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कोल खनन: नीलामी या पट्टा आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अधीन होगा

कोल खनन: नीलामी या पट्टा आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अधीन होगा

नयी दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने झारखंड में नौ कोल ब्लॉकों की वर्चुअल नीलामी के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका की सुनवाई दिवाली की छुट्टी के बाद के लिए स्थगित करते हुए शुक्रवार को कहा कि लाइसेंस, पट्टा आदि से संबंधित केंद्र का आदेश शीर्ष अदालत के अंतिम आदेशों के अधीन होगा।

मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि झारखंड में नौ खानों की नीलामी, लाइसेंस, पट्टा आदि अदालत के अंतिम आदेशों के अधीन होगा।

केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया कि इस बीच कोई पेड़ नहीं काटा जायेगा और खनन नहीं होगा। इसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई दिवाली की छुट्टी के बाद के लिए स्थगित कर दी।

पिछली सुनवाई को न्यायालय ने पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र के 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले खदान से खनन पर रोक लगाने के संकेत दिये थे और कहा था कि वह देश के विकास को रोकना नहीं चाहता, लेकिन वह यह भी नहीं चाहता कि किसी भी प्रकार से प्राकृतिक सम्पदा का नुकसान हो।

खंडपीठ ने कहा था कि वह देशभर के लिए आदेश जारी करने पर विचार करेगा कि अगर कोई खदान पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र के 50 किलोमीटर के दायरे में आती है तो खनन की इजाजत नहीं होगी।

न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा था, “हम देश का विकास रोकना नहीं चाहते, लेकिन हम यह भी नहीं चाहते कि किसी भी तरह प्राकृतिक सम्पदा का क्षय हो।” मुख्य न्यायाधीश की यह प्रतिक्रिया उस वक्त आयी थी, जब एटर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा था कि उसके किसी भी आदेश का पूरे देश में असर होगा। सरकार देश की अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण कर रही है।

उसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई आज तक के लिए स्थगित कर दी थी।