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जमीन से जुड़े माटी पुत्रों के माटी प्रेम की दास्तान

जमीन से जुड़े माटी पुत्रों के माटी प्रेम की दास्तान


० छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड का किया भरपूर दोहन

० सस्ती जमीन को महंगी बनाने के खेल में ये सबसे आगे


विशेष संवाददाता
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से बहुत से लोगों ने यहां पर औने-पौने में जमीन खरीदकर करोड़ों रुपए कमाए हैं, उनमें सबसे अग्रणी भूमिका में यहां के दो माटीपुत्रों की रही। विरासत में मिली जमीन से जुडऩे की कला ने उन्हें और उनके आसपास के लोगों को पद, पॉवर और प्लानिंग के गेम में शामिल कर आपदा को अवसर में बदलने का भरपूर मौका दिया। भारतीय प्रशासनिक सेवा और वन सेवा से जुड़े इन दो अफसरों की आपसी जुगलबंदी के चलते इन्होंने दोनों ही पार्टी की सत्ता पर सवार होकर निर्णय और क्रियान्वयन के स्तर पर भरपूर दोहन किया। आज छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की स्थिति राज्य परिवहन निगम की तरह हो गई है। बोर्ड का हर छोटा-बड़ा कर्मचारी-अधिकारी जानता है कि इसे किस-किसने अब तक लूटा है। विधायकों के आमोद-प्रमोद के नाम क्वींस क्लब का मामला हो या हाउसिंग बोर्ड की कालोनियों से लगी जमीनों को औने-पौने में खरीदने का मामला सभी जगह उनकी और इनके परिवार की संलिप्तता दिखाई देती है।

हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी की कचना कॉलोनी
कचना कॉलोनी के लिए हाऊसिंग बोर्ड ने वर्ष 2004-05 में खसरा नं. 524 रकबा 5.00 एकड़ तथा उसी के पास अन्य खसरे पर 12.00 एकड़ भूमि का आबंटन कराया गया। इसी वर्ष इस भूमि से लगी हुई खसरा नं. 521 लगभग 0.60 एकड़ जमीन बेटी के नाम से खरीदी गई। दूसरे जोड़ीदार ने पत्नी और रिश्तेदारों के नाम से खसरा क्रमांक 539, खसरा क्रमांक 530, 532, 539 एवं 612 तथा खसरा कमांक 539, 541 तथा 542 में लगभग 9.00 एकड़ भूमि खरीदी। कुछ जमीनों पर इनके द्वारा सिविल लाईन का पता एवं कुछ जगहों पर भोपाल का पता दर्शाया गया है।

धरमपुरा हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी
धरमपुरा में आईपीएस, आईएएस, आईएफएस एवं जजों के लिए कॉलोनी निर्माण करने हेतु वर्ष 2005 में खसरा नं. 172, 187, 241, 242, 278. 312 आदि पर रकबा लगभग 90.00 एकड़ भूमि शासन से आवंटित करायी गयी। इसी भूमि से लगी हुई खसरा कमांक 183, 187, 162, 165, 766, 167, 169, 172,182, 183 एवं 293 में रकबा 18.12 एकड़ भूमि भूमिपुत्र ने खरीदी गई। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि हाऊसिंग बोर्ड के द्वारा जो प्लाट इन्हें आबंटित किया गया, उसी से लगी जमीन इनके द्वारा खरीदी गई। यह भी महज इत्तेफाक नहीं हो सकता। यह इन दोनों अफसरों की आपसी जुगलबंदी का नतीजा था कि हर बार सस्ती जमीन को महंगी बनाने के खेल में ये और इनके आसपास के लोग सफल रहे।

बोरियाकला हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी-
बोरियाकला में हाऊसिंग बोर्ड वर्ष 2007-08 में खसरा क्रमांक 1493, 1495, 1496, 1498 खसरा पर रकबा 100.00 एकड़ भूमि आबंटित कराई गई। इसके आसपास लगी हुई भूमि खसरा 1618/1 व 1018/6 पर वन विभाग के अधिकारी ने पत्नी के नाम से, 1618/7 व 1618/8 साली के नाम से, 1618/3 रिश्तेदार के नाम से कुल 3.00 एकड़ तथा साथी अधिकारी ने पिता के नाम से खसरा कं. 1619/1 व 1619/2 के नाम से 3.00 एकड़ तथा संयुक्त रूप से अपना हिसाब-किताब रखने वाले राजदार के नाम से खसरा क्रमांक 1618/5, 1619/3, 1620, 1621,1622, 1623, 1624 व 1625 रकबा 16.00 एकड़ खरीदी गई है। इन अधिकारियों के द्वारा सभी कॉलोनी की आस-पास किस तरह से भूमि खरीदकर लाभ कमाया गया।

कबीर नगर, कोटा एवं टाटीबंध हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी-

हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी बनाने के लिए शासन द्वारा कबीर नगर, कोटा एवं टाटीबंध में लगभग 300.00 शासकीय एकड़ भूमि आवंटित की गयी। इन तीनों कॉलोनियों के मध्य गोगांव में पत्नी के नाम से खसरा क्रमांक 42/15, रिश्तेदार के नाम से खसरा कमांक 42/18, खसरा कमांक 42/19, सिविल लाईन निवासी रिश्तेदार के नाम से खसरा क्रमांक 42/22, खसरा कमांक 42/24 खसरा कमांक 42/26 तथा अन्य नाम से खसरा कमांक 42/28 रकबा में कुल 3.41 एकड़ तथा इन जमीनों के बीच-बीच में उपलब्ध शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 42/16, 42/17, 42/20, 42/21 एवं 42/27 कुल रकबा 9.00 एकड़ पर भी कब्जा किया गया। यह विकसित कॉलोनी से लगे हुए जमीन को खरीदने तथा बीच-बीच में सरकारी जमीन पर कब्जा करने का एक सोची समझी चाल है, जो पद के दुरूपयोग तथा भष्टाचार के श्रेणी में आता है।

पुरैना, व्हीआईपी रोड हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी-
पुरैना में विधायकों, मंत्रियों एवं सांसदों के लिए कॉलोनी निर्माण की योजना जैसे ही बनाई गई। जमीन से विशेष प्रेम रखने वाले इन अफसरों द्वारा खसरा क्रमांक 482/2, 410/3, 410/8, 410/13, 161/2 462/3, 463/2, 463/3, 484/2, 464/4, 466/2, 466/9 एवं 466/10, बहन के नाम से 463/1, 464/1, 462/5, भाई के नाम से 409/1, अन्य नाम से 412/2, 412/3, कुल 6.00 एकड़ जमीन व्हीआईपी रोड में खरीदी। इस जमीन पर एक आलीशान होटल, कीचन बनाकर व्यवसायिक परिसर का निर्माण किया गया।

सड्डू हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी एवं अन्य-
हाऊसिंग बोर्ड के द्वारा गरीबों के लिए दीनदयाल कॉलोनी लाने के लिए जब शासन से जमीन ली गयी। इसी दरम्यान यहां भी भाभी और एक अन्य रिश्तेदार के नाम से खसरा कमांक 174/2 कुल 1.50 एकड़ जमीन कॉलोनी से लगी खरीदी गयी। अन्य जगहो जैसे कुम्हारी हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास 100.00 एकड़ तथा सिरपुर रोड़ पर 100.00 एकड़, पप्पु खनुजा के फार्म हाऊस के आगे 120.00 एकड़ तथा नकटी नया रायपुर में 10.00 एकड़ और दलदल सिवनी में 1.00 एकड़ जमीन खरीदी गयी है।

मामला चाहे जमीन खरीदी का हो या बहुत सारी चीजों को आपस में साझा करने का हो, इन दोनों अफसरों की जुगलबंदी देखते ही बनती है। अब राज्य में उनके सताए लोग उनके कारनामों को उजागर कर उन्हें कठघरे में देखना चाहता हैं। हाल ही में केंद्रीय टीमों ने इनकी खोज खबर लेनी शुरू भी कर दी है। आगे-आगे देखिए होता है क्या? सत्ता के गलियारों में अक्सर इन्हीं के नाम गूंजते रहते हैं। कभी भाजपा के नजदीक समझे जाने वाले इस ब्यूरोक्रेट ने वीआईपी रोड से लेकर महात्मा गांधी रोड तक अपनी माया फैला रखी है। अपने जमीनी प्रेम के कारण इन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद जमीन से जुड़े संस्कार में ही जुड़े रहने को प्राथमिकता दी। राज्य सत्ता बदलने के बाद ये माटीपुत्र कांग्रेस के करीब भी हो गए। अपनी चालाकी और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके इन्होंने कहां-कहां क्या क्या हासिल किया है, इसके दस्तावेज रकबा, खसरा के साथ इन दिनों सत्ता के गलियारों में घूम रहे हैं।