रवीन्द्रनाथ टैगोर की स्मृति में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः ओ मेरे भारत के जन

रवीन्द्रनाथ टैगोर की स्मृति में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः ओ मेरे भारत के जन



भटक गये हैं देश के बादल

सूख रहा है देश का जल

बाँझ हो रही देश की धरती

पशु-पंछी सब यहाँ विकल

बदल गये हैं बीज देश के

बिलख रहे हैं यहाँ किसान

हुनरमंद असहाय देश के

दो रोटी में अटकी जान

बिखर गया है देश का आँगन

और मर रहे देश के गाँव

भूल गये अपनी पगडण्डी

ठिठक गये हैं देश के पाँव

बिगड़ गयी है देश की बानी

डूब रहा है देश का मन

जहरीली है हवा देश की

टूट रहे हैं देश के तन

अकड़ रहे हैं देश के नेता

पकड़े परदेसी का हाथ

देश बँट गया जात-पाँत में

कोई नहीं है सबके साथ

बेच रहे जो देश के साधन

लूट रहे जो देश का धन

उनको कब तक क्षमा करोगे

ओ मेरे भारत के जन