 1 लाख 83 हजार किसानों से 79 लाख 82 हजार क्विंटल  धान की खरीदी की गई है।  धान के परिवहन और उठाव में विलंब की वजह से धान में सुखद आया साथ ही अब मानसून में धान भीग कर सड़ रहा है इससे शासन को बड़ा नुकसान हुआ है,  इसकी भरपाई के लिए सहकारी समितियों पर बोझ डाला जा रहा है जिसके वजह से समिति प्रभारियों पर कार्यवाही की तलवार लटकी हुई है। पिछले साल भी ऐसी ही स्थिति निर्मित हुई थी जिसके बाद कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया था और शासन को बीच का रास्ता निकालना पड़ा था। इस बार फिर वही स्थिति दोबारा निर्मित हो गई है जब शासन को हो रहे धान के नुकसान का भार समितियों पर डाला जा रहा है। ऐसे में समितियों की आर्थिक स्थिति चरमरा चुकी है कर्मचारियों को वेतन तक मिलना मुश्किल हो गया है।  इस बार फिर सरकार को सामने आकर बीच का रास्ता निकालना होगा अन्यथा की स्थिति में सहकारी समितियों के धान खरीदी केंद्र प्रभारियों ने सामूहिक इस्तीफे की बात कही है। इस संबंध में फिलहाल जिले के अधिकारियों ने कैमरे के सामने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।