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सिलगेर काण्ड : सरकार ने बनाई 8 सदस्यीय जांच कमेटी..बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल बने अध्यक्ष..भाजपा ने उठाए मंशा पर सवाल..जांच कमेटी में विपक्ष के विधायक क्यों नहीं..बीजेपी की जांच समिति दबाव में!

सिलगेर काण्ड : सरकार ने बनाई 8 सदस्यीय जांच कमेटी..बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल बने अध्यक्ष..भाजपा ने उठाए मंशा पर सवाल..जांच कमेटी में विपक्ष के विधायक क्यों नहीं..बीजेपी की जांच समिति दबाव में!

जनधारा समाचार
रायपुर.  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर बस्तर में हुए सिलगेर काण्ड पर सरकार ने एक आठ सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है जिसके अध्यक्ष बस्तर विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल हैं. इसके अलावा समिति में केशकाल विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संतराम नेताम, दंतेवाड़ा विधायक देवती कर्मा, कांकेर विधायक एवं संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, अंतागढ़ विधायक अनूप नाग, बीजापुर विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम मंडावी, चित्रकोट विधायक राजमन बेंजाम तथा नारायणपुर विधायक और छत्तीसगढ़ हस्त शिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप शामिल हैं। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि भी इस टीम में शामिल रहेंगे।

मान जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन की टीम सुकमा और बीजापुर जिले की सीमा में स्थित ग्राम सिलगेर की घटना के संबंध में स्थानीय ग्रामीणों से उनका पक्ष सुनेगी और चर्चा कर तथ्य जुटाएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर यह पहल की गई है. दूसरी ओर भाजपा ने इस समिति के गठन पर कुछ सवाल खड़े किए हैं.

भाजपा प्रवक्ता गौरी शंकर श्रीवास ने कहा कि जांच समिति में विपक्ष का एक भी विधायक का शामिल ना होने, निष्पक्ष जांच कराने की मंशा को खारिज करता है. इस घटना को लेकर सरकार की किरकिरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है और अब एकतरफा जांच समिति गठित करने से यह साबित होता है कि सरकार इस मामले में पर्दा डालकर पुलिस प्रशासन को बचाना चाहती है.



बीजेपी की जांच समिति दबाव में!

जानते चलें कि प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय ने भी सिलगेर काण्ड पर एक जांच समिति गठित की थी लेकिन उसे जांच करने की अनुमति नही दी गई और मामला ठण्डा पड़ गया है. खबर यह भी है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय भी इस काण्ड पर चौकन्ना है और वह जांच वगैरह कराकर सुरक्षाबलों के हौसले को दबाना नही चाहता इसलिए संभवत: भाजपा के जांच दल पर केन्द्र की तरफ से कुछ दबाव है नतीजन जांच समिति के सदस्य चुप होकर रह गए! राज्य सरकार द्वारा गठित जांच समिति में भाजपा के किसी विधायक का नाम ना होना इस आशंका को बलवती करता है.

लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं को लगता है कि पार्टी के लिए यह एक बड़ा मुददा हो सकता है तथा आदिवासियों का समर्थन हासिल किया जा सकता है इसलिए सिलगेर काण्ड पर चुप्पी साधना या निष्क्रिय हो जाना पार्टी के लिए नुकसानप्रद हो सकता है!