दीन-दुखियों के सेवा में सदैव तत्पर रहने वाले मनीषी दाऊ कल्याण सिंह

दीन-दुखियों के सेवा में सदैव तत्पर रहने वाले मनीषी दाऊ कल्याण सिंह

भाटापारा में जन्में दाउ कल्याण सिंह का नाम प्रदेश में आदर के साथ लिया जाता है। इनका जन्म 4 अप्रैल 1876 को हुआ था, दाउ जी विलक्षण प्रतिभा के धनी व दीन-दुखियों के सेवा में सदैव तत्पर रहने वाले मनीषी थे। दाऊ जी को लोग सिर्फ डी के अस्पताल की जमीन के दानदाता के रूप में जानते हैं, पर ये परिचय इस महान दानदाता के लिए काफी नहीं है।

1934 में शासन द्वारा संचालित सिल्वर जुबली हास्पिटल का नामकरण उनके दान के कारण डी.के.. हास्पिटल किया गया था जो नई राजधानी बनने के बाद अस्पताल को अंबेडकर चिकित्सालय के रूप में जाना जाने लगा। इसके बाद दाऊ कल्याण सिंह मंत्रालय भवन के नाम से जाना जाने लगा और अब वह डीके सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बन चुका है। दाऊ कल्याण सिंहजी द्वारा  1784 एकड़ जमीन की दान से रायपुर में कृषि महाविद्यालय प्रारंभ की गई थी जो अब कृषि विश्वविद्यालय का रूप ले लिया है और भाटापारा में दाऊ कल्याण सिंह कृषि महाविद्यालय प्रारंभ किया गया है। रायपुर का वशेशरनाथ क्षय आरोग्यधाम टाटीबंध में जो उनके पिताजी के नाम पर दी गई दान से आरंभ की गई थी, अभी अखिल भारतीय (एम्स) आयुर्वेद संस्थान का रूप ले लिया है। समाज सेवा के अन्य क्षेत्रों में भी दाउ कल्याण सिंह जी का योगदान सदैव याद रखा जाने वाला रहा है । इसके अतिरिक्त दाउ कल्याण सिंह ने रायपुर में पुत्री शाला, जगन्नाथ मंदिर, भाटापारा में पुलिस थाना सहित अनेक भवनों के लिए भूमि व राशि दान में दिया जिनमें चर्च के लिए भी सहर्ष भूमि दान दिया जाना दाउ जी के सामाजिक सौहाद्र को प्रदर्शित करता है। 

आज का एम्स अस्पताल भी दाऊ जी की दान की हुई जमीन पर ही बना है। दाऊ जी ने 1944 में डी के अस्पताल वाली जमीन के साथ में भवन निर्माण के लिये 1,25,000/- नगद (वर्तमान की गणना में लगभग 70 करोड़) भी दिये थे, लभान्डी की जमीन के साथ कृषि महाविद्यालय और गरीब छात्रों के हास्टल निर्माण के लिए 112000/- (वर्तमान के लगभग 62 करोड़ रूपये), टी.बी.अस्पताल के लिए 323 एकड़ जमीन, रायपुर जगन्नाथ मंदिर के खर्चे के लिये संपूर्ण खैरा ग्राम का दान,कृषि पर रिसर्च के लिये बरोंडा ग्राम में जमीन, भाटापारा में कृषि विज्ञान हेतू विशाल जमीन, भाटापारा में अकाल के समय कल्याण सागर जलाशय का निर्माण, भाटापारा में विशाल मवेशी अस्पताल,गरीबों के लिये पुस्तकालय का निर्माण जैसे अनेकों पुण्य कार्य इस महादानी ने छत्तीसगढ़ में किये।  दाउ जी के यादों को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए 4 अप्रैल के दिन को दानशीलता दिवस के रूप में मनाते हैं।