कोरोना संकट : नीति में बदलाव करते हुए भारत ने विदेशों से मदद स्वीकार करने का फैसला किया

कोरोना  संकट : नीति में बदलाव करते हुए भारत ने विदेशों से मदद स्वीकार करने का फैसला किया

नई दिल्ली, 2 अप्रैल। अपनी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार भारत सरकार ने कोरोना वायरस से उपजी महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए विदेशों से मदद स्वीकार करने का फैसला किया है. यानी अब विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोग और एनजीओ आदि संस्थाएं भी पीएम केयर्स फंड में पैसा दे सकेंगे जिसे कोरोना वायरस से लड़ने के लिए बनाया गया है.

एक सूत्र का कहना था, ‘यह महामारी असाधारण है. प्रधानमंत्री ने विदेशों में स्थित हमारे दूतावासों के मुखियाओं से बात की थी. उन्होंने इन सभी से कहा था कि वे पीएम केयर्स फंड के लिए पैसा जुटाने की कोशिश करें.’ यह एक चैरिटेबल फंड है. सूत्रों के मुताबिक इसे कोरोना वायरस से निपटने की दिशा में सरकार की मदद के लिए देश-विदेश से आ रही मदद की पेशकश को देखकर बनाया गया है. इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और इसके सदस्यों में गृह मंत्री, वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री शामिल हैं. दुनिया भर से लोगों ने इसके लिए अपना सहयोग भेजा है. इनमें माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला की पत्नी अनुपमा भी शामिल हैं जिन्होंने दो करोड़ रु दिए हैं.

भारत में कोरोना वायरस की चपेट में आए लोगों का आंकड़ा 1800 को पार कर गया है. अब तक इस वायरस के संक्रमण के बाद 41 मौतें हो चुकी हैं.