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अफगानिस्तान मुद्दे को लेकर रूस ने मॉस्को फॉर्मेट मीटिंग बुलाई

अफगानिस्तान मुद्दे को लेकर रूस ने मॉस्को फॉर्मेट मीटिंग बुलाई

अफगानिस्तान मुद्दे के लिए रूस ने मॉस्को फॉर्मेट मीटिंग बुलाई है. साल 2017 से शुरू हुए मॉस्को फॉर्मेट को अफगानिस्तान के मुद्दे को लेकर बनाया गया था. इस बैठक  के लिए अमेरिका, चीन, भारत, ईरान और पाकिस्तान समेत 10 देशों को निमंत्रण भेजा गया था.  अफगानिस्तान में सत्ता हासिल करने के बाद ये पहली बार है जब रूस इस मीटिंग का आयोजन कर रहा है। 

तालिबान के आधिकारिक प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने अपने ट्वीट में इस बात को साफ किया है कि भारत अफगानिस्तान की मदद करने के लिए तैयार है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि मॉस्को में हुई बैठक में भारतीय अधिकारी ने कहा है कि अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है। 

अफगानिस्तान के फंड फ्रीज हो जाने के बाद से ही इस देश पर आर्थिक संकट और भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है. चूंकि तालिबान ने अपनी समावेशी सरकार से जुड़े वादे नहीं निभाए हैं, ऐसे में रूस तालिबान को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता देने की जल्दी में नहीं है. 

गौरतलब है कि इस मीटिंग के लिए अमेरिका को भी न्यौता भेजा गया था लेकिन अमेरिका ने इस बैठक से पहले ही दोहा में तालिबान के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की है और अब इस बैठक में शामिल नहीं हो रहा है.

 वही कतर भी तालिबान को कह चुका है कि उन्हें अगर इस्लामिक सरकार चलानी है तो कतर से सीखना चाहिए. इसके अलावा कुछ मुस्लिम देश तालिबान में विदेश मंत्रियों को भेजकर उन्हें समावेशी सरकार चलाने और समाज में महिलाओं की भूमिका के महत्व के लिए भी अफगानिस्तान पहुंचने का प्लान कर रहे हैं. पाकिस्तान तालिबान को सपोर्ट करता है और अफगानिस्तान में बुरे हालातों के बीच इस देश को मदद भी पहुंचा रहा है लेकिन पाकिस्तान की भी अपनी सीमाएं हैं।