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भारत में आई मंदी : लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था की हालत खराब, दूसरी तिमाही में भी जीडीपी निगेटिव

भारत में आई मंदी :  लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था की हालत खराब, दूसरी तिमाही में भी जीडीपी निगेटिव

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों की एक रिसर्च के मुताबिक जुलाई से सितंबर की तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ माइनस 8.6 फीसदी रही है यानी जीडीपी में 8.6 फीसदी की गिरावट आई है. इसके पहले इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में करीब 24 फीसदी की भारी गिरावट आई थी.उनकी रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी तिमाही में भी जीडीपी निगेटिव है. 

कोरोना संकट की वजह लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था की हालत खराब रही है. हालांकि, अब इसमें कुछ सुधार के संकेत दिखे हैं और वित्त मंत्रालय का कहना है कि तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ पॉजिटिव हो सकती है. 

अर्थव्यवस्था में मान्य परिभाषा के मुताबिक अगर किसी देश की जीडीपी लगातार दो तिमाही निगेटिव में रहती है यानी ग्रोथ की बजाय उसमें गिरावट आती है तो इसे मंदी की हालत मान लिया जाता है. इस हिसाब से अगर दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वास्तव में निगेटिव है तो यह कहा जा सकता है के देश में मंदी आ चुकी है. 

मंदी का मतलब यह है कि देश की अर्थव्यवस्था का पहिया रुक गया है. इससे रोजगार कम होते हैं और लोगों के पास बचत के लिए धन कम हो जाता है. मंदी की वजह से आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ जाती हैं. लोगों की आमदनी, औद्योगिक उत्पादन, थोक-खुदरा बिक्री और रोजगार सबमें गिरावट आ जाती है. मंदी लंबे समय तक चलने पर कारोबार और बैंक फेल होेने लगते हैं. 

गौरतलब है कि साल 2008 में जब दुनिया के कई देशों में मंदी आई थी, तब भी भारत मजबूती से अपने पैरों पर खड़ा रहा. भारत के अपने बड़े बाजार, सरकारी खर्च, भारतीय कारोबारियों के निवेश, जनता के बचत, निवेश और भारी खपत की वजह से अर्थव्यवस्था टिकी रह पाई थी.