breaking news New

ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, झारावाही और हतलानार कन्या आश्रम शाला का निर्माण मूल स्थान पर करने की मांग

ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन,  झारावाही और हतलानार कन्या आश्रम शाला का निर्माण मूल स्थान पर करने की मांग

हेमंत संचेती/ नारायणपुर। जिले के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र अबूझमाड़ के ग्रामीण अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर अब जागृत होने लगे हैं, अब ग्रामीण भी चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ लिख कर अच्छी नौकरियां करें , ना कि लाल आतंक के साए में अपना जीवन खराब करें। 

यही कारण है कि अबूझमाड़ के घोर नक्सल प्रभावित ग्राम पंचायत झारावाही के ग्रामीण बड़ी संख्या में जिला कलेक्टर के पास कन्या आश्रम झारावाही और कन्या आश्रम हतलानार के भवन का निर्माण कार्य मूल स्थान झारावाही और हतलानार में कराने की मांग को लेकर महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने जिला मुख्यालय पहुंचे। 

ग्रामीणों का कहना है कि पहले की स्थिति काफी दिक्कत भरी थी जिसके कारण उनके गांव में भवन निर्माण कार्य नहीं हो पा रहे थे लेकिन अब स्थिति परिस्थिति में बड़ा बदलाव आया है। हमारे गांव तक चौड़ी सड़क का निर्माण होने लगा है तो क्या कन्याश्रम भवन का निर्माण कार्य हमारे गांव में नहीं हो सकता हमारे गांव के कन्या आश्रम शालाओं के भवन का निर्माण कार्य स्थल परिवर्तन कर कुरुषनार और कोडोली में किया गया है, जोकि गलत है। 

हमारी मांग है कि इन भवनों का निर्माण इनके मूल स्थान झारावाही और हतलानार पर होना चाहिए जिससे हमारे बच्चे हमारे समक्ष पढ़े लिखे और आगे बढ़े। अबूझमाड़ के बच्चे भी पढ़ लिख कर अपने गांव अपने जिले और अपने देश का नाम रोशन करना चाहते हैं, इन्हें मौका मिलना चाहिए ताकि बदलते अबूझमाड़ की छवि देश दुनिया तक पहुंचे वही ज्ञापन में ग्रामीणों ने 7 दिवस के अंदर स्थल परिवर्तन को पुनः मूल्य स्थान पर नहीं किए जाने पर बच्चों के साथ धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होने की बाद भी लिखी है। 

गांव तक चल रहे सड़क निर्माण का जायजा लेने कलेक्टर वेएसपी साहब हमारे गांव तक आ चुके हैं और उन्होंने हमसे मिलकर कहा था कि अब सड़क बनने के बाद आपके गांव तक अस्पताल स्कूल भवन पंचायत भवन जैसे विकास कार्य पहुंचेंगे तो फिर हमारे गांव के स्कूल भवनों को फिर क्यों दूसरे ग्राम पंचायत के गांव में निर्माण किए जाने का आदेश जारी किया गया है।

अगर ऐसा होता है तो फिर जिला प्रशासन पर हम कैसे विश्वास कर सकेंगे हम ग्रामीणों का विकास हमारे गांव तक पहुंचेगा तभी तो हम भी कहेंगे कि शासन प्रशासन ने हमारे गांव तक विकास पहुंचाया है हम भी आगे बढ़ना चाहते हैं जिसके लिए हम शासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं।