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विश्व हीमोफीलिया दिवस पर होंगे जागरुकता कार्यक्रम

विश्व हीमोफीलिया दिवस पर होंगे जागरुकता कार्यक्रम

राजनांदगांव। शरीर पर चोट लगने की स्थिति में खून का निकलना बंद ना हो रहा हो तो यह हीमोफीलिया रोग का लक्षण भी हो सकता है। यह लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि हीमोफीलिया के दौरान होने वाला आंतरिक रक्तस्राव अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है और जीवन को खतरे में डाल सकता है।

इस आशय का प्रचार-प्रसार करने के लिए जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हीमोफीलिया रोग के विषय में जन-जागरुकता के उद्देश्य से हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न माध्यमों से यह प्रचारित करने का प्रयास किया जाता है कि हीमोफिलिया या पैतृक रक्तस्राव एक आनुवांशिक (माता-पिता से बच्चों में होने वाली) रोग है जो आमतौर पर पुरुष को होती है और महिला द्वारा फैलती है। हीमोफीलिया की अनुवांशिक स्थिति है। यह स्थिति इलाज योग्य नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को कम करने और भविष्य की स्वास्थ्य जटिलताओं को रोकने के लिए इसका इलाज किया जा सकता है। 

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया : हीमफीलिया दिवस के अवसर पर इस रोग के लक्षण, कारण की जानकारी देते हुए इससे बचाव संबंधी उपायों का प्रचार-प्रसार किया जाता है, ताकि पीड़ित को इसके खतरे तथा सावधानीपूर्वक बचाव के प्रति सचेत किया जा सके। हीमोफीलिया रोग होने का खतरा नवजात शिशुओं पर भी रहता है। यह गर्भवती महिला से शिशु में फैलता है।

इस तरह प्रभावित करता है हीमोफीलिया

हीमोफीलिया एक ऐसी दुर्लभ स्थिति है, जिसमें रक्त का थक्का ठीक से नहीं जमता है। हीमोफीलिया पीड़ित लोगों में कुछ निश्चित प्रोटीन की कमी होती है जिसे क्लॉटिंग कारक कहा जाता है। ऐसे 13 प्रकार के क्लॉटिंग (रक्त स्कंदन) कारक हैं, जो चोट वाले स्थान पर खून के बहाव को रोकने के लिए प्लेटलेट्स के साथ काम करते हैं। प्लेटलेट छोटे रक्त कोशिकाएं हैं जो अस्थि-मज्जा में बनती हैं। स्कंदन कारक का अत्यधिक नुकसान रक्तस्राव को जन्म देता है। एक सहज या आंतरिक रक्तस्राव मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंग के भीतर होने पर जीवन के लिए घातक हो सकता है।

हीमोफीलिया के होते हैं लक्षण

हीमोफीलिया के लक्षण अलग-अलग तरह से प्रकट होते हैं। यदि शरीर में क्लॉटिंग-कारक के स्तर में बहुत कम मात्रा में कमी हो तो शरीर में शल्य चिकित्सा या आघात (गंभीर चोट) के बाद ही खून बह सकता है और यदि क्लॉटिंग-कारक के स्तर में कमी गंभीर होती है तो सहज रूप में रक्तस्राव का अनुभव हो सकता है। रक्तस्राव बाहरी या आंतरिक रूप में भी हो सकता है।

सहज रक्तस्राव के लक्षण

० कट या चोटों से ज्यादा खून बहना।

० अस्पष्ट चोटें।

० टीकाकरण के बाद असामान्य रक्तस्राव होना।

० जोड़ों में दर्दए सूजन आना।

० शरीर में नीले.नीले निशानों का बनना।

० मसूढ़े से खून बहना।

० कई बड़ी या गहरी चोटें उत्पन्न होना।

० मूत्र या मल में खून निकलना।

० शिशुओं में अस्पष्ट चिड़चिड़ाहट।

० बार-बार नाक से खून आना।

        

मस्तिष्क रक्तस्राव के लक्षण

सिरदर्द, उल्टी, सुस्ती, व्यवहार में परिवर्तन, चक्कर आना, दृष्टि की समस्याएं, लकवा और दौरे आदि समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

मामूली चोट के लिए प्राथमिक चिकित्सा

दवा और पट्टी का उपयोग आमतौर पर रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है। त्वचा के निचले छोटे क्षेत्रों में खून बहने को रोकने के लिए एक बर्फ पैक का उपयोग किया जा सकता है। मुंह में मामूली रक्तस्राव को कम करने के लिए आइस पॉप का उपयोग किया जा सकता है।

राहत के अन्य उपाय

० नियमित व्यायाम।

० दांत और मुंह को स्वच्छ रखना।

० रक्त दान करते समय या रक्त स्थानांतरण के दौरान हीमोफीलिया रोग की जांच।

० टीकाकरण सुनिश्चित कर लेना चाहिए।