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हितग्राहियों तक पहुंचने लगा गोधन न्याय योजना का व्यापक लाभ

हितग्राहियों तक पहुंचने लगा गोधन न्याय योजना का व्यापक लाभ


अब तक 2,61,961 क्विंटल गोबर बेच 11823 पषुपालकों ने लिया गोधन न्याय का सीधा लाभ

बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले में गोधन न्याय योजना का व्यापक लाभ हितग्राहियों तक पहुंचने लगा है। एक ओर जहां निर्धारित दर पर गोबर बेचकर 11 हजार 823 पषुपालक ग्रामीणों को उनके उत्पाद का लाभ मिलने लगा है वहीं 144 समूहों से जुड़ी 1 हजार 516 महिलाओं के लिए स्वावलंबन से स्वरोजगार का सपना पूरा हो रहा है। कहीं महिलाएं गोबर विक्रय कर अपने घरेलू उत्पाद खरीद रहीं हैं तो कहीं पर मोटरसायकल जैसे संसाधन लेने का कार्य हुआ है। सबसे महत्वपूर्ण लाभ का दायरा ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय महिलाओं के स्व सहायता समूहों को होने लगा है जिन्हे अपने परिश्रम के बदले हजारों रूपए का सीधा लाभ गौठानों के माध्यम से होने लगा है। जनपद पंचायत खड़गंवा के गांव सकरिया में रहने वाले दुग्ध उत्पादक किसान श्री जयंतराम कहते हैं पहले जानवरों से निकलने वाले गोबर की कोई कीमत नहीं मिलती थी परंतु भूपेष सरकार की योजना से अब गोबर भी नगद फायदे की चीज बन गया है। दो माह में ही सकरिया के ग्राम गौठान मे रोजाना लगभग एक से डेढ़ क्विंटल गोबर बेचकर जयंत राम ने 30 हजार रूपए से ज्यादा खाते में प्राप्त कर लिए हैं। घर में होने वाले दूध का पैसा मिलाकर जयंत राम ने एक नई भैंस खरीद ली। इसी प्रकार पिपरिया की रहने वाली श्रीमती सीता देवी ने गौठान से जुड़कर गोधन न्याय योजना का लाभ लेते हुए अपने पति के लिए एक मोटरसायकल खरीद ली है। इस तरह से गोधन न्याय योजना के कई लाभार्थी हैं जो अब बेहतर जीवन यापन की ओर अग्रसर हुए हैं।

          इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए गोधन न्याय योजना के नोडल कृषि विभाग प्रमुख श्री पी एस दीवान ने बताया कि गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन जिले में कलेक्टर श्री ष्याम धावड़े के निर्देषन में किया जा रहा है। इसके लिए पंचायत एंव ग्रामीण विकास विभाग के साथ कृषि, सहकारिता और नगरीय विकास विभाग मिलकर योजना का बेहतर क्रियान्वयन कर रहे हैं। कोरिया जिले में अब तक 136 ग्राम गौठान व 8  शहरी   गौठानों मंे गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन वहां बनाई गई गोठान समितियों की देखरेख में किया जा रहा है। अब तक कोरिया जिले में 11 हजार 28 ग्रामीण व 795 षहरी पषुपालकों से कुल 2 लाख 61 हजार 961 क्विंटल गोबर का क्रय किया जा चुका है। जिसके एवज में पषुपालकों को उनके खातों में 5 करोड़ 23 लाख रूपए से ज्यादा की राषि  सीधे खातों में हस्तांतरित की गई है।

        सुराजी ग्राम येाजना के तहत नरवा गरूवा घुरूवा बाड़ी की संकल्पना को साकार करने के लिए कोरिया जिले में गौठानों का निर्माण षहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कराया गया है। अब तक कुल 8 गौठान शहरी व 136 ग्रामीण गौठान क्षेत्रों के अलावा 187 नए गौठान ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारंभ कर लिए गए हैं जहां गोधन न्याय योजना प्रारंभ की गई है। पशुपालकों से लिए गए गोबर को वर्मी टांकों की मदद से स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा वर्मी कंपोस्ट में बदलने का कार्य किया जा रहा है। अब तक 144 स्व सहायता समूह की महिलाओं को इस कार्य से संलग्न कर स्वरोजगार का एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराया गया है। उप संचालक कृषि ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि राज्य षासन के निर्देषानुसार समूहों के माध्यम से तैयार वर्मी कंपोस्ट को गुणवत्ता परीक्षण के बाद पैकिंग कर किसानों को केसीसी के माध्यम से वितरित किया गया है। जिले में इस साल खरीफ की फसल में ही उपयोग करने के लिए अब तक लगभग 15 हजार 500 किसानों ने 9814 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद का उठाव किया है।

        विदित हो कि कोरिया जिले के किसानों के द्वारा खरीदे गए वर्मी खाद के अलावा विभिन्न विभागों ने भी बड़ी मात्रा में वर्मी खाद का उठाव गौठानांे के माध्यम से किया है। इनमें वन मंडलों के द्वारा 4517 क्विंटल खाद उठाव किया गया है। वहीं कृषि विभाग के द्वारा 6 हजार 165 क्विंटल वर्मी खाद तथा उद्यान विभाग द्वारा 2 हजार 846 .क्विंटल वर्मी खाद लेकर पौधरोपण में उपयोग किया गया है। इस तरह गोधन न्याय योजना के तहत समूहों के माध्यम से बनी हुई 29 हजार 358 क्विंटल वर्मी खाद का विक्रय होने से सहकारिता के माध्यम से 71 लाख रूपए से अधिक राषि सीधे ग्रामीण महिलाओं के खातों में पहुंची हैं। गोधन न्याय योजना के इस चक्रीय पद्धति से एक ओर समूहों को रोजगार के साथ आर्थिक लाभ मिल रहा है वहीं 5 करोड़ 23 लाख रूपए से ज्यादा की राषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न हितग्राहियों तक पहुंची हैं।